इधर डीजीपी भूपेन्द्र यादव के वीआरएस लेने की खबर आई तो उधर राजस्थान के मुख्य सूचना आयुक्त के लिए विज्ञापन जारी हुआ।

  • मुख्य सचिव के पद से हटाए गए बीडी गुप्ता तीन माह से ठाले बैठे हैं। 30 सितम्बर को आईएएस से सेवानिवृत्ति होनी है। गुप्ता बन सकते हैं आरपीएससी के चेयरमैन।
  • व्यापारी अपनी दुकान पर वफादार नौकर को ही रखता है। कारोबार की इस नीति पर ही काम कर रहे हैं राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत।
  • एमएल लाठर को डीजीपी बनाने के लिए कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा भी सक्रिय।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – कारोबार जगत में यह नीति है कि दुकान पर उसी नौकर को रखा जाएगा जो मालिक के प्रति वफादार होगा। सवाल जवाब करने वाले नौकर को तत्काल हटा दिया जाता है। अनेक समझदार मालिक सभी नौकरों में तालमेल रखते हैं। जैसी आवश्यकता होती है वैसे ही नौकरों का इस्तेमाल किया जाता है। जो नौकर मालिक की मर्जी से इस्तेमाल होता है, उसकी तरक्की भी लगातार होती रहती है। ऐसे नौकर उम्र पूरी होने के बाद भी सुविधाएं लेते रहे हैं। कारोबार की कुछ इस नीति पर राजस्थान में अमल हो रहा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के प्रति वफादारी दिखाने वाले आईएएस और आईपीएस अफसर आनंद में हैं।
मौजूदा दौर में प्रदेश के आईएएस और आईपीएस को मुख्यमंत्री के प्रति वफ़ादारी दिखाने में कोई हर्ज नहीं है। जुलाई अगस्त में जब डिप्टी सीएम सचिन पायलट 18 विधायकों के साथ एक माह के लिए दिल्ली चले गए, तब अशोक गहलोत की सरकार को बचाने में आईपीएस और आईएएस ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भूपेन्द्र यादव के डीजीपी रहते ही मंत्रियों, विधायकों आदि के खिलाफ देशद्रोह तक की कार्यवाही हुई। राजस्थान की पुलिस विधायकों को गिरफ्तार करने के लिए दिल्ली तक पहुंच गई। जैसा मालिक ने कहा वैसा नौकरों ने किया। यहां तक कोरोना की आड़ लेकर प्रदेश की सीमाएं तक सील कर दी गई। किसी ने भी वफ़ादारी दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। रिटायरमेंट के बाद भी भूपेन्द्र यादव ही डीजीपी बने रहे, इसके लिए गहलोत की सरकार सुप्रीम कोर्ट तक जंग लड़ रही है।
अब इशारा हुआ है तो यादव ने 9 माह पहले ही नौकरी छोडऩे की पेशकश कर दी है। 23 सितम्बर को इधर यादव ने वीआरएस लेने की खबर आई तो उधर गहलोत सरकार ने प्रदेश के मुख्य सूचना आयुक्त और दो सूचना आयुक्त की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी कर दिया। पात्र उम्मीदवारों से 7 अक्टूबर, 2020 तक आवेदन मांगे गए हैं। आवेदन तो सिर्फ दिखाने के लिए मांगे गए हैं। जानकारों की माने तो मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर भूपेन्द्र यादव की ही नियुक्ति होनी है। मुख्य सूचना आयुक्त बनने के बाद यादव 65 वर्ष की उम्र तक सरकारी सुविधाओं का उपयोग करेंगे। कार्य क्षेत्र भी प्रदेशभर का होगा।
आखिर मालिक के प्रति वफादारी दिखाने का इतना पारिश्रमिक तो मिलना ही चाहिए। गोविंद सिंह डोटासरा के प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनने के बाद राजस्थान में सत्ता और संगठन में कोई अंतर नहीं रहा है। यही वजह है कि डोटासरा की सक्रियता की वजह से एमएल लाठर को नया डीजीपी बनाए जाने का रास्ता साफ हो गया है। ये वो ही लाठर हैं जिन्होंने कानून व्यवस्था का जिम्मा संभालते हुए जुलाई-अगस्त में दो बार सीमाएं सील करने के आदेश जारी किए। यदि लाठर को डीजीपी बनाए जाने से कांगे्रस संगठन खुश होता है तो सरकार को क्या ऐतराज है? राजीव दासोत और वीएल सोनी जैसे आईपीएस को अभी और वफादारी दिखाने की जरुरत है। मालिक खुश हो तो रिटायरमेंट के बाद भी जुगाड़ की संभावनाएं बनी रहती हैं।
इन संभावनाओं को भूपेन्द्र यादव की भूमिका से समझा जा सकता है। साठ वर्ष की उम्र पूरी होने पर सरकार ने पहले दो वर्ष का सेवा विस्तार दिलवाया और अब नौ माह पहले इशारा किया तो वीआरएस का आवेदन कर दिया। ऐसे समझदार को ही मुख्य सूचना आयुक्त के पद से नवाजा जाता है। यह बात सही है कि पुलिस महकमे में यादव की छवि एक ईमानदार अधिकारी की है। ऐसा बहुत कम होता है कि कोई डीजीपी सेवा विस्तार के 9 माह पहले नौकरी छोड़ दे।
डीबी गुप्ता भी उपकृत होंगे:
पूरा प्रदेश जानता है कि मुख्य सचिव रहे डीबी गुप्ता पिछले ढाई माह से ठाले बैठे हैं। गुप्ता आईएएस सेवा से 30 सितम्बर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। चूंकि राजीव स्वरूप को भी मुख्य सचिव पद का स्वाद चखवाना था, इसलिए डीबी गुप्ता को सेवानिवृत्ति से तीन माह पहले ही मुख्य सचिव का पद छोडऩे को कहा गया। गुप्ता ने भी सरकार के प्रति वफ़ादारी दिखाते हुए एक झटके में पद छोड़ दिया। इसे शानदार वफ़ादारी ही कहा जाएगा कि गुप्ता को मुख्यमंत्री के सलाहकार का पद दिया गया है, लेकिन यह पद सिर्फ कहने भर का है।
इससे ज्यादा और क्या वफादारी हो सकती है कि 30 सितम्बर को गुप्ता बगैर पद के ही सेवानिवृत्त हो जाएंगे। जब सरकार के प्रति इतनी वफादारी दिखाई है तो बड़ा लाभ तो मिलेगा ही। राजस्थान लोक सेवा आयोग के मौजूदा अध्यक्ष दीपक उप्रेती का 14 अक्टूबर को कार्यकाल पूरा हो रहा है। उम्मीद है कि डीबी गुप्ता को आयोग का अध्यक्ष बनाया जाए। आयोग के अध्यक्ष पद पर 62 वर्ष की उम्र तक रहा जा सकता है, इसलिए गुप्ता अगले दो वर्ष तक सरकारी सुविधाओं का उपयोग कर सकते हैं। गुप्ता ने जो वफ़ादारी दिखाई है उसमें इतना हक तो बनता ही है। यहां यह उल्लेखनीय है कि मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर 65 वर्ष और राजस्थान लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष पद पर 62 वर्ष की उम्र तक कार्य किया जा सकता है। चूंकि डीजीपी भूपेन्द्र यादव की उम्र 61 वर्ष के पार है, इसलिए उन्हें मुख्य सूचना आयुक्त का पद ही शूट करता है।

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