- इलाज के लिए सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क ही लेना होगा।
- जेएलएन अस्पताल में इलाज की पर्याप्त सुविधा-डॉ. अनिल जैन।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – संभागीय आयुक्त डॉ. आरुषि मलिक के दिशा निर्देशों के बाद अजमेर के प्रमुख निजी अस्पतालों में कोरोना पॉजिटिव मरीजों का इलाज शुरू हो गया है। जिन प्राइवेट अस्पतालों में इलाज शुरू हुआ है उनमें पुष्कर रोड स्थित मित्तल अस्पताल, पंचशील स्थित डॉ. क्षेत्रपाल, ब्यावर रोड स्थित संत फ्रांसिस नर्सिंग होम तथा किशनगढ़ स्थित मार्बल सिटी अस्पताल हैं। डॉ. मलिक ने बताया कि अजमेर में भी कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है,इस स्थिति को देखते हुए निजी अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिए गए कि वे भी कोरोना पॉजिटिव मरीजों का इलाज सुनिश्चित करें।
डॉ. मलिक ने कहा कि आर्थिक तौर पर सक्षम व्यक्तियों को सरकारी अस्पताल में इलाज कराने में झिझक होती है। कई लोग पॉजिटिव होने के बाद भी अपने घरों पर ही रह रहे थे, जबकि ऐसे लोगों को सांस लेने में तकलीफ थी। चूंकि अजमेर में प्राइवेट अस्पतालों में पॉजिटिव मरीज का इलाज नहीं हो रहा था, इसलिए मरीजों को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। इस स्थिति को देखते हुए ही निजी अस्पतालों को विशेष निर्देश दिए गए।
अजमेर के पुष्कर रोड स्थित मित्तल अस्पताल में कोरोना पॉजिटिव मरीजों का इलाज होना शुरू भी हो गया है। जबकि शेष अस्पतालों में एक-दो दिन में ही इलाज शुरू हो जाएगा। डॉ. मलिक ने सक्षम मरीजों से आग्रह किया कि यदि उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही है तो प्राइवेट अस्पतालों में भी अपना इलाज करवा सकते हैं। मित्तल अस्पताल में 45, क्षेत्रपाल अस्पताल में 30 संत फ्रांसिस में 75, मार्बल सिटी अस्पताल में 30, ब्यावर में आनंबानी अस्पताल 15 तथा पाश्र्वनाथ अस्पताल 27 पलंग कोविड मरीज के लिए सुरक्षित रखे गए हैं। डॉ. मलिक ने बताया कि प्राइवेट अस्पतालों में कोरोना पॉजिटिव मरीज के इलाज शुल्क भी राज्य सरकार द्वारा निर्धारित किया गया है।
जनरल वार्ड में भर्ती होने पर प्रतिदिन 5 हजार 500 रुपए निर्धारित किए गए हैं। इसमें कुछ जांचें भी शामिल हैं। जिन मरीजों को ऑक्सीजन की जरुरत हैं उनके इलाज के लिए 8 हजार 250 रुपए प्रतिदिन शुल्क निर्धारित किया है। जिन मरीजों को वेंटीलेटर की जरुरत है उन्हें 9 हजार 900 रुपए की राशि प्रतिदिन देनी होगी। इस राशि में जरूरी जांचों का शुल्क भी शामिल हैं। डॉ. मलिक ने निजी अस्पतालों के प्रबंधन से आग्रह किया कि वे समाज के प्रति अपना दायित्व निभाते हुए कोरोना पॉजिटिव मरीज का इलाज सेवा की भावना से करें। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. केके सोनी ने बताया कि संभागीय आयुक्त के निर्देशों के बाद यह सुनिश्चित किया गया है कि कोरोना पॉजिटिव मरीजों का इलाज प्राइवेट अस्पतालों में पारदर्शिता के साथ हो। सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क की जानकारी मेरे फेसबुक पेज www.facebook.com/SPMittalblog से ली जा सकती है।
सरकारी अस्पताल में पर्याप्त सुविधा:
वहीं जवाहर लाल नेहरू अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अनिल जैन ने बताया कि अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीज के इलाज की पर्याप्त सुविधा है। अस्पताल में 300 मरीजों का इलाज एक साथ हो सकता है। करीब 90 मरीजों वेंटीलेटर की सुविधा एक साथ उपलब्ध करवाई जा सकती है। मौजूदा समय में अधिकतम 150 मरीज अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं। डॉ. जैन ने कहा कि अस्पताल में कोरोना पॉजिटिव मरीज के इलाज में कोई कौताही नहीं बरती जा रही है। यदि किसी मरीज को शिकायत है तो वह या उसके परिजन सीधे उनसे संवाद कर सकते हैं।
उन्होंने माना कि एक साथ डेढ़ सौ कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करना चुनौती पूर्ण काम है। लेकिन उनकी टीम इस चुनौती का डट कर मुकाबला कर रही है। अस्पताल के चिकित्सा कर्मी भी कोरोना की चपेट में आए हैं, लेकिन फिर भी चिकित्सा टीम ने अपना हौंसला बुलंद रखा है। डॉ. जैन ने कहा कि संक्रमित मरीज को घबराने की जरुरत नहीं है। उन्होंने कहा कि प्राइवेट अस्पतालों में इलाज शुरू होने से मरीजों को और राहत मिलेगी। ऐसा कई बार हुआ जब प्राइवेट अस्पताल में भर्ती मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव आ जाने पर मरीज को अस्पताल से तत्काल छुट्टी दी जा रही थी। ऐसे में मरीज के सामने अनेक समस्याएं खड़ी हो रही थी। लेकिन अब जब प्राइवेट अस्पतालों में भी पॉजिटिव मरीज का इलाज शुरू हो गया है, तब अस्पताल से बाहर निकालने की कोई समस्या नहीं रहेगी। डॉ. जैन ने कहा कि प्राइवेट अस्पतालों के चिकित्सक चाहे तो मरीज के इलाज के संबंध में नेहरू अस्पताल के अनुभवी चिकित्सकों से सलाह ले सकते हैं। डॉ. जैन ने दोहराया कि संक्रमण से बचने के लिए लोगों को बाहर निकलने पर मास्क लगाना जरूरी है।







