शुद्ध खान पान ही बचाएगा कोरोना जैसे संक्रमण से।

  • आईआईटी मुम्बई से इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के बाद जैविक खेती में जुटे अजमेर के युवा सार्थक मित्तल।
  • आम व्यक्ति के स्वास्थ के साथ साथ किसान की आय बढ़ाने की भी चिंता। देश में कुछ अलग करने की तमन्ना।
  • रीटेल मार्केट में जल्द आएगा मित्तल ऑर्गेनिक फूड।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – यदि किसी युवा ने आईआईटी मुम्बई से एनर्जी साइंस एंड टेक्नोलॉजी में बीटेक व एमटेक की डिग्री ली हो तो वे सबसे पहले किसी मल्टीनेशनल कंपनी में भर्ती होकर पैकेज की चिंता करेंगा। अभिभावक भी चाहेंगे कि बेटे पर जो पैसा खर्च किया है, उसकी भरपाई जल्द हो। लेकिन कुछ युवा ऐसे भी होते हैं, जो डिग्री के बाद लीक से हट कर कुछ करना चाहते हैं। ऐसे युवाओं में ही एक हैं अजमेर के सार्थक मित्तल। सार्थक मित्तल अजमेर के पुष्कर रोड स्थित मित्तल अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर के निदेशक मनोज मित्तल के पुत्र हैं। मनोज भी चहाते थे कि सार्थक मित्तल अस्पताल प्रबंधन का ही कार्य संभाले, लेकिन सार्थक की इच्छा कुछ अलग करने की है। कोरोना जैसे संक्रमण से समाज का बुरा हाल है। आज हर परिवार कोरोना महामारी से दु:खी और परेशान हैं। कोरोना जैसी बीमारियों की उपज हमारे दूषित खान पान की वजह से ही है। हम सोचते हैं कि बाजार से शुद्ध अनाज और अन्य खाद्य सामग्री लाए हैं, लेकिन खाद्य सामग्री किस तरह तैयार हुई है, इस पर कोई विचार नहीं करता। सार्थक का मानना है कि अधिक पैदावार की लालच में केमिकल फॢटलाइजर और कीटनाशकों का उपयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है। इससे खाद्य पदार्थ की पौष्टिकता नष्ट हो रही है एवं हमारे स्वास्थ पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इसी वजह से अनेक बीमारियाँ हो रही हैं। खेती के लिए केमिकल इस्तेमाल करने की वजह से धीरे धीरे जमीन भी बंजर बन रही है। यदि किसान जैविक खेती करे तो उसे बाजार में उत्पाद की कीमत भी अधिक मिलेगी तथा जमीन भी हमेशा उपजाऊ बनी रहेगी। जैविक खेती की वजह से किसान साल में चार पांच बार फसल प्राप्त कर सकता है। इतना ही नहीं मौसम के विपरीत भी फल सब्जी खाद्यान्न उगाए जा सकते हैं। सार्थक ने बताया कि उनकी प्रयास है कि आम किसान को जैविक खेती के प्रति जागरुक किया जाए। जो किसान उनके अभियान से जुड़ेंगे उनकी फसल की गारंटी भी होगी। खेत में जितना उत्पादन होगा, उस सब की खरीद उनका संस्थान करेगा। सार्थक का मानना है कि यदि एक बार किसान जैविक करेगा तो फिर उसे पीछे देखने की जरुरत नहीं होगी। किसान समृद्ध होगा तो देश भी खुशहाल बनेगा। आज भी ग्रामीण क्षेत्र में अधिक लोग खेती पर निर्भर है। एक ओर उनका प्रयास किसानों को आर्थिक दृष्टि से मजबूत करना है, तो दूसरी ओर आम लोगों को शुद्ध खाद्य सामग्री उपलब्ध करवाना है। यदि जैविक खेती से उत्पन्न खाद्य सामग्री का उपयोग आम व्यक्ति करेगा तो कई बीमारियों से बच सकेगा। लोगों में बेवजह का भ्रम है कि जैविक खेती के उत्पाद महंगे होते हैं। सार्थक ने कहा कि किसान से सीधे खरीद कर उपभोक्ताओं को सप्लाई किया जाए तो खाद्य सामग्री बेहद सस्ती हो सकती है। उनके संस्थान का प्रयास होगा कि किसान और उपभोक्ता के बीच के सभी मुनाफाखोरों को हटा दिया जाए। सार्थक ने कहा कि अब ऑनलाइन सिस्टम का जमाना है। इसलिए उन्होंने मित्तल ऑर्गेनिक फूड प्रोडेक्ट के नाम से अपने संस्थान का रजिस्ट्रेशन करवाया है। आने वाले समय में कोई भी उपभोक्ता घर बैठे ऑर्गेनिक फूड मंगवा सकता है। सार्थक ने बताया कि वे पिछले एक साल से अपनी पैतृक जमीन पर जैविक खेती का काम कर रहे हैं। इसके अंतर्गत अनाज, सब्जियां, मसाले आदि उगा रहे हैं। सफल प्रयोग के बाद अब वे किसानों से सम्पर्क कर जैविक खेती को बढ़ावा देने में लगे हुए हैं। ऑर्गेनिक फूड में विटामिन सी, जिंक और आयरन की मात्रा अधिक होती है जो हमारे शरीर की इम्युनिटी बढ़ाती है। सार्थक ने कहा कि जैविक खेती की वजह से पशुपालन का व्यवसाय भी तेजी से आगे बढ़ेगा। यदि पशु जैविक खेती वाली जमीन पर उगे चारे का उपयोग करेंगे तो दूध की मात्रा भी बढ़ेगी। यानि किसान को चारों तरफ से फायदा है। उन्होंने माना कि जैविक खेती के प्रचार प्रसार के लिए जो कुछ किया जाना था वह अभी नहीं किया गया है।

 

 

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