बिहार में तीन चरणों में मतदान होगा। नतीजे 10 नवम्बर को आएंगे।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – 25 सितम्बर को मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बिहार में विधानसभा के चुनाव करवाने की घोषणा कर दी। तीन चरणों में होने वाले चुनाव के लिए 28 अक्टूबर को पहले चरण में 71 सीटों पर मतदान होगा, जबकि द्वितीय चरण में 3 नवम्बर को 94 तथा तृतीय चरण में 7 नवम्बर को 28 सीटों पर मतदान होगा। नतीजे दस नवम्बर को आएंगे।
बिहार के चुनाव तब हो रहे हैं, जब देशभर में कोरोना संक्रमण फैला हुआ है। इससे बिहार भी अछूता नहीं है। मुख्य चुनाव आयुक्त अरोड़ा का कहना रहा कि जब देश भर में नीट और जेईई की परीक्षा हो सकती है तो फिर बिहार में चुनाव क्यों नहीं? अरोड़ा ने कहा कि चुनाव आयोग बिहार में 243 सीटों पर चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। लेकिन बिहार के लोगों को कोविड-19 के नियमों का सख्ती के साथ पालन करना होगा। जिला प्रशासन की यह जिम्मेदारी होगी कि वह नियमों का पालन करवाए। अरोड़ा ने प्रेसकॉन्फ्रेंस में कोविड-19 के नियमों का भी उल्लेख किया और बताया कि अनेक पाबंदियों के चलते कोरोना काल में किसी प्रकार से चुनाव प्रचार और मतदान होगा।
अरोड़ा ने नियमों की पालना करने की सीख तो दी, लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वयं मास्क नहीं लगाया। अच्छा होता कि अरोड़ा स्वयं मास्कर लगाकर लोगों को प्रेरित करते। हालांकि प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद आयोग के अधिकारी मास्क लगाए हुए थे। लेकिन अरोड़ा के द्वारा मास्क नहीं लगाना समझ से परे हैं। कोरोना से बचने के लिए मास्क की अनिवार्यता बताई जा रही है। सरकार ने जो गाइड लाइन जारी की है उसमें मास्क नहीं लगाने वालों से जुर्माना तक वसूला जा रहा है। चूंकि बिहार भी कोरोना की चपेट में है, इसलिए कोविड-19 के नियमों का पालना करना अनिवार्य है। बिहार में पहले ही राजनेता नियमों का उल्लंघन कर रहे है।
25 सितम्बर को ही आरजेडी के प्रमुख तेजस्वी यादव ने मीडिया से संवाद करते समय मास्क नहीं लगाया, जबकि उनके आसपास कई लोग खड़े हुए थे। यदि मुख्य चुनाव आयुक्त अरोड़ा मास्क लगाकर प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबेधित करते तो पूरे बिहार में सकारात्मक संदेश जाता। जिन लोगों पर नियमों की पालना करवाने की जिम्मेदारी है ऐसे लोग ही नियमों की पालना नहीं करेंगे तो फिर आम लोगों से क्या अपेक्षा की जा सकती है? एक ओर कोरोना काल में चुनाव प्रचार पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जा रहा है और दूसरी तरफ मुख्य चुनाव आयुक्त ही नियमों की पालना नहीं कर रहे हैं। हालांकि अरोड़ा ने चुनाव आयोग में कई बदलाव किए हैं और प्रचार के दौरान सख्ती भी दिखाई है। अरोड़ा राजस्थान कैडर के वरिष्ठ आईएएस भी रहे हैं।







