मुख्यमंत्री का खेमा विधानसभा अध्यक्ष के माध्यम से बागियों की विधायकी छिनवाना चाहता है,
जबकि बागी विधायक कांग्रेस में रहते हुए गहलोत के नेतृत्व को चुनौती देना चाहते हैं।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – राजस्थान के मौजूदा राजनीतिक हालात देखे तो साफ जाहिर है कि अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को कोई खतरा नहीं है। भले ही सचिन पायलट के पास कांग्रेस के 19 व तीन निर्दलीय विधायक हों, लेकिन फिर भी गहलोत विधानसभा में अपना बहुमत साबित कर देंगे। यही वजह है कि अब राजस्थान की राजनीति में पेट भी नहीं दिखे और बच्चा भी हो जाए वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। 200 सदस्यों वाली विधानसभा में 109 सदस्यों का समर्थन होने के बाद भी सीएम गहलोत चाहते हैं कि विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी कांग्रेस के उन 19 विधायकों की विधायकी छीन लें, जो हरियाणा में बैठे हुए हैं। आमतौर पर कोई भी मुख्यमंत्री अपनी सरकार की चिंता करता है। यदि बहुत हो तो वह बागी विधायकों की परवाह नहीं करता। चूंकि राजस्थान में पेट दिखने वाली कहावत चरितार्थ हो रही है, इसलिए अशोक गहलोत सिर्फ अपनी सरकार बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पायलट के साथ जाने वाले बागियों की विधायकी भी छीनवाना चाहते हैं। इसके लिए विधानसभा के दरवाजे से लेकर हाईकोर्ट तक संघर्ष किया जा रहा है। पूरी उम्मीद है कि यह मुददा हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचेगा। अपनी पार्टी के 19 बागियों की विधायकी छीनवानी है, इसलिए सीएम गहलोत कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। छह माह पहले जब गहलोत ने बसपा के छह हाथियों को अपनी मु_ी में दबोच लिया था, तब भाजपा के विधायक मदन दिलावर ने विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को शिकायत की थी। दिलावर की शिकायत पर जोशी अभी भी विचार कर रहे है, जबकि सीएम गहलोत के विश्वास पात्र मुख्य सचेतक महेश जोशी ने पायलट वाले 19 विधायकों की शिकायत की तो अगले ही दिन सभी 19 विधायकों को अयोग्य ठहराने वाला नोटिस जारी हो गया। मदन दिलावर की शिकायत पर विधानसभा में भले ही मार्किंग भी नहीं हुई हो, लेकिन 19 विधायकों के विरुद्ध जारी नोटिस संबंधित विधायकों के घरों पर चस्पा कर दिए गए। विधानसभा अध्यक्ष के नोटिस को चस्पा करवाने में गहलोत सरकार के मुख्य सचिव से लेकर संबंधित एसडीओ तक सक्रिय हो गए। हालांकि माना तो यही जाता है कि विधानसभा अध्यक्ष संविधान के अनुरूप् ही निर्णय लेते हैं। लेकिन सब जानते हैँ कि किसी राज्य में राज्यपाल की क्या भूमिका होती है। सीपी जोशी कांग्रेस के टिकिटपर चुनाव जीते हैं, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष बनने के बाद जोशी भाजपा, बसपा, माकपा सहित कांग्रेस के विधायको के हितों का भी ख्याल रखते हैं।
गहलोत के नेतृत्व को चुनौती:
पायलट के नेतृत्व में भले ही 19 विधायकों ने बगावत कर ली हो, लेकिन अब ऐसे विधायक कांग्रेस में ही रह कर अशोक गहलोत के नेतृत्व को चुनौती देना चाहते हैं। कोई बागी अपनी विधायकी गवाना नहीं चाहता, इसलिए कोर्ट में हरीश साल्वे और मुकुल रोहतगी जैसे नामी वकील खड़े किए गए हैं। कोर्ट में बार बार कहा जा रहा है कि कांग्रेस के 19 विधायकों ने दल बदल कानून का उल्लंघन नहीं किया है। वे तो अभी कांग्रेस के जिम्मेदार और वफादार विधायक हैं। यदि विधानसभा सत्र के दौरान किसी प्रस्ताव पर वोटिंग होती है तो कांग्रेस के पक्ष में ही मतदान करेंगे। यानि पायलट के विधायक भी पेट दिखाने वाली कहावत चरितार्थ कर रहे हैं। हरियाणा में अज्ञातवास में रह रहे कांग्रेस के विधायकों का दावा है कि वे कांग्रेस को अपनी माता मानते हैं। भले ही अशोक गहलोत उन्हें गद्दार मक्कार, धोखेबाज या निकम्मा कहे। पायलट वाले विधायक कोर्ट में किसी बगावत से भी इंकार कर रहे हैं। अब देखना है कि ऐसे बागियों को कांग्रेस का विधायक रहते हुए अशोक गहलोत के नेतृत्व को चुनौती देने का अवसर मिलता है या नहीं। अभी तो जब गहलोत वाले विधयक जयपुर के होटल फेयर माउंट से और पायलट वाले विधायक अज्ञातवास से बाहर आएंगे तब राजस्थान की राजनीति में ज्यादा मनोरंजन देखने को मिलेगा।







