- एक ही सर्किल में इतने लम्बे समय तक पुलिस की नौकरी करना मायने रखता है।
- ऐसे पुलिस मैन कम ही मिलते हैं।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – कोई 34 साल पहले 1986 में बीकानेर के मेरे पत्रकार साथी दिलीप सिंह भाटी ने फोन कर कहा कि मेरे छोटे भाई सुरेन्द्र सिंह भाटी सब इंस्पेक्टर के पद पर अजमेर में नियुक्त हुए है। थोड़ा ख्याल रखना। भाई दिलीप के फोन के बाद मेरी मुलाकात सुरेन्द्र भाटी से हुई। तब से आज तक भाटी से आत्मीय संबंध बने हुए हैं। मैं तो खैर अजमेर में ही रहा, लेकिन सुरेन्द्र भाटी ने भी अधिकांश नौकरी अजमेर में ही की।
भाटी के लिए यह गर्व की बात है कि जिस शहर में वे सब इंस्पेक्टर बन कर आए थे, उसी शहर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद से रिटायर हो रहे हैं। यूं तो भाटी का रिटायरमेंट 31 अक्टूबर को है, लेकिन 30 व 31 अक्टूबर को अवकाश होने की वजह से 29 अक्टूबर को ही कार्य का अंतिम दिवस रहा। राजस्थान लोक सेवा आयोग से 1983 में भाटी का चयन सब इंस्पेक्टर के पद पर हुआ था। भाटी ने अपनी मेहनत और कार्यकुशलता के कारण अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद तक पदोन्नती पाई।
इसे भाटी का सद्व्यवहार ही कहा जाएगा कि इंस्पेक्टर बनने के बाद अजमेर शहर के अधिकांश थानों पर तैनात रहे। दक्षिण क्षेत्र के जिन थानों पर थानेदारी की उसी सर्किल के डीएसपी भी बने। अजमेर में ही सीआईडी जोन के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भी रहे। लगातार लम्बे समय तक एक ही शहर में नौकरी करने के बाद भी भाटी ने कभी भी किसी को शिकायत का मौका नहीं दिया। सब इंस्पेक्टर, इंस्पेक्टर, पुलिस उपअधीक्षक और आखिर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रहने से अंदाजा लगाया जा सकता है कि भाटी की अजमेर में कितनी लोकप्रियता होगी।
भाटी कभी विवाद में भी नहीं आए। बीकानेर से नौकरी करने अजमेर आए तो फिर अजमेर के ही बन कर रह गए। पुलिस में एक ही स्थान पर लगातार नौकरी करना कोई आसान काम नहीं है। लेकिन भाटी ने अपने स सरल और मधुर व्यवहार से कठिन काम को आसानी से किया। रिटायरमेंट के अंतिम दिनों में भी भाटी को सलेक्शन ग्रेड का लाभ मिला है। अजमेर के जिला पुलिस अधीक्षक कुंवर राष्ट्रदीप ने भी भाटी की कार्यकुशलता और व्यवहार की प्रशंसा की है। मोबाइल नम्बर 9079625336 पर सुरेन्द्र भाटी को सेवानिवृत्ति पर बधाई दी जा सकती है।







