- अजमेर नगर निगम में भाजपा का बोर्ड होने के बाद भी स्वच्छता पर हुई कार्यशाला में 80 में से मात्र 3 पार्षद आए।
- एनजीओ ने कार्यशाला से पहले तैयारी नहीं की-मेयर बृजलता हाड़ा।
अजमेर (एस.पी.मित्तल) : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अकसर सरकारी धन के सदुपयोग की बात करते है। मोदी का कहना होता है कि पिछले सात सालों में उनकी सरकार ने जनता के पैसे का सदुपयोग किया है। लेकिन केंद्रीय शहरी आवास मंत्रालय से जुड़े एक एनजीओ ने अजमेर में आकर नाले में पैसा बहा दिया। एनजीओ ने अजमेर शहर में कचरे के निस्तारण और स्वच्छता को लेकर दो दिवसीय कार्यशाला 13 और 14 दिसंबर को अजमेर के क्रॉस लेन होटल में की। इस कार्यशाला में नगर निगम के सभी 80 पार्षदों को आमंत्रित किया गया, साथ ही निगम के अधिकारियों को भी बुलाया गया।
पार्षदों की उपस्थिति सुनिश्चित हो इसके लिए भाजपा बोर्ड के मेयर बृजलता हाड़ा ने सभी पार्षदों को पत्र भी लिखा, लेकिन कार्यशाला में मात्र 3 पार्षद उपस्थित भाजपा के 48 पार्षद हैं, लेकिन मेयर बृजलता हाड़ा के रूप में सिर्फ एक पार्षद उपस्थित रहीं। एनजीओ के तामझाम के बीच श्रीमती हाड़ा ने कार्यशाला में मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थिति दर्ज करवाई, लेकिन यह कार्यशाला पूरी तरह फिकी रही, क्योंकि पार्षद ही उपस्थित नहीं थे। इतना ही नहीं निगम के स्वास्थ्य अधिकारी और निरीक्षक तक नहीं आए। जबकि यह कार्यशाला इन्हीं जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के लिए रखी गई थी। पार्षदों के नहीं आने पर मेयर हाड़ा का कहना रहा कि मुंबई से आए एनजीओ ने कार्यशाला की तैयारी नहीं की।
उन्होंने कहा कि कार्यशाला में भाग लेने के लिए 300 रुपए का रजिस्ट्रेशन शुल्क रखने के कारण भी पार्षद नहीं आए। उन्होंने कहा कि पार्षदों की उपस्थिति दर्ज करवाने की जिम्मेदारी मेरी नहीं बल्कि एनजीओ की थी। यदि कार्यशाला में पार्षदगण नहीं आए हैं तो इसका दोष एनजीओ का है। जहां तक मेरे द्वारा पत्र लिखे जाने का सवाल है तो मैं नगर निगम की मेयर हंू, इसलिए पत्र लिखा था। वहीं भाजपा के पार्षद ज्ञान सारस्वत, रमेश सोनी आदि ने कहा कि उन्हें कार्यशाला के आयोजन की सूचना ही नहीं दी गई। एनजीओ अथवा नगर नगर की ओर से कोई फोन भी नहीं आया। ऐसा ही कथन अधिकांश पार्षदों का रहा। सवाल उठता है कि जब कार्यशाला को कोई तैयारी ही नहीं थी तो फिर आयोजन क्यों किया गया। क्या यह जनता के धन का दुरुपयोग नहीं है? अनेक पार्षदों ने एनजीओ के खिलाफ कार्यवाही की जाने की मांग की है। इस संबंध में केंद्रीय शहरी आवास मंत्रालय को भी गंभीरता के साथ कार्यवाही करनी चाहिए।







