नई दिल्ली – भारत सरकार ने 23 जुलाई 2020 को यकायक प्रिंट मीडिया के लिए नई मीडिया पॉलिसी की घोषणा बिना समाचार पत्र संगठनों से विचार विमर्श किये कर दी है । नियमानुसार पॉलिसी लागू करने से पहले समाचार पत्रों के संगठनों व भारतीय प्रेस परिषद में विचार विमर्श किया जाना चाहिए । कोरोना महामारी की वजह से बहुत सारे सरकारी काम काज नहीं हो पा रहे है । क्या इस पॉलिसी को लागू किया जाना इतना जरूरी है कि निर्धारित प्रकिया का भी पालन नहीं किया जाए । कारण साफ है कि सरकार प्रिंट मीडिया से भयभीत है और वह इसको नेस्तनाबूद करना चाहती है । अभी RPP Bill 2019 व अनुसलग्नक 10 का मामला भी लंबित है । अब यह नया मामला सामने आ गया है । सरकार अब लोकतांत्रिक व्यवस्था को ही नेस्तनाबूद करने में लगी हुई है । वह अपने द्वारा विकसित सोशल मीडिया को आगे करके अपना स्वार्थ सिद्ध करने में लगी हुई है । भारतीय प्रेस परिषद एक संवैधानिक संस्था है । पत्रकारों व समाचार पत्रों से संबंधित कोई भी नियम लागू करने से पहले इसकी सलाह ली जानी चाहिए । वर्तमान स्थिति में भारतीय प्रेस परिषद की तत्काल बैठक आयोजित की जानी चाहिए । जब सरकार ही कोरोना की परवाह नहीं कर रही तो प्रेस काउंसिल के सदस्यों को मूकदर्शक नहीं बने रहना चाहिए । अब लोकतांत्रिक व्यवस्था को बनाये रखने के लिए हमको अपनी प्रभावी भूमिका निभाने के लिये तैयार होना पड़ेगा, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य अशोक कुमार नवरत्न इन्होंने इस बारे में भारतीय प्रेस परिषद के सचिव को पत्र लिखा है।







