तीन नवम्बर को पार्षद चुनाव का परिणाम, लेकिन मेयर का चुनाव 10 नवम्बर को होगा।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – जयपुर के 21 लाख मतदाताओं के लिए दो नगर निगम, जबकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के जोधपुर और नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल के गृह शहर कोटा में सात-सात लाख मतदाताओं पर दो-दो निगम। गहलोत और धारीवाल सिर्फ जीत चाहते हैं।
राजस्थान की जनता ने गत जुलाई अगस्त में विधायकों की खरीद-फरोख्त का आलम देखा था। खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि घोड़े के समान हमारे विधायक 35-35 लाख रुपए में बिक रहे हैं। गहलोत मंडी के विधायक बिक नहीं जाएं, इसलिए एक माह तक होटलों में बंधक बना कर रखा गया। प्रदेश की जनता को एक बार फिर ऐसा माहौल 3 नवम्बर से 10 नवम्बर के बीच देखने को मिलेगा। फर्क इतना ही है कि इस बार विधायक नहीं, पार्षद होंगे। जब पार्षद बकरे के समान इधर उधर भागेंगे तो तब मुख्यमंत्री गहलोत की बताएंगे कि मंडी में बकरे कितने लाख रुपए में बिक रहे हैं। असल में राजस्थान के जयपुर, जोधपुर और कोटा शहरों के 6 नगर निगमों के पार्षदों के चुनाव परिणाम 3 नवम्बर को आएंगे। निर्वाचित पार्षद ही मेयर का चुनाव करेंगे।
चूंकि मेयर का चुनाव 10 नवम्बर को होगा, इसलिए 6 दिनों तक पार्षदों की खरीद फरोख्त का आलम देखने को मिलेगा। जब विधायकों की कीमत 35 करोड़ तक लग सकती है, तब पार्षदों को 35 लाख रुपए में तो खरीद जा ही सकता है। घोड़ों और बकरों की कीमत आंकने में सीएम गहलोत मौजूदा समय में सबसे बड़े पारखी हैं। चूंकि गहलोत को घोड़ों को संभाल कर रखने का अच्छा अनुभव है, इसलिए बकरों को संभालने में कोई परेशानी नहीं होगी। यदि कांग्रेस का कोई बकरा ज्यादा चूंचपड़ करेगा तो उसके विरुद्ध देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर लिया जाएगा। निर्दलीय पार्षदों को भी कैसे काबू में रखा जाता है, इसकी जानकारी निर्दलीय विधायक सुरेश टांक, खुशबीर सिंह तथा ओम प्रकाश हूड़ला से ली जा सकती है। पार्षद के निर्वाचन के 6 दिन बाद मेयर का चुनाव करवाने से जाहिर है कि कौन क्या चाहता है? राज्य निर्वाचन आयोग में सरकार द्वारा नियुक्त आईएएस ही निर्वाचन अधिकारी होते हैं। जिस दल की सरकार होती है, उस दल के बाड़े में ज्यादा घोड़े बकरे भेड़ आदि होते हैं। कई बार दूसरे दल के बाड़े के घोड़े और बकरे सत्तारुढ़ दल के बाड़े में आ जाते हैं। घोड़े-बकरे प्रदेश की सीमा से बाहर न भाग जाएं, इसके लिए सीमाओं को भी सील कर दिया जाता है।
जोधपुर और कोटा में जीत ही चाहिए:
जोधपुर सीएम अशोक गहलोत और कोटा नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल का गृह शहर है। इन दोनों शहरों के चारों नगर निगमों में कांग्रेस को जीत ही चाहिए। जीत को निश्चित करने के लिए ही मात्र सात-सात लाख मतदाताओं पर दो दो नगर निगम बना दिए हैं, जबकि जयपुर में 21 लाख मतदाताओं पर दो नगर निगम हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि कांगे्रस इन दोनों शहरों में जीत के लिए कितनी लालायित है। जयपुर में 250 वार्ड है, जबकि जोधपुर में 160 तथा कोटा में मात्र 140 वार्ड हैं। जोधपुर और कोटा में वार्डों का सीमांकन ऐसा किया है कि कई वार्डों में सिर्फ कांग्रेस विचार धारा वाले वोटर ही है। यदि इन वार्डों में किसी निर्दलीय उम्मीदवार ने दम खम नहीं दिखाया तो भाजपा उम्मीदवार की तो जमानत ही जब्त हो जाएगी। कई वार्डों में बहुत कम मतदाता है। सभी 6 निगमों में 560 पार्षद चुने जाएंगे। सर्वाधिक 150 पार्षद जयपुर ग्रेटर नगर निगम में हैं।







