आखिर फारुख अब्दुल्ला हर मौके पर भारत के दुश्मनों के साथ क्यों खड़े होते हैं?

फारुख ने अब चीन के प्रति हमदर्दी दिखाई।
जबकि चीन में मुसलमानों को डिटेंशन कैम्पों में रखा जा रहा है।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – भारत में रहने वाले मुसलमान भी जानते हैं कि चीन में मुसलमानों पर कितना अत्याचार होता है। मुसलमानों को नमाज पढऩे से रोकना, रोजा नहीं रखने देना, माइक पर अजान नहीं देने जैसी तो सामान्य घटनाएं हैं। यहां तक मुसलमानों को डिटेन्शन कैम्पों मेंं रख कर अत्याचार किया जाता है। लेकिन सब कुछ होने पर भी जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला चीन के प्रति हमदर्दी दिखा रहे हैं। वह भी तब जब लद्दाख सीमा पर चीन हमें चुनौती दे रहा है।
आज पूरा देश चीन के मुद्दे पर हमारी सेना के साथ खड़ा है, लेकिन फारुख अब्दुल्ला चीन की तरफदारी कर रहे हैं। फारुख का कहना है कि कश्मीर के लोग चाहते हैं कि लद्दाख सीमा को पार चीन के सैनिक भारत में घुस आए। सवाल उठता है कि हर मौके पर फारुख अब्दुल्ला भारत के दुश्मनों के साथ क्यों खडे होते हैं? जब पाकिस्तान के साथ तनाव होता है तो फारुख पाकिस्तान की वकालत करते हैं। अब जब चीन हमारी धरती पर नजर गढ़ा रहा है तो फारुख अब्दुल्ला चीन को बुला रहे हैं। हालांकि अब कश्मीर की राजनीति में फारुख का असर नहीं रहा है।
अनुच्छेद 370 के निष्प्रभावी होने के बाद तो आम कश्मीरियों को अब्दुल्ला परिवार की हकीकत भी पता चल गई है। आजादी के बाद इसी परिवार ने सबसे ज्यादा समय तक कश्मीर पर राज किया है। दादा से लेकर पोता तक जम्मू कश्मीर का मुख्यमंत्री रह चुका है। अब्दुल्ला परिवार के शासन में कश्मीर में कितना भ्रष्टाचार हुआ, यह बात अब आम कश्मीरी को पता चल गई है। बदली हुई परिस्थितियों में आम कश्मीरियो को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने लगा है। अब कश्मीर में खास कर घाटी में पहले जैसी आतंकी घटनाएं भी नहीं हो रही है।
आम कश्मीरी अब खुली हवा में सांस लेने लगा है। फारुख अब्दुल्ला जैसे नेताओं की राजनीति पूरी तरह खतरे में है। अब फारुख को भी समझ आ गया है कि पाकिस्तान की तरफदारी करने से कोई फायदा नहीं होने वाला है, इसलिए चीन का समर्थन शुरू कर दिया है। अब फारुख ने भड़काने का असर कश्मीरियों पर नहीं होगा। कश्मीर के लोग उस चीन का समर्थन केसे कर सकते हैं जो मुसलमानों पर अत्याचार करता है। क्या फारुख की चीन के प्रति हमदर्दी इसीलिए है कि चीन हमारा दुश्मन है? क्या चीन की तरफदारी करना देशद्रोह नहीं है?

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