मोदी के ‘मिशन कश्मीर’ से पाकिस्तान में कोहराम, सताने लगा PoK छिनने का डर

नई दिल्ली – एक वक्त था जब पाकिस्तान कश्मीर पर अपना दावा ठोक रहा था. अब हालत ये है कि PoK भी उसके हाथ से निकलना करीब-करीब तय हो चुका है.PoK में भारत का ‘तिरंगा प्लान’ काम कर रहा है और इमरान खान को इसी तिरंगा प्लान का डर सता रहा है.उनके बयानों से लगता है कि इमरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगे सरेंडर कर चुके हैं.
बताते चलें कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कश्मीर पर सरेंडर करने की बात एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में मान ली है. उन्हें इसका मलाल कम है कि कश्मीर भारत का हिस्सा है. उन्हें डर इस बात का है कि कल कहीं pok भी पाकिस्तान के कब्ज़े से आज़ाद न हो जाए.
दरअसल इमरान इस बात से निश्चिंत थे कि भारत में कांग्रेस की सरकार है. लेकिन मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल ने उनके होश उड़ा दिए हैं. झूठ बोलकर पाकिस्तान में जैसे तैसे सरकार चला रहे इमरान आज भी बालाकोट एयर स्ट्राइक को भूल नहीं पाए हैं. वे चाहकर भी यह बात भुला नहीं पाते हैं कि एयर स्ट्राइक ने पाकिस्तानी सेना की कैसे दुर्गति की थी.
बालाकोट हमले के बाद इमरान खान शुरू में कहते रहे कि कोई एयर स्ट्राइक हुई ही नहीं. फिर मजबूरन मान लिया कि स्ट्राइक हुई थी लेकिन नुकसान नहीं हुआ. इमरान खान आज तक इस हमले का सच बताने की हिम्मत नहीं जुटा पाए हैं. उन्हें डर है कि ये सच बताते ही वे तख्तापलट का शिकार हो जाएंगे.
बता दें कि कुछ दिनों पहले ही पाकिस्तान जमीयत-उल-इस्लामी पार्टी के लीडर मौलाना फजलुर रहमान ने इमरान खान को दो टूक लहजे में समझा दिया था कि पीओके में पाकिस्तान के दिन पूरे हो चुके हैं. इमरान को आईना दिखाते हुए उन्होंने साफ कर दिया था कि हिंदुस्तान से लड़कर कश्मीर हथियाने का ख्वाब अब छोड़ दीजिए. किसी तरह मुजफ्फराबाद बचाने की सोचिए.
सूत्रों के मुताबिक पीएम मोदी का प्लान केवल PoK को पाकिस्तान से मुक्त कराना नहीं है बल्कि आतंकियों का सफाया करना भी है. दाऊद इब्राहिम पर ज़ी न्यूज़ के खुलासे के बाद पाकिस्तान ये मानने को मजबूर हो चुका है कि दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान में ही है. लेकिन इधर उधर की बातें करके भटकाने की कोशिश कर रहा है.
भारतीय खुफ़िया एजेंसियों को मिली ख़बर के मुताबिक चीन अतंर्राष्ट्रीय परमाणु समझौतों के विरुद्ध पाकिस्तान को न्यूक्लियर हथियार बनाने में मदद कर रहा है. इतना ही नहीं, चीन पाकिस्तान को चश्मा, खुशाब और कराची में न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट बनाने में भी मदद कर रहा है. दरअसल पाकिस्तान भारतीय सेना से पारंपरिक युद्ध में बुरी तरह से हारने के खतरे बुरी तरह डर गया है और अब वह टेक्टिकल न्यूक्लियर हथियारों को हासिल करना चाहता है.

 

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