- कांगना तो फिल्म उद्योग में फैली गंदगी को साफ करने वाली दिलेर अभिनेत्री है।
- रिया चक्रवर्ती की वजह से फिल्मों का काला चेहरा सामने आया।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – मुम्बई किस के बाप की है यह तो पता नहीं, लेकिन मुम्बई नगरी भारत माता की धरती पर बसी हुई है। वो भारत माता जिसकी गोद में 130 करोड़ नागरिक बैठे हुए हैं। ये 130 करोड़ नागरिक देश में कहीं भी आ जा सकते हैं। अभिनेत्री कांगना रनौत भी जब चाहे तब मुम्बई में रह सकती है। चूंकि कांगना ने तो मुम्बई में फिल्मों की शूटिंग की है, इसलिए कांगना का तो घर मुम्बई है। अब महाराष्ट्र की सत्तारुढ़ पार्टी शिवसेना के प्रखर प्रवक्ता सांसद संजय राउत और गृह मंत्री अनिल देशमुख का कहना है कि कांगना को मुम्बई नहीं आना चाहिए। कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सत्ता की मलाई खा रहे इन दोनों नेताओं का मानना है कि कांगना ने मुम्बई की बदनामी की है। सवाल उठता है कि अपनी काबिलीयत के दम पर सफल अभिनेत्री बनी कांगना ने ऐसा क्या कर दिया जिससे मुम्बई की बदनामी हुई है? सब जानते हैं कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के प्रकरण में कांगना ने सबसे पहले फिल्मी माफिया के खिलाफ आवाज़ उठाई थी। कांगना का कहना रहा कि मुम्बई के फिल्म उद्योग में एक ऐसा गिरोह सक्रिय है जो अपने लोगों को ही आगे बढ़ाता है। इस गिरोह का जो कहना नहीं मानता उसका हश्र सुशांत सिंह जैसा होता है। पुरुष कलाकार ही नहीं बल्कि महिला कलाकारों का भी शोषण होता है। रिया चक्रवर्ती के प्रकरण ने तो यह भी उजागर कर दिया है कि मुम्बई का फिल्म उद्योग नशे के कारोबार में भी डूबा हुआ है। कांगना रिया को सामने रखकर मुम्बई के कई अभिनेताओं के मेडिकल टेस्ट कराने तक की मांग कर दी है। इससे फिल्म उद्योग में खलबली मच गई है। सवाल उठता है कि आखिर कांगना ने ऐसा क्या कह दिया कि जिसकी वजह से उसे मुम्बई आने से रोका जा रहा है। कांगना ने अब तक जो भी बात कही है वह मुम्बई फिल्म उद्योग की बुराईयों को लेकर है। जब अकेली कांगना फिल्म उद्योग में फैली गंदगी को साफ करने में लगी हुई हैं तो फिर मुम्बई में उनका स्वागत किया जाना चाहिए। धमकी दी जा रही है कि कांगना का मुकाबला राजनीतिक दल की महिला बिग्रेड करेगी। सवाल यह नहीं है कि कांगना को मुम्बई आने से रोका जाए? अहम सवाल यह है कि फिल्म उद्योग को साफ सुथरा कैसे बनाया जावे। जब फिल्म उद्योग से जुड़े लोग नशे के पदार्थों का सेवन करेंगे तो फिर इस उद्योग पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। अच्छा हो कि फिल्म उद्योग का जो काला चेहरा सामने आया है उसे अब पूरी तरह साफ किया जाए। महाराष्ट्र की सत्ता रूढ़ पार्टी को घबराने की जरुरत नहीं है। यह माना कि शिवसेना के उद्धव ठाकरे कांग्रेस और एनसीपी के सहयोग से सरकार चला रहे हैं। महाराष्ट्र साफ सुथरा राज्य बने इसकी जिम्मेदारी उद्धव ठाकरे की भी है।







