अजमेर में सैम्पल लेने के बाद कोरोना की रिपोर्ट चौबीस घंटे में।

  • रोजाना एक हजार से ज्यादा लोगों की टेस्टिंग।
  • पॉजिटिव मरीजों की संख्या भी बढ रही है।
  • अजमेर कलेक्टर की प्रभावी पहल।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – 21 जुलाई को भी अजमेर में कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों की संख्या बढऩे का सिलसिला जारी रहा। जिले में अब तक 12 हजार से भी ज्यादा संक्रमित हो गए। यही वजह है कि अजमेर महानगर और उपखंड के हर क्षेत्र में कोरोना पॉजिटिव मरीज चिन्हित किया गया है। चूंकि प्रतिदिन एक हजार लोगों की जांच की जा रही है, इसलिए पॉजिटिव मरीजों की संख्या भी अधिक है। अजमेर में जांच की संख्या बढ़े इसका निर्णय जिला कलेक्टर प्रकाश राजपुरोहित के निर्देश पर लिया गया। राजपुरोहित के कलेक्टर बनने से पहले अजमेर में रोजाना 200 से लेकर 300 लोगों तक की जांच हो रही थी। तब पॉजिटिव मरीजों की संख्या दस से तीस के बीच रहती थी। लेकिन अब जब एक हजार लोगों की टेस्टिंग हो रही है तब पॉजिटिव मरीजों की संख्या 100 तक पहुंच रही है। जाहिर है कि ऐसे बहुत से लोग इधर उधर घूम रहे हैं, जो लोग कोरोना पॉजिटिव हैं, लेकिन जांच के अभाव में अपने घर में क्वारंटीन नहीं है। कलेक्टर राजपुरोहित ने जो पहल की है, उसका सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि अब अधिक से अधिक कोरोना पॉजिटिव अपने घरों में क्वारंटीन हो रहे हैं। यदि टेस्टिंग की संख्या और बढ़ा कर पॉजिटिव मरीजों को घर पर क्वारंटीन कर दिया जाए तो आने वाले दिनों में अजमेर सामूदायिक संक्रमण से बच सकता है। प्रकाश राजपुरोहित ने पिछले दिनों जब कलेक्टर का पद संभाला तब चिकित्सा विभाग की ओर से यह भी दावा किया गया कि अजमेर में अब रोजाना दो हजार 500 लोगों की टेस्टिंग और रिपोर्ट की सुविधा उपलब्ध हो गई है। अच्छा हो कि चिकित्सा विभाग आने वाले दिनों में टेस्टिंग की संख्या और बढ़ाए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को घर पर क्वारंटीन किया जा सके। अजमेर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. केके सोनी ने कहा कि अब चौबीस घंटे में रिपोर्ट आ रही है। सैम्पल देने वाले व्यक्ति को अपनी रिपोर्ट का इंतजार नहीं करना पड़ रहा है। लोगों की सुविधा के लिए अजमेर के जेएलएन अस्पताल के यूरोलॉजी विभाग में हर समय टेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध है। कोई भी व्यक्ति जाकर कोरोना टेस्ट करवा सकता है। इसी प्रकार प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर भी सैम्पल लेने की व्यवस्था की गई है। डॉ. सोनी ने कहा कि अब स्वैच्छा से भी लोग कोरोना टेस्ट करवाने के लिए आगे जा रहे हैं। एसिम्टोमेटिक रिपोर्ट वाले मरीज को घर पर ही क्वारंटीन किया जा रहा है। इससे लोगों में अब अस्पताल में भर्ती होने का डर समाप्त हो गया है। डॉ. सोनी ने लोगों से अपील की कि जो व्यक्ति घर पर क्वारंटीन है उसके परिवार के साथ सामाजिक भेदभाव न किया जाए। विभाग को ऐसे शिकायतें मिली है कि क्वारंटीन हुए व्यक्ति के परिवार के सदस्यों के साथ पड़ौसी भी भेदभाव करने लगे हैं। डॉ. सोनी ने कहा कि जो व्यक्ति एसिम्टोमेटिक है, उससे डरने की कोई जरूरत नहीं है। ऐसा व्यक्ति 14 दिनों तक अपने घर पर क्वारंटीन रहता है तो वह नेगेटिव होने के बाद सामान्य रूप से कामकाज कर सकता है। डॉ. सोनी ने एक बार फिर बुजुर्ग लोगों से अपील की है कि वे घरों से बाहर न निकले। सामान्य व्यक्ति भी जरुरत होने पर ही घर से बाहर निकले।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here