अब की बार राम मंदिर…

(अनिल गलगली)
आख़िरकार तारीख भी तय हुई, भूमिपूजन भी संपन्न हुआ और श्री राम मंदिर निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त हुआ। इस भूमिपूजन कार्यक्रम से कई दशकों से विवाद का मुद्दा खत्म हुआ और समाज के सभी लोगों ने इसे स्वीकृति देकर अबकी बार राम मंदिर की नींव रखी।
श्री राम मंदिर की आधारशिला रखने से 1528 से लेकर 2020 तक चला विवाद और संघर्ष को विराम लग गया।वर्ष 1528 से लेकर 2020 तक के सफर को देखा जाए तो सिर्फ और दो समाज में सिर्फ आपसी रंजिश, धर्मों में विवाद और धार्मिक कट्टरता को पूरे विश्व ने देखा। भारत ने इन वर्षों में जो भुगता उसकी क्षतिपूर्ति होना संभव नहीं हैं। हिंदू- मुस्लिम दंगों ने भारत की शांति, एकता और भाईचारगी को तार-तार किया जिसका खामियाजा आज भी नई पीढ़ी भुगत रही हैं। उच्चतम न्यायालय ने वर्षों से प्रलंबित यह विवाद खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अन्यथा शायद ही राम जन्मभूमि का विवाद खत्म होता।
पहले मंदिर फिर सरकार की घोषणा हो या श्रीराम जन्मभूमि निर्माण की बात हो, इसे हर राजनीतिक दल ने सिर्फ और सिर्फ अपने राजनीतिक स्वार्थों के लिए इस्तेमाल किया। श्री राम मंदिर का ताला खुलवाने की तसबीर आनन फानन में सोशल मीडिया में झलकाकर इसका श्रेय लेने की होड़ भी मची थी जबकि सच्चाई यह हैं कि इसे लंबे अरसे से लटकाने में इन्हीं सभी राजनीतिक दलों का अमूल्य योगदान था और राजनीतिक दलों ने इतने वर्षों में कोई ठोस निर्णय लिया ही नहीं। 9 नवंबर 2019 को उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या में पूरी 2.77 एकड़ विवादित भूमि रामलला को दी। केन्द्र और उत्तरप्रदेश सरकार को मस्जिद के निर्माण के लिए किसी प्रमुख स्थान पर पांच एकड़ जमीन मुस्लिम समाज के देने का भी निर्देश दिया। 5 फरवरी, 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिये 15 सदस्यीय न्यास की घोषणा संसद में की। 19 फरवरी को राम मंदिर ट्रस्ट ने पदाधिकारियों की नियुक्ति की। 5 अगस्त 2020 को एक भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में भूमिपूजन के बाद राम मंदिर की आधारशिला रखी।
इस कार्यक्रम में देश के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओ को बुलाकर श्री राम मंदिर निर्माण में एकसूत्रता लाने का अच्छा मौका मोदी सरकार ने खो दिया। इसके बाद भी राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, प्रियंका गांधी वडेरा,अखिलेश सिंह यादव, ममता बनर्जी, उद्धव ठाकरे ने सोशल मीडिया के जरिए श्री राम का गुणगान किया और श्री राम जन्मभूमि निर्माण को शुभकामनाएं दी। अब श्री राम जन्मभूमि निर्माण में पारदर्शिता रखकर सबका साथ लेने की आवश्यकता हैं। जो हुआ वह हुआ, अब सरकार को श्री राम मंदिर ट्रस्ट में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए और ट्रस्ट को स्वतंत्र तौर पर फ़ैसला लेने की आज़ादी देनी चाहिए। ट्रस्ट को जो आता हैं उसका स्वागत कर बयानबाजी से बचना चाहिए और हर एक सेवा लेनी चाहिए।

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