- जबकि जेईई और नीट की परीक्षा तो आनलाइन होगी।
- एक सितम्बर से शुरू होने वाली जेईई परीक्षा देने के लिए 90 प्रतिशत विद्यार्थियों ने प्रवेश पत्र डाउनलोड कर लिए हैं।
- 31 अगस्त को राजस्थान भर में 6 लाख विद्यार्थी बीएसटीसी की प्रवेश परीक्षा देंगे।
- यह गहलोत सरकार का दोहरा चरित्र है – देवनानी।
- 28 अगस्त को प्रदेश भर में कांग्रेस का प्रदर्शन – डोटासरा।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – देश के जिन सात मुख्यमंत्रियों ने इंजीनियरिंग और मेडिकल की प्रवेश परीक्षा लेने का विरोध किया है, उनमें राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी शामिल हैं। गहलोत का भी कहना है कि कोरोना संक्रमण को देखते जेईई और नीट की परीक्षा तीन माह टाल दी जाए। ये वो ही अशोक गहलोत हैं, जिन्होंने कोरोना काल में ही अपने प्रदेश में 10वीं और 12वीं की सभी बकाया परीक्षा करवाई थी। इन दोनों परीक्षा में करीब 20 लाख विद्यार्थियों ने भाग लिया। हालांकि बकाया परीक्षा करवाए जाने का विरोध परीक्षा लेने वाली संस्था राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने किया था। बोर्ड के अध्यक्ष डी.पी. जारौली ने लिखित में कहा था कि कोरोना काल में 20 लाख विद्यार्थियों की परीक्षा करवाया जाना संभव नहीं है। लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में हुई शिक्षा विभाग की बैठक में बकाया परीक्षा करवाने का निर्णय लिया गया। जिस बैठक में यह निर्णय हुआ, उस बैठक में बोर्ड के अध्यक्ष जारौली को बुलाया तक नहीं। यहां तक की शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा भी फिजीकल तौर परबैठक में उपस्थित नहीं थे। कहा जा सकता है कि यह एक तरफा निर्णय अकेले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का था। सीएम के दिशा-निर्देंशों के बाद ही बोर्ड ने 18 जून से 30 जून तक परीक्षाएं करवाई। 10वीं और 12वीं की परीक्षा में 20 लाख से भी ज्यादा परीक्षार्थी शामिल हुए। इसके लिए प्रदेश भर में 6 हजार 300 परीक्षा केन्द्र भी बनाए गए। बोर्ड की परीक्षा करवाने में गहलोत सरकार ने पूरी ताकत लगा दी। हालांकि तब अनेक शिक्षाविदों ने सुझाव दिया था कि 20 मार्च से पहले जिन विषयों की परीक्षा हो चुकी है उनके प्राप्तांकों का औसत निकाल कर बकाया विषयों की परीक्षा में अंक दे दिए जाएं। लेकिन तब अशोक गहलोत सरकार का कहना रहा कि परीक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। जिन अशोक गहलोत ने जून माह में 20 लाख विद्यार्थियों की परीक्षा करवाई, आज वो ही अशोक गहलोत सियासत की गंगा में डुबकी लगाते हुए जेईई और नीट की परीक्षा का विरोध कर रहे हैं। जबकि जेईई और नीट की परीक्षा 24 लाख विद्यार्थी देश भर के परीक्षा केन्द्र पर देंगे। सवाल उठता है कि जब एक प्रदेश में 20 लाख विद्यार्थियों की परीक्षा हो सकती है तो फिर देश भर में 24 लाख विद्यार्थियों की परीक्षा क्यों नहीं? अशोक गहलोत माने या नहीं, लेकिन अपने प्रदेश में कोरोना काल में ही 20 लाख विद्यार्थियों की परीक्षा करवाने के बाद अब उन्हें जेईई और नीट की परीक्षा के विरोध का नैतिक अधिकार नहीं है। सब जानते हैं कि जेईई और नीट की परीक्षा के लिए विद्यार्थी कितनी मेहनत करते हैं। इंजीनियर और डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले विद्यार्थी 11वीं कक्षा की पढ़ाई करते हुए ही किसी कोचिंग सेंटर में प्रवेश ले लेते हैं। यानि इस परीक्षा को देने के लिए विद्यार्थी