- पर्यवेक्षक बन कर आए थे रातों रात राष्ट्रीय महासचिव और राजस्थान के प्रभारी बन गए।
- राहुल गांधी की टीम के प्रमुख सदस्य हैं माकन।
- गहलोत खेमे के लिए चिंता की बात। पायलट के सरेंडर में अहम भूमिका।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – सचिन पायलट को राजस्थान में कांग्रेस की राजनीति में कितना सम्मान मिलता है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन सीएम अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे सचिन पायलट में जो झगड़ा हुआ, उसमें अजय माकन की लॉटरी खुल गई है। गहलोत-पायलट के प्रकरण में माकन को रणदीप सुरजेवाला के साथ पर्यवेक्षक बना कर राजस्थान भेजा गया था, तब प्रदेश प्रभारी के पद पर राष्ट्रीय महासचिव अविनाश पांडे कार्यरत थे। दिल्ली से आई टीम में अजय माकन ही सबसे जूनियर नेता थे। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में माकन किस पद पर थे, यह भी किसी को पता नहीं। लेकिन तब अजय माकन पूरे प्रकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। 16 अगस्त को माकन का रुतबा अचानक तब बढ़ गया, जब कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के निर्देश पर माकन को राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त करने के साथ साथ राजस्थान का प्रभारी भी बना दिया गया। इतनी पदोन्नति की उम्मीद तो स्वयं अजय माकन को भी नहीं थी। कांग्रेस का जिन तीन चार राज्यों में शासन है, उसमें राजस्थान सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण है। ऐसे राज्य का प्रभारी महासचिव बनना अपने आप में महत्वपूर्ण है, वो भी तब जब प्रदेश में राजनीतिक खींचतान चल रही है। अजय माकन को राहुल गांधी की टीम का सदस्य माना जाता है। राहुल टीम का सदस्य होने की वजह से ही माकन को इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। माकन की महासचिव के पद पर नियुक्ति से इस बात का भी पता चलता है कि कांग्रेस संगठन में अभी भी राहुल गांधी की चलती है। भले ही श्रीमती सोनिया गांधी अध्यक्ष हो। यह राहुल गांधी का ही दम और बल है कि अजय माकन को सीधे महासचिव और राजस्थान जैसे प्रदेश का प्रभारी बना दिया। जिस तरह से माकन को प्रभारी महासचिव बनाया गया उससे अशोक गहलोत के खेमें में भी चिंता है। सब जानते हैं कि अविनाश पांडे तो वो ही करते थे, जो गहलोत चाहते थे। सचिन पायलट का आरोप है कि पांडे ने प्रभारी महासचिव की हैसियत से कांग्रेस आलाकमान को सही रिपोर्ट नहीं दी। सूत्रों की माने तो पायलट ने पांडे पर सरकार के दुरुपयोग करने का भी आरोप लगाया है। उन मंत्रियों के नाम और कारनामे भी बताए जो पांडे से नजदीकी रख कर चांदी कूट रहे थे। विधायकों की बाड़ाबदी और पायलट गुट के दिल्ली प्रवास को लेकर गहलोते से लेकर सुरजेवाला तक ने प्रतिकूल टिप्पणियां की, लेकिन अजय माकन ने पायलट के विरोध में कोई बात नहीं कही। पायलट तो राहुल गांधी से मिलवाने में भी माकन की भूमिका रही। माकन ने ही पायलट को भरोसा दिलाया कि सब कुछ ठीक हो जाएगा। जिस तरह माकन की पदोन्नति हुई है उससे अशोक गहलोत का खेमा भी अब चिंतित है।







