जयपूर (एस.पी.मित्तल) – राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कोरोना संक्रमण से लडऩे के लिए कितने भी दावे करें, लेकिन कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने अपनी ही सरकार के मंत्रियों की पोल खोल दी है। 19 सितम्बर को कोरोना वायरस के खिलाफ जागरुकता अभियान को लेकर नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल के निवास पर 60 मंत्रियों की एक बैठक हुई। इस बैठक में एक मंत्री ने सुझाव दिया कि अभियान को एक महीने तक चलाया जाए। इस पर डोटासरा ने कहा कि मंत्रियों को कोरोना पर डेढ़ मिनट भी बात करने की फ़ुरसत नहीं है।
ऐसे में एक माह तक अभियान कैसे चलाया जा सकता है? डोटासरा ने नाराजगी दिखाते हुए कहा कि प्रदेश कार्यालय से वरिष्ठ नेता मंत्रियों को फोन करते हैं तो मंत्री फोन रिसीव नहीं करते। जब पार्टी का फोन रिसीव नहीं करते तो मंत्रियों की कार्यपद्धति का अंदाजा लगाया जा सकता है। असल में जब डोटासरा बैठक में अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहे थे, तब बैठक का वीडियो कुछ कैमरा मैन बना रहे थे। बैठक में थोड़ी देर बाद डोटासरा को यह अहसास हो गया कि उनकी नाराजगी मोबाइल और कैमरों में कैद हो गई है। डोटासरा नहीं चाहते थे कि उनकी नाराजगी मीडिया में उजागर हो।
यही वजह रही कि वे बैठक छोड़कर उन पत्रकारों के पास आए जिन्होंने वीडियोग्राफी की थी। हालांकि डोटासरा ने बहुत प्रयास किए कि उनका ऑडियो डिलीट हो जाए, लेकिन अनेक ईमानदार पत्रकारों ने अपने मोबाइल से ऑडियो को डिलीट नहीं किया। अब डोटासरा का वो ही ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस पूरे प्रकरण से यह साफ हो गया है कि गहलोत सरकार के मंत्रियों की भूमिका से प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा भी संतुष्ट नहीं है। यहां यह उल्लेखनीय है कि सरकार के कामकाज को लेकर ही पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने भी आपत्ति दर्ज करवाई थी। अभी यह तो नहीं कहा जा सकता कि डोटासरा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की कार्यशैली से भी नाराज़ है। लेकिन डोटासरा ने मंत्रियों की कार्यशैली की पोल खोल दी है।







