- पवन अरोड़ा ने मुख्यमंत्री का सपना साकार किया- मंत्री शांति धारीवाल।
- सरकार के सहयोग और इच्छा शक्ति की वजह से ही सफलता मिली-पवन अरोड़ा।
- चार माह के लॉकडाउन के बाद भी बोर्ड ने एक हजार 300 करोड़ रुपए कमाए।
- अब संभाग मुख्यालयों पर इन्फ्रास्ट्रेक्चर बढ़ाने पर बोर्ड की राशि खर्च होगी।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – 22 अगस्त को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान हाऊसिंग बोर्ड की 14 आवासीय और सात अन्य योजनाओं की लॉचिंग की। जयपुर में सीएमआर में हुए समाारेह में सीएम गहलोत और नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल ने बोर्ड के आयुक्त पवन अरोड़ा की जमकर प्रशंसा की। सीएम ने अपने संबोधन में कहा कि पवन अरोड़ा ने यह बता दिया है कि यदि अधिकारी ठान ले तो सरकार की मंशा पूरी हो सकती है। भाजपा शासन में जिस हाऊसिंग बोर्ड को बंद करने की तैयारी हो गई थी। उसी हाऊसिंग बोर्ड को पवन अरोडा ने सफलता की ऊंचाईयों पर पहुंचा दिया। एक साल पहले तक बोर्ड के मकानों का कोई खरीददार नहीं था, लेकिन आज एक मकान को खरीदने के लिए कई लोग उपस्थित हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि आयुक्त पवन अरोड़ा और उनकी टीम ने बोर्ड की गुडविल को बढ़ाया। सरकार का सपना है कि हर जरुरतमंद को अपना घर मिले। बोर्ड को सरकार का पूरा सहयोग मिलेगा। मुझे उम्मीद है कि पवन अरोड़ा के नेतृत्व में यह काम सफलता के साथ होगा। समारोह में मौजूद मुख्य सचिव राजीव स्वरूप से सीएम ने कहा कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि भाजपा शासन में बने हाऊसिंग बोर्ड के बीस हजार मकान आखिर क्यों नहीं बिके? बोर्ड के ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही भी होनी चाहिए। हाऊसिंग बोर्ड को अब मकानों के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। रजिस्ट्रेशन के बाद निश्चित समय में उच्च गुणवत्ता वाला मकान उपलब्ध करवाया जाए। राजस्थान हाऊसिंग बोर्ड की देशभर में अलग पहचान होनी चाहिए। सीएम गहलोत ने इस बात पर संतोश जताया कि कोरोना काल में भी बोर्ड ने उल्लेखनीय कार्य किया है। आज जिस तरह इतना योजनाओं की लॉचिंग हुई है उससे जाहिर है कि हाऊसिंग बोर्ड तेज गति से कार्य कर रहा है।
मुख्यमंत्री का सपना साकार:
समारोह में नगरीय विकास मंत्री शांतिधारीवाल ने कहा कि हाऊसिंग बोर्ड के आयुक्त पवन अरोड़ा ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का सपना साकार किया है। दिसम्बर 2018 में तीसरी बार सीएम बनने पर अशोक गहलोत हाऊसिंग बोर्ड की दयनीय स्थिति को देखकर दु:खी थे। लेकिन सीएम का सपना था कि हाऊसिंग बोर्ड पुनर्जीवित हो। सीएम के इस सपने को पवन अरोड़ा ने साकार किया। अरोड़ा को दस माह पहले बोर्ड का आयुक्त बनाया गया। आयुक्त बनते ही अरोड़ा दो माह के प्रशिक्षण पर चले गए। प्रशिक्षण से लौटने के बाद बोर्ड के काम काज को गति दी गई। कोई चार माह में ही बोर्ड की काया पलट हो गई। अभी काम में गति पकड़ी ही थी कि कोरोना संक्रमण की वजह से लॉकडाउन हो गया। लेकिन इसके बावजूद भी बोर्ड का काम जारी रहा। न केवल पुराने मकान बेचे गए, बल्कि करोड़ों रुपए की भूमि को अतिक्रमण मुक्त करवाया गया। धारीवाल ने कहा कि बीस हजार मकानों में से छह हजार मकान अब तक बेच दिए हैं। बोर्ड कामकाज को देखते हुए ही सरकार ने अन्य कार्य भी बोर्ड को सौंपे हैं। जयपुर में मानसरोवर में 12 एकड़ में सिटी पार्क भी बनवाया जा रहा है। इस पार्क में 70 प्रतिशत क्षेत्र में हरियाली होगी। धारीवाल ने कहा कि मुझे पता है कि पवन अरोड़ा के नेतृत्व में अब हाऊसिंग बोर्ड आर्थिक दृष्टि से समृद्ध हो गया है। धारीवाल ने कहा कि अब बोर्ड के माध्यम से संभाग मुख्यालयों पर इन्फ्रास्ट्रेक्चर बढ़ाया जाएगा।
