- राज्यपाल कलराज मिश्र ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का प्रस्ताव ठुकराया।
- तो क्या राष्ट्रपति शासन की ओर बढ़ रहा है राजस्थान।
- मुख्यमंत्री कानून से ऊपर नहीं, भाषा पर संयम रखे-भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – 24 जुलाई को राजस्थान के मौजूदा राजनीतिक हालातों में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बेहद गुस्से में नजर आए। गहलोत ने कहा कि मुझे उम्मीद थी कि राज्यपाल कलराज मिश्र विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की अनुमति दे देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मेरे यह समझ में नहीं आ रहा है कि राज्यपाल ऐसा व्यवहार क्यों कर रहे हैं? जबकि संविधान के मुताबिक राज्यपाल को मंत्रिमंडल के प्रस्ताव को स्वीकार करना ही पड़ता है। गहलोत ने कहा कि मेरे सरकार को गिराने के लिए भाजपा के नेता राजनीति का नंगा नाच करवा रहे हैं। लेकिन प्रदेश की जनता मेरे साथ है। जनता राजभवन को घेरने आ गई तो हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। गहलोत ने जिस अंदाज में यह बात कही, उससे प्रतीत होता है कि वे सीधे सीधे राज्यपाल को धमकी दे रहे हैं। यह बात अलग है कि सीएम गहलोत जब मीडिया के समक्ष धमकी दे रहे थे, तभी राजभवन से खबर आई कि मुख्यमंत्री ने विशेष सत्र बुलाने का जो प्रस्ताव रखा था उसे राज्यपाल ने ठुकरा दिया है। राज्यपाल का कहना रहा कि मौजूदा समय में कोरोना वायरस का संक्रमण है, इसलिए विधानसभा का सत्र आहूत नहीं किया जा सकता है। जानकारों की माने तो राजभवन की खबर गहलोत के पास पहले ही पहुंच गई थी, इसलिए उन्होंने राजभवन को घेरने की बात कही।
राष्ट्रपति शासन की ओर?:
राजस्थान के मौजूदा राजनीतिक हालातों को देखते हुए प्रतीत होता है कि प्रदेश अब राष्ट्रपति शासन की ओर बढ़ रहा है। कांग्रेस के 107 विधायकों में से 19 विधायक सचिन पायलट के नेतृत्व में अज्ञातवास में चले गए हैं। यदि सीएम गहलोत निर्दलीय विधायकों का जुगाड़ न कर सके, तो कांग्रेस की सरकार अल्पमत में है। हालांकि गहलोत 109 विधायकों के साथ गत 11 जुलाई से जयपुर की फेयर माउंट होटल में हैं। यानि पिछले एक पखवाड़े से सरकार होटल में बंधक बनी हुई है। इस बीच राज्यपाल की भूमिका को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का गुस्सा सड़कों पर आ गया है। गहलोत ने अपने समर्थक विधायकों की परेड को राजभवन में करवा दी है और अब राजभवन को घेरने की बात कही जा रही है। यानि पूरा प्रदेश अराजकता की ओर बढ़ रहा है। एक तरफ कोरोना वारयस के संक्रमण से प्रदेशभर में त्राहि त्राहि मची हुई तो दूसरी ओर सरकार राजभवन आमने सामने हैं। विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका पर सुप्रीम कोर्ट में विचार हो रहा है।
मुख्यमंत्री कानून से ऊपर नहीं:
भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कानून से ऊपर नहीं है। सरकार की यह जिम्मेदारी होती है कि सरकारी संस्थानों की रक्षा की जाए। लेकिन यदि मुख्यमंत्री ही राजभवन को घेरने की बात कहेंगे तो फिर सरकारी संस्थानों की रक्षा कैसे होगी? पूनिया ने कहा कि सीएम गहलोत कह रहे हैं कि राजस्थान की राजनीति में नंगा नाच हो रहा है। एक मुख्यमंत्री के लिए ऐसी भाषा शोभा नहीं देती। माना कि कांग्रेस के मौजूदा हालातों में सीएम गहलोत ने संयम खो दिया है। लेकिन उन्हें धैर्य दिखाने की जरुरत है। यह कांग्रेस का आंतरिक मामला है। गहलोत को बेवजह भाजपा को कोसना नहीं चाहिए। पूनिया ने कहा कि कांग्रेस के विधायक भी एकजुट नहीं है, तो फिर भाजपा क्या कर सकती है?







