14 सौ करोड़ के बैंक घोटाले की आरोपी क्वालिटी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का अजमेर का प्लांट डेयरी के रिटायर एमडी भूपेन्द्र सिंह चौधरी ने लगाया था।

  • अब सीबीआई कर रही है जांच पड़ताल। अजमेर में पशुपालकों का भी पैसा बकाया है।
  • 12 करोड़ की बिजली चोरी के मामले में ब्यावर के एईएन धर्म सिंह महावर सस्पेंड।
  • अन्य इंजीनियर भी जांच के दायरे में।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – देश के विभिन्न शहरों में डेयरी प्लांट लगा कर कई बैंकों से 14 सौ करोड़ रुपए की वित्तीय गड़बड़ी करने वाली मैसर्स क्वालिटी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी अजमेर का प्लांट अजमेर डेयरी के रिटायर एमडी भूपेन्द्र सिंह चौधरी ने लगाया था। 21 सितम्बर को देशव्यापी छापे मारी में सीबीआई ने अजमेर के ब्यावर रोड स्थित बकरा मंडी में बंद पड़े चौधरी के डेयरी प्लांट पर भी जांच पड़ताल की।
प्राप्त जानकारी के अनुसार अजमेर डेयरी के एमडी पद की नौकरी छोड़कर भूपेन्द्र चौधरी ने बकरा मंडी में 15 वर्ष पहले डेयरी का प्लांट लगाया था। लेकिन बाद में इस प्लांट को मैसर्स क्वालिटी प्राइवेट लिमिटेड के सुपुर्द कर दिया था। कंपनी से हुए समझौते के अनुसार चौधरी इसी प्लांट में मैनेजर बन गए। सूत्रों के अनुसार पुराने प्लांट पर ही कंपनी ने मिली भगत कर करोड़ों रुपए का लोन बैंकों से लिया। कोई 14 सौ करोड़ रुपए का लोन चुकाने में कंपनी असमर्थ बताई जा रही है। इस मामले में कंपनी से जुड़े संजय ढिंगरा, सिद्धांत गुप्ता, अरुण श्रीवास्तव आदि को सीबीआई ने जांच के दायरे में लिया है। 21 सितम्बर को सीबीआई ने अजमेर के साथ साथ कंपनी के दिल्ली फरीदाबाद, सहारनपुर बुलंदशहर आदि कार्यालयों और प्लांटों पर भी आकस्मिक जांच की। सूत्रों के अनुसार कंपनी ने अजमेर जिले के दुग्ध उत्पादकों से भी दूध खरीदा था। आज भी सैकड़ों उत्पादकों के पैसे बकाया बताए जा रहे हैं। अजमेर डेयरी के अध्यक्ष रामचन्द्र चौधरी ने कहा कि भूपेन्द्र चोधरी के डेयरी प्लांट से अजमेर डेयरी का कोई सरोकार नहीं है।
एईएन सस्पेंड:
अजमेर जिले के सबसे बड़े उपखंड ब्यावर में 12 करोड़ रुपए की बिजली चोरी के विभिन्न प्रकरणों में लापरवाही बरतने के आरोप में अजमेर डिस्कॉम के प्रबंध निदेशक बीएस भाटी ने ब्यावर के रीको क्षेत्र के एईएन धर्म सिंह महावर को सस्पेंड कर दिया है। इस मामले में ब्यावर के अन्य इंजीनियरों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। भाटी ने बताया कि पिछले दिनों डिस्कॉम के अधीन आने वाले सभी 11 जिलों में बिजली चोरों को पकडऩे का अभियान चलाया गया था।
इस अभियान के अंतर्गत ही बाहर की टीमों ने ब्यावर में विभिन्न औद्योगिक ईकाई के मीटरों की जांच की तो बिजली चोरी का पता चला। कई संस्थाओं के मालिकों ने मीटरों में छेड़छाड़ कर रखी थी। भाटी ने कहा कि जब बाहर की टीमें एक उपखंड में 12 करोड़ रुपए की बिजली चोरी पकड़ सकती है, तब क्षेत्र के इंजीनियरों की भूमिका पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का बराबर दबाव है कि क्षीजत को कम किया जाए। सरकार के दिशा निर्देशों के अनुरूप ही बिजली चोरों को पकडऩे का अभियान चलाया जा रहा है। बिजली चोरी के मामले में किसी भी इंजीनियर की कौताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो भी इंजीनियर लापरवाह पाया गया, उसके विरुद्ध सख्त कार्यवाही होगी।

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