तो कांग्रेस के चीफ वर्कर के तौर पर काम करेंगे निरंजन आर्य।

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  • आखिर क्या हो गया है राजस्थान के आईएएस और आईपीएस को?
  • मंत्री शांति धारीवाल की नाराजगी के बाद आरुषि मलिक को भी अजमेर के संभागीय आयुक्त के पद से हटाया।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – 30 अक्टूबर को जोधपुर से प्रकाशित प्रमुख अखबारों में प्रकाशित हुआ है। इस विज्ञापन में पाली जिले के सोजत विधानसभा क्षेत्र के इंजीनियरों, सरपंचों, कांग्रेस के नेताओं आदि श्रीमती संगीता आर्य को राजस्थान लोक सेवा आयोग का सदस्य बनने पर बधाई दी है। इस विज्ञापन में बीच संगीता आर्य का फोटो है, तो एक तरफ राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का तो दूसरी तरफ अतिरिक्त मुख्य सचिव निरंजन आर्य। विज्ञापन में कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासारा का फोटो भी है। सब जानते हैं कि संगीता आर्य ने वर्ष 2013 में सोजत से ही कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। यह भी सही है कि राजस्थान लोक सेवा आयोग एक संवैधानिक संस्था है और आयोग के सदस्य सरकारी नौकरियां देने का काम करते हैं।

 

लेकिन प्रकाशित विज्ञापन में बताता है कि संवैधानिक संस्था में राजनीति की घाल घुसेड़ कैसी है। इसी कड़ी में एक नवम्बर को तड़के अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने निरंजन आर्य को प्रदेश का मुख्य सचिव बना दिया। निरंजन आर्य ही संगीता आर्य के पति हैं। 30 अक्टूबर को प्रकाशित विज्ञापन को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि मुख्य सचिव के तौर पर निरंजन आर्य कैसी भूमिका निभाएंगे। वैसे भी सीएम गहलोत को मुख्य सचिव के रूप में कांग्रेस का चीफ वर्कर चाहिए। सीएम के पैमाने पर निरंजन आर्य खरे उतरते हैं।

 

 

इसीलिए आईएएस की वरिष्ठा को लांघ कर आर्य को मुख्य सचिव बनाया गया है। अब प्रदेश के मुख्य सचिव और कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष में कोई फर्क नहीं है। कहा जा सकता है कि गहलोत ने प्रशासनिक तंत्र और संगठन पर अपना नियंत्रण कर लिया है। जब मुख्य सचिव का फोटो मुख्यमंत्री के बराबर छप सकता है तो दोनों के बीच संबंधों का अंदाजा लगाया जा सकता है। हो सकता है कि जनवरी 2022 में मुख्य सचिव के पद से रिटायर होने के बाद 2023 के विधानसभा में निरंजन आर्य सोजत से कांग्रेस के उम्मीदवार हों। पत्नी संगीता आर्य के पास तो आयोग में 6 वर्षों का जुगाड़ हो ही गया है।

 

 

सोजत विधानसभा क्षेत्र के विकास में अब कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। निरंजन आर्य की जिस तरह मुख्य सचिव के पद पर नियुक्ति हुई है, उससे सवाल उठता है कि आखिर राजस्थान के आईएएस और आईपीएस अफसरों को क्या हो गया है? आईएएस की वरिष्ठता को नजर अंदाज कर मुख्य सचिव का चयन होने के बाद भी प्रशासनिक तंत्र में कोई हलचल नहीं है। उल्टे सीनियर आईएएस चुपचाप सचिवालय से बाहर निकल गए हैं। असल में आईएएस भी बहती गंगा में डुबकी लगाने से नहीं चूक रहे है। मुख्य सचिव की प्रबल दावेदार श्रीमती वीनू गुप्ता के पति डीबी गुप्ता को प्रदेश का मुख्य सूचना आयुक्त बनाया जा रहा है। आने वाले दिनों में पता चलेगा कि किस आईएएस को कौन सा टुकड़ा मिलेगा। हो सकता है की क्रीम वाला टोस और किसी को बिना क्रीम वाला टोस मिले।

मलिक की भी रवानगी:
सरकार ने निरंजन आर्य को मुख्य सचिव बनाए जाने के साथ ही 21 आईएएस तबादले भी किए हैं। इसके अंतर्गत अजमेर की संभागीय आयुक्त डॉ. आरुषि मलिक का तबादला जयपुर स्थित पशु पालन विभाग में विशिष्ट सचिव के पद पर किया गया है। डॉ. मलिक की नियुक्ति चार माह पहले ही की गई थी। लेकिन हाल ही में नागौर नगर परिषद के आयुक्त जोधाराम विश्नोई के विरुद्ध हुई कार्यवाही को लेकर नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल ने नाराजगी प्रकट की थी।

धारीवाल की नाराजगी सामने आने के बाद ही यह तय हो गया था कि अब डॉ. मलिक को संभागीय आयुक्त के पद से हटने पड़ेगा। मुश्किल से एक सप्ताह में डॉ. मलिक को संभागीय आयुक्त के पद से हटा दिया गया। इस मामले से जाहिर है कि यदि मंत्री की किसी अधिकारी से नाराज होता है, तो अधिकारी को खामियाजा भुगतना पड़ता है। यहां यह उल्लेखनीय है कि डॉ. मलिक ने प्रशासनिक जांच कराए जाने के बाद ही आयुक्त विश्नोई को कारण बताओ नोटिस दिया था। लेकिन धारीवाल को यह पसंद नहीं आया कि उनके महकमे के किसी अधिकारी को कोई कलेक्टर या संभागीय आयुक्त नोटिस दे।

जिस तरह से डॉ. मलिक को मात्र चार माह में संभागीय आयुक्त के पद से हटाया गया उससे यह जाहिर होता है कि प्रदेश के नगरीय विकास महकमे में सिर्फ मंत्री धारीवाल की ही चलेगी। यदि कोर्ईं संभागीय आयुक्त और कलेक्टर कार्यवाही करेगा तो उसे अपने पद से हटना पड़ेगा।

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