कोरोना काल में राशन के किट प्राप्त करने वालों की पहचान उजागर नहीं कर अजमेर की संस्था सारथी की अनुकरणीय पहल। रेलवे स्टेशन के कामगारों को मदद दी।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – कहा तो यह जाता है कि दाएं हाथ से दिए गए दान की जानकारी बाएं हाथ को भी नहीं होनी चाहिए। तभी दान का महत्व होता है, लेकिन आम तौर पर देखा जाता है कि दान प्राप्त करने वाले ज़रूरतमंद व्यक्ति के फोटो प्रचार माध्यमों से प्रसारित होते हैं। ऐसे प्रचार से कई बार ज़रूरतमंद व्यक्ति मदद लेने से हिचकते हैं। लेकिन अब अजमेर की सामाजिक संस्था सारथी ने अनुकरणीय पहल की है। 7 अगस्त को संस्था की ओर से अजमेर के रेलवे स्टेशन पर कार्यरत कुली, चाय की स्टॉलों पर कार्यरत श्रमिक और सफाई ठेकेदार के श्रमिकों को राशन के किट वितरित किए गए। चार-पांच सदस्यों वाले एक परिवार को एक माह तक चलने वाली राशन सामग्री के 150 किट दिए गए, लेकिन राशन के किट प्राप्त करने वालों की पहचान उजागर नहीं की। एक किट की कीम 500 रुपए हैं। स्टेशन के डायरेक्टर आरएल देवड़ा ने संस्था की इस पहल की प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि अभी रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का संचालन सूचारू नहीं हुआ है, इसलिए कुली और अन्य श्रमिकों के सामने आर्थिक संकट है। संस्था के प्रमुख मनीष गोयल ने बताया कि कोरोना काल में स्टेशन के श्रमिक वर्ग की स्थिति को देखते हुए ही मदद का निर्णय लिया गया। संस्था नहीं चाहती है कि मदद प्राप्त करने वाले की पहचान हो। इसलिए फोटो में राशन के किट प्राप्त करने वालों के चेहरे नहीं दिखाए गए हैं। राशन सामग्री के किट का वितरण विनोद बंसल, पंकज ऐरन, शिवशंकर अग्रवाल, देवेश गुप्ता, कमल किशोर गर्ग, महेन्द्र गुप्ता, मुकेश बंसल, बीपी गोयल, संजय सांखला आदि के सहयोग से किया गया। संस्था के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नम्बर 9928086468 पर मनीष गोयल से ली जा सकती है।

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