मध्यप्रदेश का उपचुनाव धर्म और अधर्म के बीच है।
शिवराज ने पीछे के दरवाजे से सत्ता हथियायी है। दाढ़ी भी चर्चा का विषय।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत भले ही कांग्रेस के युवा नेता सचिन पायलट के बारे में अच्छी राय नहीं रखते हो, लेकिन मध्यप्रदेश में 28 विधानसभा सीटों पर हो रहे उपचुनावों में पायलट गजब का आत्म विश्वास दिखा रहे हैं। पायलट इन दिनों मध्यप्रदेश में चुनावी सभाओं को संबोधित कर रहे हैं। जौरा, डबरा आदि क्षेत्रों में सभाओं को संबोधित करते हुए पायलट ने कहा कि मध्यप्रदेश के ये उपचुनाव धर्म और अधर्म के बीच हो रहा है।
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को हरा दिया था, लेकिन शिवराज सिंह चौहान ने पीछे के दरवाजे से सत्ता हथिया ली। पायलट ने कहा कि राजस्थान में कार्यकर्ताओं के दम पर ही कांग्रेस की सरकार बनी है। मैं अपनी बात स्पष्ट तौर पर कहने में कभी पीछे नहीं रहता। मेरी स्पष्टवादिता से मेरे मित्र भी खुश नहीं है। मुझे राजनीति करते हुए तीस वर्ष हो गए हैं। लेकिन इन दिनों राजनीति में बहुत कुछ गंदा हो रहा है। मेरे दादा फौज में हवलदार थे और पिता वायुसेना में पायलट। मैंने कभी भी गलत बात को स्वीकार नहीं किया। एक चुनावी सभा में लोगों ने पायलट से आग्रह किया कि वे मास्क हटा कर भाषण दें।
पहले तो पायलट ने इंकार कर दिया, लेकिन बाद में लोगों के आग्रह को देखते हुए पायलट ने मास्क हटा दिया। मास्क हटाते ही पायलट ने कहा कि पिछले कई दिनों से हजामत नहीं की है। लोगों के जहन में पायलट का चेहरा क्लीनशेव वाला ही रहता है, लेकिन उपचुनावों में पायलट की दाढ़ी बढ़ी हुई है। चुनाव में पायलट की बढ़ी दाढ़ी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। पायलट राजस्थान में राजनीति करते हैं। राजस्थान में भी इन दिनों स्थानीय निकायों और पंचायतीराज के चुनाव हो रहे हैं, लेकिन इन चुनावों में पायलट की कोई भूमिका देखने को नहीं मिल रही है।
मौजूदा समय में राजस्थान में सत्ता और संगठन में भी पायलट का कोई प्रभाव नहीं है। पायलट से प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और डिप्टी सीएम का पद भी छीना जा चुका है। पायलट ने अपने लेटहैड पर विधायक पद का भी उल्लेख नहीं करते हैं। पायलट का सीएम अशोक गहलोत से भी कोई संवाद नहीं हो रहा है। पायलट राजस्थान की राजनीति में अलग थलग है, लेकिन पायलट मध्यप्रदेश में जबर्दस्त आत्म विश्वास दिखा रहे हैं। सब जानते हैं कि गत 10 जुलाई को जब पायलट कांग्रेस के 18 विधायकों को लेकर दिल्ली चले गए थे, तब सीएम गहलोत ने पायलट को गद्दार, धोखेबाज और नकारा तक कहा था, गहलोत ने अभी तक भी अपने इन शब्दों पर खेद प्रकट नहीं किया है, लेकिन पायलट कांग्रेस के प्रति वफादारी दिखाने में फिलहाल कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। यह बात अलग है कि 27 अक्टूबर को ग्वालियर एयरपोर्ट पर पायलट की मुलाकात भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी हुई थी।







