- नागौर नगर परिषद के आयुक्त जोधाराम विश्नोई के विरुद्ध अजमेर की संभागीय आयुक्त डॉ. आरुषि द्वारा की गई कार्यवाही का मामला।
- 18 फरवरी 2020 को ही राज्य सरकार ने दिए हैं संभागीय आयुक्त को अधिकार।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – कहा जा रहा है कि अजमेर की संभागीय आयुक्त डॉ. आरुषि मलिक ने नागौर नगर परिषद के आयुक्त जोधाराम विश्नोई के विरुद्ध जो कार्यवाही की है, उससे नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल बेहद खफा है। धारीवाल का मानना है कि संभागीय आयुक्त ने अपने अधिकारों से परे जाकर कार्यवाही की है। डॉ. मलिक की कार्यवाही पर रोक लगाने के लिए मुख्य सचिव को भी पत्र लिखा गया है। धारीवाल नहीं चाहते कि विश्नोई के विरुद्ध कोई कार्यवाही हो। यह माना कि नागौर नगर परिषद भी शांति धारीवाल के प्रभार वाले नगरीय विकास विभाग में आती है, लेकिन सवाल उठता है कि एसीबी की जांच से पहले ही धारीवाल को घबराहट क्यों हो रही है? क्या जोधाराम विश्नोई द्वारा किए कथित अनियमित कार्यों में नगरीय विकास विभाग की कोई भूमिका है?
जानकार सूत्रों के अनुसार विश्नोई के काम काज को लेकर अनेक शिकायतें मिली थी। इन शिकायतों में सरकारी भूमि के पट्टे जारी करने के आरोप भी थे। ऐसी शिकायतों पर नागौर के एडीएम से जांच करवाई गई। जांच रिपोर्ट की गंभीर को देखते हुए ही संभागीय अयुक्त डॉ. मलिक ने आयुक्त जोधाराम को नोटिस जारी किया तथा एडीएम की जांच रिपोर्ट एसीबी को जांच के लिए भेज दी। जोधाराम ने कोई गड़बडी की या नहीं, इसका पता एसीबी की जांच से ही चलेगा, लेकिन एसीबी की जांच से पहले ही मंत्री धारीवाल ने मुख्य सचिव के समक्ष मामला उठा दिया है। क्या धारीवाल नहीं चाहते थे कि नगरीय विकास के किसी भी संस्थान की जांच एसीबी करें? 
आखिर एसीबी की जांच से इतनी परेशानी क्यों? जहां तक संभागीय आयुक्तों के अधिकारों का सवाल है तो 18 फरवरी 2020 को राज्य सरकार ने ही ऐसे अधिकार दिए हैं। शासन संयुक्त सचिव सुरेश कुमार नवल द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया कि राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1958 के नियम 15 के उपनियम (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, राज्य सरकार सभी संभागीय आयुक्तों को उनके संभाग में कार्यरत क्षेत्रीय स्तर के राज्य सेवा के अधिकारियों के विरुद्ध राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1958 के नियम 17 के अधीन लघु शक्तियां (अधिकतम तीन वेतन वृद्धियां असंचयी प्रभाव से रोकने तक) अधिरोपित करने के लिए विशेष रूप से सशक्त करती है। संभागीय आयुक्त के दंडादेश के विरुद्ध नियम 23 में निर्दिष्ट प्राधिकारी के समक्ष अपील प्रस्तुत की जाएगी। इस अधिसूचना से जाहिर होता है कि अजमेर की संभागीय आयुक्त डॉ. आरुषि मलिक ने जोधाराम विश्नोई के प्रकरण में जो भी कार्यवाही की है, वह सरकार के दिशा निर्देशों के अनुरूप ही है। शायद शांति धारीवाल को अपनी ही सरकार के आदेशों की जानकारी नहीं है। जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भ्रष्टाचार मिटाने का संकल्प कर रहे हैं तो धारीवाल को एसीबी की जांच पर ऐतराज क्यों हैं?







