- तो जेएनयू टुकड़े-टुकड़े गैंग का अड्डा ही बना रहेगा।
- कैम्पस में लगे मोदी गो बैक के पोस्टर।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – 12 नवम्बर की शाम को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के कैम्पस में स्वामी विवेकानंद की 11 फिट ऊंची प्रतिमा का अनावरण कर रहे हैं। पीएम मोदी प्रतिमा का अनावरण वीडियो कॉन्फ्रेंस से करेंगे। लेकिन राष्ट्र विरोधी ताकते प्रतिमा के अनावरण के मौके पर भी माहौल खराब करने में लगी हुई है। कैम्पस में मोदी गो बैक के पोस्टर चिपका दिए हैं। ऐसे तत्व में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का भी विरोध कर रहे हैं।
सवाल उठता है कि जेएनयू के कैम्पस में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का विरोध क्यों किया जा रहा है? देश के राष्ट्र नायकों की प्रतिमा लाने का उद्देश्य यही होता है कि युवा पीढ़ी प्रेरणा ले। सब जानते हैं कि 1893 में अमरीका के शिकागो में हुई विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद ने भारत का प्रतिनिधित्व किया था। तब उन्होंने भारत की सनातन संस्कृति से पूरे विश्व को अवगत करवाया। विवेकानंद ने 117 साल पहले जिस प्रभावी तरीके से हमारी सनातन संस्कृति के बारे में दुनिया को समझाया, उसका असर आज भी है। अब यदि ऐसे महान भारतीय की प्रतिमा जेएनयू कैम्पस में लगाई गई है तो विरोध क्यों हो रहा है? यह भी सब जानते हैं कि जेएनयू में एक खास विचारधारा को पनपाया जा रहा है। जिस विचारधारा के लोग ही कैम्पस में भारत तेरे टुकड़े होंगे जैसे देश विरोधी नारे लगाते हैं। कई बार तो ऐसे तत्व पूरी यूनिवर्सिटी को ही बंधक बना लेते हैं। स्वभाविक हैं कि जो तत्व देश के टुकड़े करना चाहते हैं उन्हें स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पसंद नहीं आए।
स्वामी विवेकानंद तो भारत की एकता और अखंडता के पक्षधर रहे। 117 साल पहले विवेकानंद द्वारा दिया गया भाषण आज भी प्रासंगिक है। 12 नवम्बर को जिस तरह देश के प्रधानमंत्री को लेकर गो बैक के पोस्ट लगाए गए है उससे प्रतीत होता है कि जेएनयू का कैम्पस टुकड़े टुकड़े गैंग का अड्डा ही बना रहना चाहता है। हालांकि बदली हुई परिस्थितियों में देश विरोधी ताकतों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही हो रही है, लेकिन फिर भी और सख्त कार्यवाही किए जाने की जरुरत है। विचारों की अभिव्यक्ति का यह मतलब नहीं है कि आप हमारे राजनायको का भी विरोध करें। जेएनयू के कैम्पस को स्वामी विवेकानंद के विचारों के अनुकूल बनाने की जरुरत है।







