- विसंगतियां दूर नहीं हुई तो राजस्थान सहित कई प्रदेशों में आंदोलन करेगी आरएलपी।
- राजस्थान में स्कूलों की फीस वसूली पर हाईकोर्ट की रोक।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – कृषि सुधार कानून पर अकाली दल के बाद अब आरएलपी ने भी केन्द्र सरकार को आंखें दिखाई हैं। आरएलपी के संयोजक हनुमान बेनीवाल लोकसभा में एकलौते सदस्य हैं। लेकिन आरएलपी ने अपना अलग अस्तित्व बनाए रखा है। 1 अक्टूबर को बेनीवाल ने कहा कि नए कृषि सुधार कानून में अनेक विसंगतियां हैं, जिनसे किसानों को नुकसान हो सकता है। बेनीवाल ने कहा कि वे अभी भी एनडीए के घटक दल हैं, इसलिए अपनी मांगों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सामने रखेंगे। इसको लेकर वे जल्द ही किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ प्रधानमंत्री से मुलाकात करेंगे। बेनीवाल ने कहा कि वे स्वयं एक किसान हैं और किसान के दर्द को अच्छी तरह समझते हैं। बेनीवाल ने कहा कि वे यह सुनिश्चित करेंगे कि किसानों की उपज की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर होती रहे। इसके साथ ही जब कारपोरेट घराना किसान के साथ खेती का अनुबंध करेगा तब यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि मालिकाना हक किसान का भी बना रहे। बेनीवाल ने कहा कि यदि विसंगतियों को दूर नहीं किया गया तो वे राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में किसान आंदोलन शुरू करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि विसंगतियों को दूर करने में पीएम मोदी की सकारात्मक भूमिका होगी।
फीस वसूली पर रोक:
1 अक्टूबर को राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महांति और जिस्टस महेन्द्र गोयल की खंडपीठ ने निजी स्कूलों की फीस वसूली पर रोक लगा दी है। इस मामले में अब 9 अक्टूबर को सुनवाई होगी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद निजी स्कूलों के मालिक किसी भी रूप से अभिभावकों से फीस की वसूली नहीं कर सकेंगे। उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट की एकल पीठ ने पूर्व में 70 प्रतिशत फीस वसूलने की छूट दे दी थी। लेकिन 1 अक्टूबर को खंडपीठ ने फीस वसूली पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। इससे प्रदेश के लाखों अभिभावकों को राहत मिलेगी। हाईकोर्ट के एकल पीठ के आदेश के बाद प्राइवेट स्कूलों के मालिक अभिभावकों से जबरन फीस वसूली कर रहे थे। जो अभिभावक फीस देने में असमर्थ था, उसे बच्चे की टीसी दी जा रही थी। प्रतिष्ठित पब्लिक स्कूलों के मालिकों ने पूर्व में जुलाई माह तक एडवांस फीस ले रखी थी और अब अगले छह माह की फीस जमा करवाने का दबाव बनाया जा रहा था। महत्वपूर्ण बात तो यह है कि स्कूलों के मालिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के आदेश की पालना भी नहीं कर रहे थे। सरकार ने भी लॉकडाउन के दौरान फीस वसूलने पर रोक लगा दी थी। गत मार्च माह से ही स्कूलें बंद हैं,लेकिन ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर अभिभावकों से फीस की वसूली की जा रही थी।







