लक्ष्मी-गणेश जी का पाना तो खरीद कर ही पूजा करें। बहुत से गरीब लोगों का रोज़गार जुड़ा है।

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अखबार में मुफ्त में मिले पाने की किसी ज़रूरतमंद को दें।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – जो लोक अपने घरों पर अखबार मंगाते हैं उन्हें 13 नवम्बर को अखबार के साथ लक्ष्मी-गणेश जी का पाना (रंगीन चित्र) भी मुफ्त में मिला है। इस पाने को छपवाने और अखबार मालिकों को पैसे देकर बंटवाने वाली कंपनी का विज्ञापन भी है। यानि जिन को पैसा कमाना था उन्होंने तो अपना मकसद पूरा कर लिया, लेकिन सवाल उठता है कि मुफ्त में मिले पाने से क्या हमें लक्ष्मी गणेश की पूजा करनी चाहिए? दीपावली के मौके पर लक्ष्मी गणेश जी पूजा का बहुत महत्व है। जब गणेश और लक्ष्मीजी से शुभ शांति और समृद्धि की अपेक्षा रखते हैं, तब क्या हमें मुफ्त के पाने से पूजा करनी चाहिए? बाजार में लक्ष्मी-गणेश का चित्र मुश्किल से पांच रुपए में मिल जाएगा। क्या हम पांच रुपए भी खर्च नहीं कर सकते हैं? अखबार वालों का तो अपना करोड़ों का कारोबार है, इसलिए उनकी बात करना बेमानी है, लेकिन उन गरीबों की बात करना जरूरी है, जो बाजारों में टोकरी लेकर लक्ष्मी गणेश जी के चित्र (पाने) बेचते हैं।

 

राजस्थान में दैनिक भास्कर और राजस्थान पत्रिका अखबार के मालिक 17 लाख प्रतियां प्रतिदिन बेचने का दावा करते हैं। यानि प्रदेश में 32 लाख परिवारों में अखबारों के साथ लक्ष्मीजी और गणेशजी के चित्र मुफ्त में प्राप्त हुए है। अब यदि 32 लाख घरों में पाना नहीं खरीदा जाएगा तो बाजार में टोकरी में पाने बेचने वाले गरीबों का क्या होगा? अच्छा हो कि जिन पाठकों को अखबार के साथ जो पाना मिला है उसे किसी जरुरतमंद को दे दिया जाए और वे स्वयं बाजार से लक्ष्मीजी गणेशजी का चित्र खरीद कर ही दीपावली का पूजन करें।

 

अखबार वाले पाने को जब यदि सफाईकर्मी घर में झाडू पौंछा लगाने वाले महिला, घोबी आदि को देंगे तो उन्हें ज्यादा खुशी मिलेगी। ऐसे बहुत से लोग हैं जो अखबार नहीं मंगा सकते। दीपावली की पूजा 14 नवम्बर की शाम को है। मेरा यह ब्लॉग पढऩे के बाद आपको सोचने के लिए 30 घंटे मिलेंगे। भले ही मेरो यह विचार कुछ लोगों को छोटा लगे, लेकिन इसके मायने गहरे हैं। मैं यह भी उम्मीद करता हंू कि मेरे फेसबुक पेज www.facebook.com/SPMittalblog पर आप अपने विचार भी व्यक्त करें।

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