अजमेर के मित्तल अस्पताल की संरक्षिका डॉ. शकुंतला किरण का निधन।

अजमेर (एस.पी.मित्तल) – 23 मई को साहित्यकार, कवयित्री, समालोचक, समाजसेवी, पूर्व नगर पार्षद एवं अजमेर स्थित मित्तल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की संरक्षिका डॉ. शकुन्तला किरण मित्तल का निधन हो गया। डॉ. शकुन्तला किरण 78 वर्ष की थीं। वे पिछले कई दिनों से बीमार थी और मित्तल अस्पताल में ही इलाज करवा रही थी। डॉ शकुन्तला किरण के निधन पर मित्तल हॉस्पिटल परिवार सहित समूचे प्रदेश के साहित्यिक, राजनीतिक एवं सामाजिक व आध्यात्मिक जगत में शोक व्याप्त हो गया। डॉ मित्तल का अंतिम संस्कार 23 मई को वैशाली नगर आंतेड स्थित छत्री योजना मुक्ति धाम पर विधि विधान से कर दिया गया। इस मौके पर मित्तल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर प्रबंध मंडल के सदस्य एवं परिजन उपस्थित थे, मुखाग्नि सुनील मित्तल ने दी।

डॉ. शकुन्तला किरण मित्तल अत्यन्त ही मृदुल एवं स्नेहिल स्वभाव की थी। उन्होंने जिस क्षेत्र में कदम रखा अपना परचम लहराया। उनकी विद्वता, वाक कौशल, सामाजिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, राजनीतिक पकड़ समझ और सूझ-बूझ अद्भुत और उन्नत कोटि की थी। क्या अपने और क्या पराए उनका स्नेह अपनत्व और प्यार दुलार ममतामयी मां के रूप में छोटे और बड़ों पर समान रूप चांदनी की रश्मि बन बरसता था। सिर्फ हिन्दी ही नहीं राजस्थानी सहित विविध भाषाओं की शब्द शैली, स्वर साधना एवं सामाजिक रीति-नीति, परम्पराओं पर उनका ज्ञान और समझ़ अविस्मरणीय था। डॉ शकुन्तला किरण का जीवन को अलविदा कह देने से जैसे एक युग को पूर्ण विराम लग गया। ओजस्वी वक्ता डॉ शकुन्तला किरण लंबे समय तक भारतीय जनता पार्टी की राज्य स्तरीय राजनीति में सक्रिय रहीं।

भाजपा राज्य महिला मोर्चा उपाध्यक्ष, भाजपा राजस्थान प्रदेश कार्यकारिणी की सदस्य रहने के साथ साथ अजमेर नगर निगम की पार्षद रहीं और भूमि एवं भवन समिति की अध्यक्षता को भी बखूबी निभाया। राजनीतिक जीवन जीते हुए अनेकानेक शीर्ष नेतृत्व स्व. राजमाता विजयाराजे सिंधिया, स्व. अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, स्व. भैरो सिंह शेखावत, वसुंधरा राजे आदि के साथ उनके प्रगाढ़ ताल्लुक एवं विशिष्ट रिश्ते रहे। हिंदी लघुकथा पर देश की पहली शोधार्थी रहीं साहित्य जगत की एक मूर्धन्य शख्सियत डॉ शकुन्तला किरण ने कई पुस्तकें लिखी हैं और शोधार्थियों को मार्गदर्शन देने के साथ निर्देशित भी किया।

डॉ शकुन्तला किरण मित्तल अग्रवाल समाज की संरक्षिका भी रहीं है। समय के साथ डॉ शकुन्तला किरण का अध्यात्म के साथ जुड़ाव हुआ और मन वहीं रम गया। पूज्य गुरुदेव हर प्रसाद मिश्रा (उवैशी रह) के आध्यात्मिक ज्ञान एवं अलौकिक साधना से प्रभावित डॉ शकुन्तला किरण उन्हीं की सेविका बन उनके बताए पथ पर आरूढ़ हो चलीं थीं। समाज सेवा में तत्पर एवं सर्व सम्मानित डॉ शकुन्तला किरण किसी भी तरह के जरूरतमंदों एवं निर्धनों के प्रति सदैव सौम्य एवं संवेदनशील रही और जिस तरह से भी संभव हो सका, उन्होंने आशार्थियों को कभी निराश नहीं किया। मातृ तुल्य वात्सल्य की धनी डॉ शकुन्तला किरण से मुलाकात के लिए समाज के सभी वर्ग हमेशा उत्सुक रहते थे और डॉ शकुन्तला किरण मित्तल भी सेवा के लिए हमेशा तत्पर। डॉ शकुन्तला किरण के निधन से समाज को हुई अपूरणीय क्षति भरी नहीं जा सकेगी। उनके सांसारिक भवसागर से पर्दा लेने पर कोटि कोटि नमन एवं श्रृद्धासुमन।

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