जैसलमेर की होटल में रह रहे समर्थक विधायकों का हाथ जोड़कर आभार जताया।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – सचिन पायलट को वापस कांग्रेस के साथ खड़ा करने को लेकर जब दिल्ली में हलचल हो रही थी तब 9 अगस्त को जैसलमेर की होटल सूर्यागढ़ में अपने समर्थक विधायकों के बीच सीएम अशोक गहलोत ने कहा था कि राजनीति में ऐसे कई मौके आते हैं जब खून का घूट पीना पड़ता है। अपने दिल पर पत्थर रखकर निर्णय करने पड़ते हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कई बार ऐसी स्थितियों का सामना किया है। गहलोत ने यह बात तब कही थी कि जब वरिष्ठ मंत्री शांति धारीवाल ने प्रस्ताव रखा था कि सचिन पायलट और उनके साथ दिल्ली गए 18 विधायकों को वापस कांग्रेस में शामिल नहीं किया जाए। गहलोत समर्थक विधायकों की राय से कांग्रेस आलाकमान को भी अवगत करा दिया गया था। लेकिन इसके बाद भी 10 अगस्त को आलाकमान ने पायलट को साथ रखने का फैसला सुना दिया। गहलोत ने भी आलाकमान के फैसले को स्वीकार कर लिया है। यानि गहलोत ने दिल पर पत्थर रखकर खून का घूट पी लिया है। गहलोत ने खून का घूट पिया है, इस बात की जानकरी 11 अगस्त को जैसलमेर में ही समर्थक विधायकों के बीच दी। गहलोत ने कहा कि लाख प्रलोभन के बाद भी एक भी विधायक इधर-उधर नहीं गया है। आप लोगों ने मेरे प्रति जो निष्ठा दिखाई है उसके लिए मैं जिंदगी भर आपका कर्जदार रहूंगा। गहलोत ने सभी उपस्थिति विधायकों का हाथ जोड़कर आभार जताया। गहलोत के साथ चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा और परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास भी थे। 31 जुलाई को विधायकों के जैसलमेर आने के बाद पहली बार रघु शर्मा और खाचरियावास जैसलमेर आए। विधायकों ने गहलोत को भरोसा दिलाया कि वे हमेशा उनके साथ रहेंगे।
भावुक हुए मुख्यमंत्री:
11 अगस्त को सुबह जयपुर में सिविल लाइन स्थित सरकारी आवास पर सीएम गहलोत ने निर्दलीय विधायक सुरेश टाक (किशनगढ-अजमरे), ओमप्रकाश हुड़ला (महूजा-दौसा) और खुशवीर सिंह जोरावर (मारवाड़ जंक्शन-पाली) से मुलाकात की। ये तीनों विधायक भी सचिन पायलट के साथ 9 जुलाई से ही दिल्ली चले गए थे। 11 अगस्त को जब इन तीनों विधायकों से गहलोत का सामना हुआ तो गहलोत ने कहा कि आपने मुझे जो भी काम बताए उन्हें पूरा किया। लेकिन इसके बाद भी आप मुझे छोड़कर क्यों चले गए? आखिर मेरे सहयोग में क्या कमी रही। इस पर तीनों विधायकों ने कहा कि जब एसओजी ने देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर लिया था, तब उन्हें गिरफ्तारी का डर हो गया था। तीनों विधायकों ने गहलोत से कहा कि वे तो आपके पक्के समर्थक थे, लेकिन इसके बाद भी उन पर संदेह किया गया। गहलोत ने कहा कि पुरानी बातों को भुल जाओ और भविष्य का ख्याल करो। तीनों विधायकों ने गहलोत से अपने सिर पर हाथ रखवाया यह भरोसा लिया कि उन्हें पहले की तरह मुख्यमंत्री का सहयोग मिलता रहेगा। विधायक सुरेश टाक ने कहा कि हमने अपने क्षेत्र के विकास के लिए सरकार को समर्थन दिया है। हम अपने इस वायदे पर कायम हैं। सरकार को हम पर बेवजह का अविश्वास नहीं करना चाहिए।







