- 8 जिलों में रासूका, 29 कंपनियां तैनात तथा इंटरनेट सेवाएं बंद।
- पुत्र विजय बैंसला को नेता बनाने के लिए कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला आंदोलन करवा रहे हैं-हिम्मत सिंह।
- मेरे पिता 85 वर्ष के हैं, उनकी पीठ में दर्द है, मैं पिता का काम कर रहा हंू। इसमें गलत क्या है-विजय बैंसला।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – राजस्थान में गहलोत सरकार के मंत्री रघु शर्मा और अशोक चांदना का दावा है कि गुर्जर समुदाय की मांगों को लेकर गुर्जर नेता हिम्मत सिंह और उनके साथियों से समझौता हो गया है। इसलिए अब भरतपुर के बयाना में गुर्जरों को आरक्षण को लेकर कोई आंदोलन नहीं करना चाहिए। सवाल उठता है कि जब गुर्जरों से समझौता हो गया है तो फिर गुर्जर बाहुल्य 8 जिलों में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून क्यों प्रभावी किया गया है।
क्यों सशस्त्र पुलिस बल की 29 कंपनियां तैनात की गई है। क्यों पिछले तीन दिन से 8 जिलों में इंटरनेट सेवाएं बंद हैं। सब जानते हैं कि इंटरनेट सेवाएं बंद होने से आम लोग कितने परेशान होते हैं। क्या सरकार बेवजह लोगों को परेशान कर रही है?असल में गुर्जर समुदाय के जिन लोगों से सरकार ने समझौता किया है, उनकी पकड़ गुर्जरों में कम देखने को मिलती है। आंदोलन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो जाए इसी उद्देश्य को लेकर सरकार की ओर से समझौते का दावा किया जा रहा है।
सरकार की कोशिशों के बाद भी एक नवम्बर को दौसा के पीलूपुरा में बड़ी संख्या में गुर्जर समुदाय के लोग एकत्रित हुए और अपनी निष्ठा गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला में प्रकट की। एकत्रित हुए गुर्जरों का कहना रहा कि हिम्मत सिंह गुर्जर का आंदोलन से कोई सरोकार नहीं है और न ही कर्नल बैंसला ने हिम्मत सिंह और उनके साथियों को सरकार से समझौता करने के लिए भेजा था। जब कर्नल बैंसला के नेतृत्व में गुर्जर समुदाय धरना प्रदर्शन कर रहा है, तब कोई एक या दो नेता सरकार से समझौता कर ले, तो उसका कोई फर्क पडऩे वाला नहीं है।
एक नवम्बर को बयाना क्षेत्र में जुटे गुर्जर समुदाय के प्रतिनिधि और कर्नल बैंसला के पुत्र विजय बैंसला ने कहा कि समझौते के नाम पर सरकार बेवजह भ्रम की स्थिति फैला रही है। उन्होंने कहा कि गत वर्ष चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने भी उस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जो हमारी संघर्ष समिति के साथ हुआ था। अब हम चाहते हैं कि रघु शर्मा अपने उसी समझौते की क्रियान्विति करवाएं। असल में सरकार ने वायदा खिलाफी की है। गत वर्ष जो समझौता हुआ, उस पर अभी तक भी अमल नहीं हुआ है। आंदोलन में जो गुर्जर शहीद हुए उनकी विधवाओं को अब सफाई कर्मचारी की नौकरी देने का प्रस्ताव किया जा रहा है। यह प्रस्ताव गुर्जर समुदाय की भावनाओं के विरुद्ध है। हम लगातार मांग कर रहे हैं कि पूर्व में जो भर्तीयां निकाली गई उनमें गुर्जर समुदाय को पांच प्रतिशत आरक्षण नहीं दिया। ऐसी सभी भर्तियों का हिसाब लगाकर नई भर्तियों में आरक्षण दिया जाए। सरकार ऐसे सभी मुद्दों से ध्यान भटकाना चाहती है। जो काम राज्य सरकार कर सकती है, वह भी नहीं किया जा रहा है। गुर्जर समुदाय इस बार आरपार की लड़ाई करने को तैयार है।
बेटे को नेता बनाना चाहते हैं बैंसला:
31 अक्टूबर को सरकार से समझौता करने वाले गुर्जर नेता हिम्मत सिंह का कहना है कि कर्नल किरोड़ी ङ्क्षसह बैंसला अपने पुत्र विजय बैंसला को नेता बनाना चाहते हैं,इसलिए गुर्जरों का आंदोलन करवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब सरकार से समझौता हो गया है तो फिर गुर्जरों को आंदोलन करने की कोई जरुरत नहीं है। हिम्मत सिंह का कहना रहा कि 31 अक्टूबर को मंत्री रघु शर्मा और अशोक चांदना ने गुर्जर समुदाय की मांगों पर गंभीरता दिखाई है। सरकार का रुख सकारात्मक है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कर्नल बैंसला के आंदोलन के पीछे भाजपा खड़ी है।
पिता का काम कर रहा हंू-विजय बैंसला:
वहीं विजय बैंसला ने कहा कि उनके पिता कर्नल बैंसला की उम्र 85 वर्ष की है। उनके पिता की पीठ में दर्द भी है, लेकिन कर्नल बैंसला तो अपने समुदाय की चिंता की है। इसीलिए कर्नल बैंसला बार बार सरकार के समक्ष मांगों को रखते हैं। अब जब उनके पिता का स्वास्थ्य ठीक नहीं है तो वे पिता का काम ही कर रहे हैं। इसमें क्या गलत है? हिम्मत सिंह बताए कि क्या कोई पुत्र अपने पिता का काम न करें? बैंसला ने कहा कि वे लम्बे समय से पिता के सहयोगी बने हुए हैं। अपने पिता की तरह ही वे भी गुर्जर समुदाय के साथ खड़े हैं।







