जलगाव (जिला प्रतिनिधी असलम खान) : शहरमे तक़रीबन दस उर्दू स्कूले है जो पालीका के तहत चलायी जाती है।जिनके शिक्षक तो काबिल और मेरिटके होते है मगर विद्यार्थी उन परिवारके होते है जिनकी पारिवारिक आर्थिक स्थिती कमज़ोर होती है।इसी वजहसे इन स्कूलोकी तरफ देखनेका नज़रिया कुछ अलग होता है; ये नज़रिया बदलने के लिये प्रशासन को भी अपना नज़रिया बदलना चाहिए ये सोच लेकर शहरके अल्पसंख्यक विद्यार्थी पालक संघ के प्रतिनिधी मंडलने महानगर पालिका की प्रशासन अधिकारी मा. दिपाली पाटिल मैडमसे मुलाक़ात की और इस विषयपर निवेदन देकर चर्चा की।
स्कूलोकी भौतिक सुविधाओं से लेकर सभी समस्याओपर हम मिलकर क्या समाधान ढूंढ सकते है? अल्पसंख्यक विद्यार्थी पालक संघ इसमे क्या भूमिका निभा सकता है? दिल्ली की सरकारी स्कूले महेंगी निजी स्कूलोकी बराबरी कर सकती है तो दूसरी जगहोपर भी ऐसा हो सकता है इस भरोसे के साथ चर्चा संपन्न हुई। इस मुहीम मे ज्यादा से ज्यादा लोगोने आगे आकर अपना योगदान देना चाहीये ऐसा आवाहन अल्पसंख्यक विद्यार्थी पालक संघ की ओरसे किया गया।
इस वक्त चर्चामें मौजूद अल्पसंख्यक विद्यार्थी पालक संघ के ज़िम्मेदार फ़ारूक़ क़ादरी, सय्यद शाहिद, अमजद पठान, मतीन पटेल, फ़हीम पटेल।
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