पीआरओ महेश पारीक की नासमझी से हुआ वीडियो वायरल।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – राजस्थान की राजनीति पहले से ही विस्फोटक बनी हुई है, लेकिन 30 जुलाई को एक वीडियो ने तूफान ला दिया है। इस वीडियो के वायरल होने से विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ खड़े हुए हैं। यह वीडियो 29 जुलाई का तबका है, जब सीपी जोशी को जन्मदिन की बधाई देने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र और राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष वैभव गहलोत पहुंचे थे। विधानसभा अध्यक्ष के सरकारी बंगले पर जोशी और वैभव में हुई संक्षिप्त बातचीत का वीडियो वायरल हो गया है। इस बात में वैभव ने माना कि राज्यसभा चुनाव के समय से ही उनके पिता अशोक गहलोत का मूड खराब चल रहा है और अभी भी राजनीतिक हालात बहुत टफ बने हुए हैं। इस पर सीपी जोशी ने कहा कि यदि 30 विधायक चले जाते तो आप कुछ नहीं कर सकते थे। आप कितना भी होहल्ला मचा लेते, पर आपकी सरकार गिर जाती। यह तो उन्होंने (अशोक गहलोत) अपनी चतुराई से रोक लिया। यह काम सिर्फ वो ही कर सकते थे। वीडियो के संवाद से प्रतीत होता है कि प्रदेश के मौजूदा राजनीतिक हालातों में सीपी जोशी चिंतित हैं। सोशल मीडिया के बाद यह वीडियो अब प्रादेशिक और राष्ट्रीय न्यूज चैनलों पर प्रसारित हो रहा है। इससे अशोक गहलोत की सरकार के सामने नई मुसीबत खड़ी होगी। यहां यह उल्लेखनीय है कि सीएम के बेटे वैभव को राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन का अध्यक्ष बनवाने में सीपी जोशी की ही भूमिका रही थी। वैभव से पहले जोशी ही एसोसिएशन के अध्यक्ष थे।
जोशी इस्तीफा दें-पूनिया:
वीडियो वायरल होने के बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने सीपी जोशी से विधानसभा अयक्ष के पद से इस्तीफा मांग लिया है। पूनिया ने कहा कि एक ओर जोशी अपने अधिकारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रहे हैं तो दूसरी ओर अशोक गहलोत की सरकार गिराने पर चिंता जता रहे हैं। उम्मीद की जाती है कि विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका निष्पक्ष होगी, लेकिन वायरल हुए वीडियो से ऐसा नहीं लगता है। विधानसभा अध्यक्ष पद की निष्पक्षता बनी रहे, इसके लिए जोशी को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। पूनिया ने कहा कि कांग्रेस के बागी विधायकों को अयोग्य घोषित करने के लिए सीपी जोशी ने जो नोटिस जारी किए उन पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। अब सीपी जोशी अपने अधिकारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। यदि सुप्रीम कोर्ट में मुख्यमंत्री के बेटे वाला वीडियो प्रस्तुत किया जाएगा तो सुप्रीम कोर्ट को भी विधानसभा के अध्यक्ष की निष्पक्षता का अंदाजा लग जाएगा।
पायलट गुट की तैयारी:
सीपी जोशी ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, उसमे सचिन पायलट गुट भी पक्षकार बनने जा रहा है। पायलट गुट का तर्क है कि मुख्य सचेतक का व्हिप विधानसभा सत्र के समय प्रभावी होता है, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने विधायक दल की बैठक में ही व्हिप को प्रभावी मानकर अयोग्यता वाले नोटिस जारी कर दिए। गंभीर बात तो यह है कि मुख्य सचेतक ने 13 जुलाई की रात को शिकायत की और 14 जुलाई को विधानसभा अध्यक्ष ने सभी 19 विधायकों को नोटिस जारी कर दिए।
पीआरओ की नासमझी:
सीपी जोशी और वैभव गहलोत के बीच हुई बातचीत का वीडियो जोशी के पीआरओ महेश पारीक की नासमझी से वायरल हुआ है। जोशी और वैभव की मुलाकात का वीडियो खुद महेश पारीक ने बनाया और मीडिया कर्मियों को पोस्ट किया। वीडिया बनाते समय पारीक ने यह ध्यान नहीं रखा कि जोशी और वैभव क्या बात कर रहे है? यदि वीडियो के संवाद को पारीक सुन लेते तो शायद मीडिया कर्मियों को नहीं भेजते। पारीक ने भले ही नासमझी से वीडियो पोस्ट किया लेकिन अब यह वीडियो सरकार और विधानसभा अध्यक्ष के लिए मुसीबत बनन गया है। वीडियो पर फिलहाल सीपी जोशी और वैभव गहलोत की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।







