कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की सक्रियता से एमएल लाठर बनेंगे राजस्थान के पुलिस महानिदेशक।

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  • सत्ता और संगठन का ऐसा तालमेल सचिन पायलट के अध्यक्ष रहते नहीं हो पाया।
  • लाठर 20 माह रहेंगे डीजीपी के पद पर।
  • आईएएस हेमंत गोरा को भी मिला मेहनत का ईनाम। तबादले से नाखुश आईएएस रमेश ने रिटायरमेंट मांगा।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तो यही चाहते थे कि बीएल सोनी को ही राजस्थान पुलिस महानिदेशक (प्रशासन) का पद सौंपा जाए, लेकिन प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की सक्रियता के चलते एमएल लाठर को डीजीपी बनाना पड़ रहा है। मौजूदा डीजीपी भूपेन्द्र यादव स्वैच्छिक सेवानिवृत्त के लिए आवेदन कर दिया है। यादव जब नवम्बर के शुरू में सेवा निवृत्त होंगे, तब लाठर को डीजीपी बना दिया जाएगा।

 

लाठर अभी डीजीपी क्राइम है, जबकि बीएल सोनी को 5 अक्टूबर की अधी रात को ही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) का डीजी बनाया गया है। पुलिस में डीजीपी के बाद एसीबी के डीजी का पद ही महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि अभी सोनी के डीजीपी बनने की संभावना बनी हुई है, लेकिन ये तभी होगा, जब लाठर अगले वर्ष मई में रिटायर होंगे। सोनी का रिटायरमेंट दिसम्बर 22 में हे। लाठर के बाद सोनी को चुनौती देने वाला कोई नहीं है। विगत दिनों लाठर ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के साथ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद ही भूपेन्द्र यादव ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन कर दिया। चूंकि सब काम सत्ता और संगठन के तालमेल से संभव हुआ है, इसलिए कहीं से भी विरोध की कोई गुंजाईश नहीं है। 9 माह पहल सेवानिवृत्ति लेने वाले भूपेन्द्र यादव को भी मुख्य सूचना आयुक्त बना कर खुश किया जा सकता है।

 

सत्ता और संगठन में अभी जो तालमेल चल रहा है उसका 10 प्रतिशत तालमेल भी सचिन पायलट के प्रदेश अध्यक्ष पद पर रहते देखने को नहीं मिला। हालांकि अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद डेढ़ वर्ष तक पायलट कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष रहे, लेकिन पायलट को हमेशा यही शिकायत रही कि सरकार में भागीदारी नहीं हो रही है। पायलट के रुख के चलते सीएम गहलोत भी बड़े फैसले नहीं ले पा रहे थे। पायलट के हटाए जाने के बाद सीएम गहलोत अब प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को अपने इशारों पर नचा रहे हैं। भूपेन्द्र यादव से डीजीपी के पद से 9 माह पहले स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का आवेदन करवा दिया जाता है तो डीबी गुप्ता को सेवानिवृत्ति से ढाई माह पहले मुख्य सचिव के पद से हटा दिया जाता है। इतने बड़े फैसलों के बाद भी जयपुर से लेकर दिल्ली में दस जन पथ तक कोई खलबली नहीं होती है। यह कहा जा सकता है कि अब सीएम गहलोत का प्रदेश में एक छत्र राज है। गहलोत के फैसलों पर अंगुली उठाने वालों के हाथ पहले ही काट दिए गए हैं। राजनीतिक नियुक्तियों की भी अब कोई जल्दबाजी नहीं है। बगैर नियुक्तियो के ही सरकार और संगठन का काम चल रहा है। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा ने सत्ता और संगठन का भेद ही खत्म कर दिया है। जब संगठन की सकिय्रता से डीजीपी बनाए जा रहे हैं तो एक प्रदेशाध्यक्ष को और क्या चाहिए? जिन पायलट को अपनी ही सरकार से नाराजगी रहती थी, अब उनकी भूमिका की कोई चर्चा नहीं हो रही है, जबकि डोटासरा पूरी तरह सरकार के अंग बने हुए हैं। सरकार में डोटासरा की डिजायर और सिफारिश पर तुरंत अमल होता है।

 

गेरा को मिला मेहनत का ईनाम:
5 अक्टूबर की आधी रात को ही वरिष्ठ आईएएस हेमंत गेरा को कार्मिक विभाग का सचिन बनाया गया। कुछ दिन पहले ही गेरा को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग का सचिव बनाया गया था, लेकिन जल्द ही गेरा को प्रशासन में सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले कार्मिक विभाग का सचिव बना दिया गया। असल में गेरा को यह ईनाम उनकी मेहनत का मिला है। गेरा किसी भी पद पर रहे, लेकिन उन्होंने हमेशा ही मेहनत के साथ काार्य किया।

 

कई जिलों का कलेक्टर रहने के बाद जब गेरा को अजमेर विद्युत वितरण निगम का प्रबंध निदेशक बनाया, तब भी गेरा ने मेहनत के साथ काम किया। सरकार ने अब गेरा को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है। कार्मिक सचिव के सामने इन दिनों अनेक चुनौतियाँ हैं। सचिवालय से लेकरजिला मुख्यालय तक में कर्मचारियों की कमी है तथा कोरोना काल में कर्मचारियों के वेतन कटौती की भी बड़ी समस्या है। ऐसी कटौती से राज्य कर्मचारी नाराज है। लेकिन अब कर्मचारियों के संगठनों को भी उम्मीद है कि कोई रास्ता निकल जाएगा। असल में गेरा किसी से भी संवाद करने में परहेज नहीं करते हैं। कई बार सिर्फ संवाद से ही समस्या का हल हो जाता है।

 

 

आईएएस पी रमेश ने रिटायरमेंट मांगा:
5 अक्टूबर की आधी रात को राज्य सरकार ने आईएएस अफसरों की जो तबादला सूची जारी की है, उसमें विद्युत उत्पादन निगम के सीएमडी पी रमेश का तबादला उदयपुर स्थित संभागीय आयुक्त के पद पर किया गया है। लेकिन अचानक हुए इस तबादले से दलित वर्ग के आईएएस पी रमेश खुश नहीं है। सरकार ने जिस तरीके से रमेश को हटाया, उससे उनके मन को गहरा आघात लगा है। इसलिए 6 अक्टूबर को रमेश ने मुख्य सचिव राजीव स्वरूप के सामने उपस्थित होकर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का आवेदन प्रस्तुत कर दिया है।

 

रमेश का कहना रहा कि मौजूदा हालातों में वे आईएएस की नौकरी करने में असमर्थ है। हालांकि अभी मुख्य सचिव ने आवेदन पर कोई निर्णय नहीं लिया है। लेकिन पी रमेश के नौकरी छोडऩे के निर्णय से प्रशासनिक क्षेत्र में खलबली मच गई है। रमेश 2005 बैच के आईएएस हैं। अभी उनकी सेवानिवृत्ति में 14 वर्ष बाकी हैं। 14 वर्ष पहले आईएएस जैसे पद की नौकरी छोडऩा बहुत मायने रखता है। असल में पिछले दिनों विद्युत उतपादन निगम में टेंडर प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। इस विवाद में सरकार ने जो रुख अपनाया उससे भी पी रमेश परेशान रहे।

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