दिल्ली (उपसंपादक तहरीम वाहिद) – उलमाए इस्लाम ने आशूरा (मुहर्रम की दसवी तारीख ) की खुससियत किताबों में
बयान फरमाई है आईए आशूरा की उन खुसूसियात पर नज़र डालें। मुहर्रमुल हराम आशुरा के रोज़ हज़रत सय्यदना आदम अलैहिस्सलाम की तौबा क़ुबूल हुई उसी दिन आदम अलैहिस्सलाम पैदा किये गये उसी दिन उन्हें जन्नत में दाखिल किया गयाउसी दिन अर्श, कुर्सी, आस्मान ज़मीन, सूरज, चांद, सितारे, और जन्नत पैदा किए गए। उसी दिन हज़रते सय्यदना इब्राहीम खलीलुल्लाह अलैहिस्सलातु वस्सलाम पैदा हुए, और उसी दिन उन्हें आग से निजात भी मिली, उसी दिन मूसा अलैहिस्सलाम और आप की उम्मत को निजात मिली और फिरऔन अपनी कौग समेत गर्क हुआ। इसी दिन हज़रते ईसा अलैहिस्सलाम पैदा किए गए और इसी दिन उन्हें आस्मानों की तरफ उठाया गया, इसी दिन नूह अलैहिस्सलाम की कश्ती जुदी पहाड़ पर ठेहरी, इसी दिन सुलैमान अलैहिस्सलाम को मुल्के अजीम अता किया गया, इसी दिन हज़रते सय्यदना यूनुस अलैहिमुस्सलाम मछली के पेट से निकाले गए, इसी दिन हज़रत सय्यदना याकूब अलैहिस्सलातो वस्सलाम की बीनाई (आंखों की रौशनी) की कमज़ोरी दूर हो गई, इसी दिन हजरत सय्यदना यूसुफ अलैहिस्सलातो वस्सलाम गहरे कुंऐं से निकाले गए, इसी दिन हज़रते अय्यूब अलैहिस्सलातो वस्सलाम की तकलीफ रफअ (दूर) की गई, आस्मान से ज़मीन पर सबसे पहली बारिश इसी दिन नाजि़ल हुई और इसी दिन का रोज़ा उम्मतों में मशहूर था यहां तक कि यह भी कहा गया कि उस दिन का रोजा़ माहे रमज़ानुल मुबारक से पहले फर्ज़ था फिर मन्सूख कर दिया गया, इमामुल हुमाम इमामे आली मुकाम इमामे अर्श मुकाम इमामे तिश्नए काम सय्यदना इमामे हुसैन रदियल्लाहु अन्हो को उनके शहजा़दगान व रुफकाअ (साथियों) के साथ तीन दिन भूका रखने के बाद इसी आशूरा के रोज़ दश्ते करबला में इन्तेहाई सफ्फाकी के साथ शहीद किया गया।
अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त अपने महबूब मुहम्मदुर्रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम के सदक़े व शोहदाए कर्बला के सदक़े पूरी दुनिया को कोरोना महामारी जैसी वबा से महफूज़ रख्खै। आमीन या रब्बुल आलेमीन ।