पिछले दो वर्ष से मेहनत कर रहे हैं। लॉकडाउन की वजह से पहले ही इन परीक्षाओं में विलम्ब हो गया है। परीक्षा देने वाले विद्यार्थी मानसिक तनाव में है। यह तनाव तभी खत्म होगा, जब परीक्षा हो जाएगी। अभिभावकों ने भी अपने बच्चों की कोचिंग पर लाखों रूपया खर्च किया है। कोई भी विद्यार्थी और अभिभावक नहीं चाहता कि परीक्षा टाली जाएं। इसका सबसे बड़ा सबूत यही है कि एक सितम्बर से शुरू होने वाली जेईई की परीक्षा के लिए 28 अगस्त तक 90 प्रतिशत विद्यार्थियों ने प्रवेश-पत्र डाउनलोड कर लिए हैं। यानि शत-प्रतिशत विद्यार्थी परीक्षा देने को तैयार हैं। राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने तो परीक्षा केन्द्रों पर लिखित परीक्षा करवाई थी, जबकि जेईई और नीट की परीक्षा तो ऑनलाइन होंगी। सवाल यह भी है कि क्या कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष और विरोध करने वाले मुख्यमंत्रियों के बेटे-बेटियां परीक्षा दे रहे हैं? इस सवाल का जवाब ना में ही आएगा। इसीलिए इन नेताओं को विद्यार्थियों के दर्द का पता नहीं है। देश भर के शिक्षाविद् भी कह रहे हैं कि जेईई और नीट की परीक्षा होनी चाहिए। सरकार भी परीक्षा करवाने को पूरी तरह तैयार है, लेकिन राजनीतिक कारणों से परीक्षा का विरोध किया जा रहा है। यदि परीक्षा को दो-तीन माह के लिए टाला गया तो विद्यार्थियों का मानसिक तनाव और बढ़ेगा। ऐेसे में अप्रिय घटनाओं की भी आशंका है।
गहलोत सरकार का दोहरा चरित्र – देवनानी
पूर्व शिक्षा राज्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ विधायक वासुदेव देवनानी ने आरोप लगाया कि जेईई और नीट की परीक्षा को लेकर गहलोत सरकार दोहरे चरित्र का प्रदर्शन कर रही है। एक ओर अशोक गहलोत मुख्यमंत्री की हैसियत से इन परीक्षाओं का विरोध कर रहे हैं, वहीं अपने प्रदेश में 31 अगस्त को बीएसटीसी के लिए प्रवेश परीक्षा करवा रहे हैं। इस परीक्षा में प्रदेश भर में करीब 6 लाख विद्यार्थी भाग लेंगे। यदि कोरोना संक्रमण का इतना ही डर है तो फिर बीएसटीसी के लिए प्रवेश परीक्षा क्यों करवाई जा रही है? देवनानी ने कहा कि इससे पहले गहलोत सरकार 20 लाख विद्यार्थियों की बोर्ड परीक्षा भी कोरोना काल में करवा चुकी है। जाहिर है कि जेईई और नीट की परीक्षा को लेकर राजनीति की जा रही है।
28 अगस्त को कांग्रेस का प्रदर्शन :
जेईई और नीट परीक्षा के विरोध में 28 अगस्त को प्रदेश भर में जिला मुख्यालयों पर कांग्रेस के कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन करेंगे। प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा द्वारा जारी परिपत्र में सभी कार्यकर्ताओं को प्रदर्शन में भाग लेने के निर्देंश दिए गए हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि अभी किसी भी जिले में कांग्रेस का संगठन नहीं है। सचिन पायलट के हटने के बाद डोटासरा ने सभी जिला कमेटियों को भंग कर दिया था। एक ओर राजनीति के चलते डोटासरा कांग्रेस कार्यकर्ताओं से प्रदर्शन करवा रहे हैं, जबकि 8 जुलाई को जब डोटासरा अजमेर में 12वीं विज्ञान का परीक्षा परिणाम घोषित करने आए थे तब शिक्षा बोर्ड के अधिकारियों की पीठ थपथपाई थी। शिक्षामंत्री के तौर पर आए डोटासरा ने तब जून माह में 10वीं और 12वीं की बकाया परीक्षा करवाने के लिए बोर्ड अधिकारियों को शाबासी दी थी, लेकिन अब प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद डोटासरा परीक्षा के विरोध में प्रदर्शन करवा रहे हैं।