सरकार के सहयोग से ही सफलता:
समारोह के शुभारंभ में बोर्ड के आयुक्त पवन अरोड़ा ने कहा कि गरीब दस माह पहले जब होने आयुक्त का पद संभाला था, तब बोर्ड के कार्मिकों को वेतन देने के लिए एफडी तुड़वाई जा रही थी। लेकिन आज बोर्ड ने एक हजार तीन सौ करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित कर लिया है। पुराने मकानों को बेच कर एक हजार करोड़ रुपए की आय की गई है। जबकि प्रदेश के विभिन्न आवासीय कॉलोनियों में खाली पड़े भूखंडों की बिक्री कर करीब 250 करोड़ रुपए कमाए गए हैं। इसे बोर्ड की बढ़ती ख्याति ही कहा जाएगा कि अब तीन लाख चालीस हजार रुपए मीटर के हिसाब से भूखंडों की बिक्री हो रही है। भले ही बोर्ड को अतिक्रमण हटाने और अतिक्रमी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने का अधिकार मिल गया हो, लेकिन इसके बाद भी अभी तक भी पुलिस की मदद से कोई अतिक्रमण नहीं हटाया गया है। करोड़ों रुपए की भूमि पर से बोर्ड ने अपने बूते ही अतिक्रमण हटाए हैं। बोर्ड ने प्रत्येक बुधवार को मकान बेचने का जो अभियान चलाया उसे जबर्दस्त सफलता मिली है। अब हर बुधवार को करीब 200 मकान बिक जाते हैं। बिक्री में पारदर्शिता बनी रहे, इसके लिए ईऑक्सन प्रणाली लागू की गई है। सरकार ने शिक्षकों और पुलिस कर्मियों के लिए मकान बनाने की जो जिम्मेदारी थी, उसे भी तेजी से पूरा किया जा रहा है। अरोड़ा ने बताया कि बोर्ड में पिछले कई वर्षों से नई भर्ती नहीं हुई है। सभी कार्मिक पचास वर्ष से अधिक उम्र के हैं। चूंकि अब बोर्ड का काम काफी बढ़ गया है, इसलिए नई भर्ती की आवश्यकता है। अरोड़ा ने कहा कि सरकार के सहयोग और इच्छा शक्ति की वजह से ही बोर्ड को सफलता मिली है। समारोह में मुख्य सचिव राजीव स्वरूप, वित्त विभाग के प्रमुख शासन सचिव निरंजन आर्य, बोर्ड के अध्यक्ष भास्कर सावंत, मुख्यमंत्री के सचिव कुलदीप रांका आदि अधिकारी भी मौजूद रहे।
इन योजनाओं की लॉचिंग :
वाटिका आवासीय योजना, सांगानेर, जयपुर।
महला आवासीय योजना, अजमेर रोड जयपुर।
महात्मा ज्योतिराव फूले आवासीय योजना, नसीराबाद अजमेर।
निवाई आवासीय योजना, निवाई टोंक।
मुख्यमंत्री राज्य कर्मचारी आवासीय योजना, प्रताप नगर जयपुर।
वीक एंड होम पंजीकरण योजना 2020 नयला, जयपुर।
पटेल नगर विस्तार भाग-2 आवासीय योजना, भीलवाड़ा।
शाहपुरा आवासीय योजना भीलवाड़ा।
शास्त्री नगर आवासीय योजना भीलवाड़ा।
अटल नगर अवासीय योजना भींडर उदयपुर।
द्वारकापुरी योजना सवीना द्वितीय एवं दक्षिण विस्तार अवासीय योजना उदयपुर।
महात्मा गांधी संबल आवासीय योजना बड़ली, जोधपुर।
मानपुर आवासी योजना, आबू रोड शहर जिला सिरोही।
खोड़ा गणेश फेज चतुर्थ आवासीय योजना, किशनगढ़, अजमेर।
मुख्यमंत्री जनआवास योजना सेक्टर तीन प्रताप नगर, जयपुर।
मुख्यमंत्री जनआवास योजना सेक्टर 28 प्रताप नगर, जयपुर।
मुख्यमंत्री जनआवास योजना सेक्टर 7 जीएच इंदिरा गांधी नगर, जयपुर।
सात अन्य योजनाएं:
कोचिंग हब प्रताप नगर जयपुर। सिटी पार्क मानसरोवर जयपुर। जोधपुर चौपाटी जोधपुर। कोटा चौपाटी कोटा आदि का शिलान्यास भी हुआ।







