गहलोत समर्थक विधायकों की बाड़ाबंदी हाईकमान पर दबाव डालने के लिए।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – मीडिया खबरों में लगातार कहा जा रहा है कि राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार विधानसभा सत्र के पहले दिन यानि 14 अगस्त को ही विश्वास मत प्रस्ताव रख दें। चूंकि गहलोत के पास पूर्ण बहुमत है, इसलिए प्रस्ताव पास भी हो जाएगा। इसके बाद सरकार अगले सत्र तक के लिए निश्चिंत हो जाएगी। आमतौर पर अगला सत्र 6 माह बाद ही होता है। लेकिन यदि सरकार ने अपनी ओर से विश्वास मत प्रस्ताव रखा तो फिर विधानसभा में बहस भी करानी होगी। स्वाभाविक है इस बहस में प्र्रमुख विपक्षी भाजपा सरकार पर तीखे हमले करेगी। कोरोना काल में सरकार की विफलता से लेकर कांग्रेस के विधायकों की एक माह तक बाड़ेबंदी को लेकर भी हमले होंगे। विपक्ष के हमलों को जवाब कांग्रेस की ओर से भाजपा के सरकार गिराने के षडय़ंत्र से ही दिया जाएगा। तब विधानसभा में सचिन पायलट और उनके समर्थक 18 विधायकों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। पायलट ने दिल्ली से लौटने के बाद कई बार कहा है कि हमारे विरोध में भाजपा की कोई भूमिका नहीं है। हम तो अपने मुद्दों को लेकर ही हाईकमान से मिलने के लिए दिल्ली गए थे। पिछले दो दिन में पायलट ने साफ कहा है कि विधानसभा चुनाव में जो वायदे किए गए थे, उन्हें कांग्रेस की सरकार बनने पर पूरा नहीं किया गया। विश्वासमत पर बहस के दौरान सचिन पायलट ऐसे तीखे तेवर दिखा भी सकते हैं। पायलट को भी पता है कि भाजपा की आड़ में अशोक गहलोत उन्हीं पर हमले कर रहे हैं। गद्दार,निकम्मा, नकारा, धोखेबाज जैसे शब्दों का जवाब भी अभी पायलट को देना है। इसीलिए अभी विश्वासमत को लेकर संशय बना हुआ है। विपक्ष ने भी सरकार के बहुमत पर अविश्वास नहीं जताया है। किसी भी विधायक ने बहुमत दिखाने की मांग सरकार से नहीं की है। सरकार ने भी सत्र बुलाने के लिए राज्यपाल को जो पत्र लिखा है उसमें शक्ति परीक्षण की बात नहीं है। अब चूंकि पायलट गुट के 19 विधायक भी साथ खड़े हो गए हैं,इसलिए गहलोत सरकार को कोई खतरा नहीं है।
बाड़ाबंदी दबाव बनाने के लिए:
सवाल उठता है कि जब पायलटगुट कांगे्रस के साथ खड़ा हो गया है,तब गहलोत समर्थक विधायकों को बाड़ाबंदी में क्यों रखा गया है? जानकार सूत्रों के अनुसार ऐसा कांग्रेस हाईकमान पर दबाव बनाने के लिए किया गया है। 13 अगस्त को होने वाली कांगे्रस विधायक दल की बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल के समक्ष भी यह जताने का प्रयास किया जा रहा है कि पायलट गुट के बगैर ही अशोक गहलोत केपास समर्थन है। वेणुगोपाल के सामने गहलोत समर्थकों ने पायलट गुट की बगावत पर नाराजगी जताई। गहलोत के समर्थक पहले ही कह चुके हैं कि अब पायलट और उनके समर्थकों को सरकार व संगठन में शामिल नहीं किया जाए। हो सकता है कि अगले कुछ दिनों में गहलोत के समर्थक दिल्ली जाकर सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मिले। सूत्रों की माने तो पायलट की वापसी से सीएम गहलोत नाराज हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि सचिन पायलट को वापस कांग्रेस के साथ खड़ा करने में वेणुगोपाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पायलट की बगावत की जानकारी वेणुगोपाल को राज्यसभा चुनाव के समयसे ही थी, लेकिन इसकेबाद भी वेणुगोपाल ने पायलट और राहुल गांधी के बीच सहमति करवाई। यदि राजस्थान में भी कांग्रेस सरकार गिरती तो राष्ट्रीय स्तर पर कांगे्रस नेतृत्व खास कर गांधी परिवार को धक्का लगता।







