मुंबई के कई इलाकों मैं बनायी जाती है लगभाग १ करोड़ से भी ज्यादा मुर्तियां

करोडो का होता है करोबार, घर घर गणेश। गणेश उत्सव लायेगा खुशियां

मुंबई (महाराष्ट्र उपसंपादक सुरज कुमार) : श्री गणपती बाप्पा को विराजमान होने में अब कुछ ही दिन बाकी हैं। पिछले साल गणेशोत्सव कोरोना के साये में मनाया था। पर इस साल स्थिति बेहतर है। सबसे ज्यादा खुशी महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र स्थित पेण तहसील और इसके आसपास के गांवों में गणेश की मूर्ति बनाने वाली इकाइयों में है। मूर्तिकारों को उम्मीद है कि इस बार का गणेशोत्सव उनकी जिंदगी में बड़ी खुशियां लेकर आएगा।

पिछले साल लॉकडाउन की सख्ती के कारण इनकी 90% मूर्तियां नहीं बिक पाईं थीं। रायगढ़ जिले की पेन तहसील और इसके आसपास का क्षेत्र गणेश मूर्ति हब माना जाता है। करीबी गांव हमरापुर, कलवा, जोहा, तांबडशेत, दादर, रावे, सोनकार, उरनोली, हनमंत पाडा, वडखल, बोरी, शिर्की गांवों में गणेशोत्सव के 10 दिन और पितृपक्ष के 15 दिन छोड़कर सालभर घर-घर में 6 इंच से 12 फुट की मूर्तियां बनाने का काम चलता है।

क्षेत्र में ऐसी 1600 उद्योग इकाइयां हैं। इनका सालाना कारोबार 250 से 300 करोड़ रुपए का है। ये इकाइयां हर साल 3 से 3.25 करोड़ मूर्तियां बनाती हैं। इनमें से करीब 1.25 करोड़ मूर्तियां छह राज्यों- गोवा, गुजरात, मप्र, कर्नाटक, आंध्र, तामिलनाडु के थोक व्यापारियों को सप्लाई होती हैं। फिर इनके जरिए देशभर में रिटेलर्स तक पहुंचती हैं।

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