भाजपा ने हल्ला बोल और कांग्रेस ने मौन सत्याग्रह में सोशल डिस्टेसिंग के नियमों की धज्जियाँ उड़ाई।

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  • दोनों ही दलों ने धारा 144 में विरोध प्रदर्शन के लिए प्रशासन से अनुमति नहीं ली।
  • झुंझुनूं में कलेक्टर के खड़ा नहीं होने से गुस्साए भाजपाइयों का हंगामा। पूर्व विधायक कलेक्टर की टेबल पर बैठे।
  • अजमेर में भी भाजपाइयों ने निकाली बड़ा जुलूस। कांग्रेसियों का मौन सत्याग्रह।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – 5 अक्टूबर को राजस्थान भर में भाजपा ने हल्ला बोल और कांग्रेस ने मौन सत्याग्रह किया। प्रदेश में बढ़ रही बलात्कार और अन्य अपराधों की घटनाओं के विरोध में भाजपाइयों ने जहां कांग्रेस सरकार के खिलाफ हल्ला बोला वहीं भाजपा शासित उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुई घटना के विरोध में कांग्रेस ने जिला मुख्यालयों पर मौन सत्याग्रह किया।

 

राजस्थान में बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए सरकार ने प्रदेश भर में धारा 144 लागू कर रखी है। यानि किसी भी सार्वजनिक स्थान पर पांच व्यक्तियों से ज्यादा एकत्रित नहीं हो सकते हैं। धरना प्रदर्शन पर तो पूरी तरह रोक लगी हुई है। लेकिन 5 अक्टूबर को न तो भाजपा ने और न कांग्रेस ने अपने अपने विरोध के लिए प्रशासन से कोई अनुमति ली। दोनों ही दलों के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में जिला मुख्यालयों पर एकत्रित हुए और अपने अपने नज़रिए से विरोध प्रदर्शन किया।

 

हालांकि मौके पर जिला और पुलिस प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे, लेकिन किसी ने भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने की हिम्मत नहीं जुटाई। यह बात अलग है कि जब कभी आम जनता ऐसे प्रदर्शन करती है तो जिला कलेक्टर के आदेश पर पुलिस प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लेती है। 5 अक्टूबर को प्रशासन और पुलिस के अधिकारी तमाशबीन बने रहे। सवाल उठता है कि क्या कानून की धाराएं राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं पर लागू नहीं होती है?

 

सोशल डिस्टेसिंग की पालना नहीं:
भाजपा और कांग्रेस के प्रदर्शन में सोशल डिस्टेसिंग की भी पालना नहीं हुई। हल्ला बोल और मौन सत्याग्रह में कार्यकर्ता एक-दूसरे से सटकर उपस्थित रहे। कई कार्यकर्ताओं ने तो मुंह पर मास्क भी नहीं लगाया। यहां ये उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने दो अक्टूबर से नो मास्क नो एंट्री का अभियान चला रखा है।

 

लेकिन सरकार के इस अभियान का असर कांग्रेस और भाजपा के कार्यकर्ताओं पर ही नहीं हो रहा है। दोनों ही प्रदर्शनों में अनेक कार्यकर्ताओं के मुंह पर मास्क नहीं लगा हुआ था। जबकि बार बार कहा जा रहा है कि कोरोना से बचना है तो मास्क लगाना जरूरी है। भाजपा और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन से प्रतीत होता है कि दोनों ही दलों के कार्यकर्ताओं को कोरोना जैसे जानलेवा वायरस से भी डर नहीं है।

 

कलेक्टर की टेबल पर बैठे पूर्व विधायक:
5 अक्टूबर को झुंझुनूं कलेक्टर यूबी खान के चेम्बर में भाजपा कार्यकर्ताओं का जबर्दस्त हंगामा हुआ। हल्ला बोल प्रदर्शन के बाद भजपा के सांसद पूर्व विधायक और वरिष्ठ पदाधिकारी कलेक्टर के चेम्बर में ज्ञापन देने के लिए पहुंचे तो कलेक्टर ने बैठे बैठे ही ज्ञापन लेने के लिए हाथ बढ़ाया, लेकिन भाजपा के नेता चाहते थे कि कलेक्टर अपनी कुर्सी से खड़े हो और फिर ज्ञापन ग्रहण करें। लेकिन कलेक्टर खान ने कुर्सी से खड़े होने से इंकार कर दिया।

 

इस पर भाजपा के कार्यकर्ताओं ने चैम्बर में ही कलेक्टर को खरीखोटी सुनाई। भाजपाइयों का आरोप रहा कि कलेक्टर जन प्रतिनिधियों के प्रति सम्मान नहीं जता रहे हैं। भाजपा के शिष्टमंडल में जब सांसद मौजूद हैं, तो कलेक्टर को कम से कम सांसद के प्रति तो सम्मान प्रकट करना चाहिए। शिष्टमंडल में शामिल पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी तो गुस्से में कलेक्टर की टेबल पर बैठ गए। भाजपाइयों के इतने हंगामे के बाद भी कलेक्टर अपनी कुर्सी पर बैठे रहे। हालांकि कलेक्टर ने किसी भी भाजपा नेता के सवालों और उत्तेजना का कोई जवाब नहीं दिया।

 

अजमेर में भी जुलूस:
5 अक्टूबर को हल्ला बोल अभियान में अजमेर में भी भाजपा कार्यकर्ताओं ने डाक बंगले से लेकर कलेक्ट्रेट तक बड़ा जुलूस निकाला। इस जुलूस में सांसद भागीरथ चौधरी, विधायक वासुदेव देवनानी, श्रीमती अनिता भदेल, शहर अध्यक्ष प्रियशील हाड़ा आदि भाजपा के नेता मौजूद रहे। जुलूस जब कलेक्ट्रेट पर पहुंचा तो भाजपा कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाज़ी की।

 

भाजपा के सांसद और विधायकों का कहना रहा कि बलात्कार के मामलों में देश में राजस्थान प्रथम स्थान पर है। लेकिन इसके बावजूद भी कांग्रेस सरकार अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही नहीं कर रही है। विधायक भदेल का कहना रहा कि अजमेर और प्रदेश में महिलाएं स्वयं को सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हैं। इसी प्रकार कांग्रेस ने भी हाथरस की घटना के विरोध में मौन सत्याग्रह किया। मसूदा के विधायक राकेश पारीक स्वयं इस मौन सत्याग्रह में उपस्थित रहे। निवर्तमान शहर अध्यक्ष विजय जैन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने मौन सत्याग्रह में भाग लिया।

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