- इस बार गहलोत ने भी सख्त रुख अपनाया है।
- हाईकमान के दखल के बाद भी राजस्थान कांग्रेस के हालात काबू में नहीं।
- विधानसभा सत्र 14 अगस्त से शुरू होगा। सुरजेवाला और सुभाषा गर्ग स्पेशल प्लेन से दिल्ली पहुंचे।
- अजमेर के कांग्रेसियों ने पायलट से मुलाकात की।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – राजस्थान विधानसभा का सत्र आज 14 अगस्त से शुरू होने वाला है, इसको लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस के विधायकों की बैठक 13 अगस्त को जयपुर में प्रात:11 बजे होने वाली थी, लेकिन सीएम अशोक गहलोत और कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष सचिन पायलट के बीच चल रही खींचतान के कारण बैठक टलती जा रही है। बैठक में भाग लेने के लिए कांगे्रस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल 12 अगस्त की रात को ही जयपुर पहुंच गए थे। लेकिन इसके बाद भी कांग्रेस विधायक दल की बैठक का समय निश्चित नहीं हो रहा है। 14 अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र से पूर्व विधायक दल की बैठक नहीं होने से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कांगे्रस के हालात कैसे हैं। हालांकि गहलोत समर्थक विधायक पहले से ही होटल फेयरमोंट में रह रहे हैं। सचिन पायलट की वापसी पर गहलोत समर्थक विधायक बेहद खफा हैं। चूंकि कांग्रेस विधायक दल की बैठक में सचिन पायलट और उनके साथ जाने वाले 18 विधायक भी भाग लेंगे, इसलिए बैठक में हंगामे के आसार बताए जा रहे हैं। वेणुगोपाल चाहते हैं कि विधायक दल की बैठक से पहले गहलोत और पायलट के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल में बातचीत हो जाए। लेकिन वेणुगोपाल को दोपतर तीन बजे तक गहलोत-पायलट के बीच मुलाकात करवाने में सफलता नहीं मिली है। जब तक दोनों नेताओं के बीच बातचीत नहीं होगी, तब तक विधायक दल की बैठक में हंगामा होने के आसार बने रहेंगे। जानकार सूत्रों के अनुसार इस बार सीएम गहलोत ने सख्त रुख अपना रखा है। गहलोत नहीं चाहते कि अब सचिन पायलट को पहले जैसा महत्व मिले। गहलोत अब पायलट को एक साधारण विधायक के तौर पर देख रहे हैं। ऐसे में यदि पायलट बैठक में नहीं आते हैं तो कोई फर्क नहीं पड़ता है। गहलोत के समर्थकों का साफ कहना है कि पायलट के बगैर भी अशोक गहलोत के पास बहुमत है। 13 अगस्त को दिनभर जिस तरह कांग्रेस में खींचतान चलती रही उससे प्रतीत होता है कि हालात काबू में नहीं है। सोनिया गांधी राहुल गांधी, प्रियंका गांधी के दखल के बाद भले ही सचिन पायलट को कांग्रेस के साथ खड़ा करदिया हो, लेकिन राजस्थान में अशोक गहलोत के समर्थक विधायक खुश नहीं है। यही वजह है कि केसी वेणुगोपाल को भी गहलोत और पायलट मुलाकात करवाने में जोर लगाना पड़ रहा है। इस बीच कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और गांधी परिवार के भरोसेमंद रणदीप सुरजेवाला व प्रदेश के तकनीकी शिक्षा मंत्री सुभाष गर्ग स्पेशल प्लेन से दिल्ली पहुंच गए हैं। सुरजेवाला और गर्ग के दिल्ली जाने से भी राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। खींचतान के चलते ही अभी तक यह नहीं बताया गया कि सरकार विधानसभा में विश्वास मत का प्रस्ताव प्रस्तुत करेगी या नहीं। माना जा रहा था कि सचिन पायलट गुट की वापसी से राजस्थान में सब कुछ ठीक हो गया है। और अब अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को कोई खतरा नहीं है। लेकिन हालात बताते हैं कि गहलोत और पायलट के मन अभी भी नहीं मिले हैं।
पायलट से मुलाकात:
अजमेर के कांग्रेसी नेता अमोलक सिंह छाबड़ा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल ने 13 अगस्त को जयपुर में सचिन पायलट से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान समर्थकों ने सचिन पायलट ङ्क्षजदाबाद के नारे भी लगाए। मसूदा के विधायक राकेश पारीक के साथ सेवादल के पूर्व मुख्य संगठक कुंदन सिंह रावत आदि ने भी पायलट से मुलाकात की है।







