- वसुंधरा राजे ने दिखाया कि वे भाजपा के साथ हैं।
- विधायक दल की बैठक में आने से पहले गुलाब चंद कटारिया को घर बुलाकर नाश्ता करवाया।
- टीआरपी बढ़ाने के लिए मीडिया वाले फूट की खबरें चलाते हैं-वसुंधरा राजे।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – आज 14 अगस्त से शुरू होने वाले राजस्थान विधानसभा के सत्र के मद्देनजर 13 अगस्त को जयपुर में भाजपा विधायकों की बैठक हुई। इस बैठक में भाजपा के 72 में से 70 विधायकों के साथ साथ हनुमान बेनीवाल की आरएलपी के तीनों विधायकों ने भी भाग लिया। बैठक में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाकर यह दिखाने का प्रयास किया है कि वे भाजपा के साथ है। राजे भी विधायक हैं। कांग्रेस के पिछले एक माह के राजनीतिक घटनाक्रम और सचिन पायलट की बगावत के दौरान वसुंंधरा राजे जयुपर से बाहर रहीं। पायलट की बगावत के मद्देनजर जब गहलोत सरकार के गिरने के कयास लगाए जा रहे थे, तब वसुंधरा राजे दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के समक्ष अपनी शर्तें रख रहीं थी। उसके बाद भाजपा के कुछ विधायकों को गुजरात भ्रमण पर भेजा गया। भाजपा में चर्चा है कि राजनीतिक उथल पुथल में भाजपा को वसुंधरा राजे का अपेक्षित सहयोग भी नहीं मिला। सीएम अशोक गहलोत नेभी कई बार वसुंधरा राजे का नाम लेकर प्रशंसा की। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी सीएम गहलोत ने राजे से सिविल लाइन स्थित सरकारी बंगला संख्या 13 खाली नहीं करवाया। राजे इसी बंगले में बनी रहे और हाईकोर्ट के आदेशों की अवमानना भी नहीं हो, इसको देखते हुए अब राजे के बंगले को विधानसभा को सौंप दिया है। अब बंगले के आवंटन पर विधानसभा का अधिकार हो गया है। कहा जा रहा है कि वसुंधरा राजे का अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने की वजह से ही सचिन पायलट को कांगेस हाई कमान के सामने सरेंडर करना पड़ा। इन सब परिस्थितियों और चर्चाओं के बीच ही राजे ने विधायक दल की बेठक में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। बैठक में आने से पहले राजे ने विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया को अपने घर पर बुलाकर नाश्ता करवाया। नाश्ते की टेबल पर दोनों के बीच राजनीतिक मंत्राणभी हुई। राजे जब मुख्यमंत्री थीं, तब कटारिया गृहमंत्री रहे। हालांकि कांगे्रस की उठा पटक के दौरान कटारिया हमेशा पार्टी के साथ खड़े रहे, लेकिन राजे कहीं भी नजर नहीं आईं। बैठक में जाने से पहले राजे समर्थक विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने साफ कहा कि उनकी नेता तो वसुंधरा राजे ही हैं। हालांकि बैठक में वरिष्ठ भाजपा विधायक कैलाश मेघवाल भी उपस्थित रहे। कांगेस में पायलट की बगावत के दौरान मेघवाल ने ही कहा था कि निर्वाचित सरकार को गिराया जाना उचित नहीं है। मेघवाल को भी राजे का समर्थक माना जाता है। अब जब गहलोत सरकार के गिरने का कोई खतरा नहीं है,तब राजे भाजपा के साथ खड़ी नजर आ रही है। पूर्व सीएम और भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की हैसियत से राजे को बैठक में मंच पर भी बैठाया गया।
भाजपा में कोई फूट नहीं-राजे:
विधायक दल की बैठक को संबोधित करते हुए वसुंधरा राजे ने कहा कि टीआरपी बढ़ाने के लिए मीडिया वाले भाजपा में फूट की खबरें चलाते हैं।मैं उन राज माता विजय राजे सिंधिया की बेटी हंू, जिन्होंने पार्टी के लिए देश को सर्वोपरि माना है। राजे ने कहा कि मैंने अपने दस वर्ष के कार्यकाल में विकास के अनेक कार्य किए। कांग्रेस की मौजूदा सरकार मेरी सरकार की योजनाओं का नाम बदल कर ही चला रही है। विधानसभा में भाजपा विधायकों को कांगे्रस का डट कर मुकाबला करना चाहिए। राजे ने अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों की भी सराहना की।
कांग्रेस से मुकाबला करने की रणनीति बनाई:
भाजपा विधायक दल की बैठक में केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र तोमर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव मुरलीधर राय, अविनाश राय खन्ना, वी सतीश, राष्ट्रीय प्रतिनिधियों के साथ साथ प्रतिपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया, प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया आदि उपस्थित रहे। बैठक में विधानसभा सत्र में कांग्रेस से मुकाबला करने की रणनीति बनाई गई। राष्ट्रीय नेताओं ने कहा कि कोरोना काल में जिस तरह कांग्रेस की सरकार होटलों में बंधक बनी रही, उससे प्रदेश की जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। विधानसभा में जनता की इन्हीं परेशानियों को प्रभावी तरीके से उठाया जाना चाहिए।







