- रिश्वत की राशि कहां तक पहुंच रही थी, अब इसका पता लगाया जाएगा-बीएल सोनी डीजी एसीबी।
- राजस्थान में सीबीआई की आकस्मिक जांच पड़ताल पर रोक लगी हुई है।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – राजस्थान के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की एक टीम ने 6 नवम्बर को केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अधीन आने वाले ट्रांसपोर्ट और रोड मंत्रालय के जयपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय के टेक्नीकल ऑफिसर एसआर वर्मा और एक्सईएन धनसिंह मीणा को पचास हजार रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। अभी तक इन दोनों अधिकारियों के पास 50 लाख रुपए की नकद राशि बरामद की जा चुकी है। एसीबी के डीजी बीएल सोनी ने बताया कि एक पेट्रोल पंप की एनओसी देने के मामले में 50 हजार रुपए की रिश्वत ली जा रही थी, तभी रंगे हाथों पकड़ा है।
रिश्वत की राशि संबंधित विभाग में कितनी ऊपरी तक जा रही थी, अब इसकी जांच की जाएगी। एसीबी की इस कार्यवाही से नितिन गडकरी वाले मंत्रालय में खलबली मच गई है। राजस्थान में केन्द्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारी लगातार एसीबी के निशाने पर हैं। पिछले दिनों सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एजीजी स्तर के अधिकार पवन गोयल को दिल्ली में रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो सीधे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अधीन है, क्योंकि गृह विभाग का प्रभार भी सीएम गहलोत के पास ही है।
हालांकि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्यवाही होनी ही चाहिए, लेकिन यह भी सच है कि राजस्थान में अशोक गहलोत की सरकार ने केन्द्र सरकार के अधीन काम करने वाली सीबीआई की आकस्मिक जांच पड़ताल पर रोक लगा रखी है। यानि अब सीबीआई को राजस्थान में किसी भ्रष्टाचरी को पकडऩे से पहले अशोक गहलोत के गृह विभाग से मंजूरी लेनी होगी। सीबीआई राजस्थान में अपने स्तर पर कोई कार्यवाही नहीं कर सकती है। आमतौर पर केन्द्रीय कर्मचारियों के भ्रष्टाचार पर सीबीआई ही कार्यवाही करती है, लेकिन बदली हुई परिस्थितियों में केन्द्रीय कर्मचारियों पर राजस्थान की एसीबी लगातार कार्यवाही कर रही है।
गंभीर बात तो यह है कि भ्रष्ट कार्मिक फिर भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। पेट्रोल पंप के संचालन के लिए सिर्फ केन्द्रीय ट्रांसपोर्ट एवं रोड मंत्रालय से ही एनओसी नहीं ली जाती, बल्कि राजस्थान सरकार के विभिन्न विभागों से भी एनओसी लेनी पड़ती है। पंप मालिक को जिस तरीके से केन्द्रीय मंत्रालय से एनओसी लेनी होती है, उसी तरीके से राजस्थान के विभागों से भी लेनी पड़ती है। चूंकि अभी एसीबी के निशाने पर केन्द्र सरकार के अधिकारी ही हैं, इसलिए ज्यादा कार्यवाही उन्हीं के खिलाफ हो रही है। यूं तो राजस्थान में एसीबी पटवारी, पुलिस के सब इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों तथा विभागों के कर्मचारियों को आए दिन पकड़ती है, लेकिन केन्द्र सरकार के बड़े अधिकारी एसीबी के शिकंजे में लगातार फंस रहे हैं।







