- राजस्थान के परिवहन विभाग में भी सेंधमारी। फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस भी।
- जी न्यूज के अजमेर संभाग प्रभरी मनवीर सिंह का बड़ा भंडाफोड़।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – सरकार बार बार यह दावा करती है कि आम नागरिक से जो जानकारी जुटाई जाती है, उसे डिजीटली सुरक्षित रखा जाता है। लोगों की व्यक्तिगत जानकारियों में सेंध नहीं लगे इसलिए दुश्मन देश चीन के सैकड़ों एप बंद किए जा रहे हैं। डेटा चोरी में चीन को चोरों का सरदार माना जाता है। सरकार की इतनी सुरक्षा और दावों के बाद भी माना जा रहा है कि पेन कार्ड के डेटा में सेंध लग गई है। भारत सरकार ने पेन बनाने का कार्य एनएसडीएल कंपनी को दिया है। लेकिन इस कंपनी के डेटा में सेंध लग गई है। जी न्यूज अजमेर के संभाग प्रभारी मनवीर सिंह ने विस्तृत जांच पड़ताल कर पता लगाया कि निजी वेबसाइट स्मार्ट आईकार्ड डॉट इन के माध्यम से मात्र 50 रुपए में पेनकार्ड बनवाया जा सकता है। मनवीर ने इस वेबसाइट के जरिए कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर का पेनकार्ड भी बनवा लिया। गंभीर बात यह है कि फर्जी पेनकार्ड पर सरकार की असली क्यूआर कोड भी अंकित है। सवाल उठता है कि एक निजी वेबसाइट के पास सरकार के पेनकार्ड का डेटा कहां से आया? भारत के नागरिक की पहचान में पेनकार्ड का खास महत्व होता है। पेनकार्ड के माध्यम से ही आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट आदि दस्तावेज बनाए जाते हैं। जब मात्र 50 रुपए में पेन कार्ड मिल रहा है तो आतंकवादी भी ऐसा कार्ड बनवा सकते हैं। मनवीर का कहना है कि इसी वेबसाइट पर राजस्थान सरकार के परिवहन विभाग द्वारा जारी ड्राइविंग लाइसेंस भी मिल रहे हैं। मनवीर सिंह ने जो सबूत जुटाए उन्हें देखते हुए जी न्यूज के राष्ट्रीय चैनल जी हिन्दुस्तान पर 4 सितम्बर को सायं 7 से 9 बजे तक प्रसारण किया गया। इस प्रसारण के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने जांच के आदेश जारी कर दिए। चूंकि डेटा चोरी का मामला राजस्थान से भी जुड़ा हुआ है, इसलिए 6 सितम्बर को दोपहर 12 बजे जी न्यूज के राजस्थान चैनल पर प्रसारित किया गया। मनवीर ने बताया कि संबंधित वेबसाइट पर राशन कार्ड भी बनाए जा रहे हैं। मनवीर ने जो भंडाफोड किया है, उसके लिए मोबाइल नम्बर 7412029005 पर शाबाशी दी जा सकती है। मनवीर ने पेनकार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और राशन कार्ड बनाने वालों से मोबाइल पर बात भी की है। मनवीर ने बताया कि देश में 51 करोड़ से भी ज्यादा लोगों के पास पेनकार्ड है।
सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग की आशंका:
जी न्यूज ने जिस तरह पेनकार्ड, राशनकार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस के फर्जीवाड़े को उजागर किया है, उससे सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग की भी आशंका हो गई है। सरकारी योजनाओं में लाभ प्राप्त करने के लिए ऐसे ही दस्तावेज़ों की जरुरत होती है। अब यदि ऐसे दस्तावेज 50-50 रुपए में मिलने लगेंगे तो फिर फर्जी तरीके से योजनाओं का लाभ भी प्राप्त कर लिया जाएगा।







