दरगाह में झंडे की रस्म में उमड़ी भीड़ से अजमेर प्रशासन सबक ले ले।

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  • ख्वाजा साहब का सालाना उर्स चाँद दिखने पर 12 फरवरी से शुरू होगा।
  • जायरीन के लिए ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य।

अजमेर (एस.पी.मित्तल) – सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का छह दिवसीय सालाना उर्स अजमेर में चाँद दिखने पर 12 फरवरी से शुरू होगा। चूंकि इस बार कोरोना काल में उर्स भर रहा है,इसलिए सरकार और प्रशासन ने गाइड लाइन जारी की है। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद अनुमति मिलने पर जायरीन दरगाह में जियारत कर सकेगा।

ऑनलाइन अनुमति लेने के लिए जायरीन को अपनी कोरोना टेस्ट रिपोर्ट भी अप लोड करनी होगी। रजिस्ट्रेशन के लिए प्रशासन ने वेबसाइट भी जारी की है। अजमेर का जो प्रशासन गाइड लाइन की पालना करवाने की बात कह रहा है उसे 8 फरवरी को दरगाह में झंडे की रस्म में उमड़ी भीड़ से सबक ले लेना चाहिए। उर्स शुरू होने से पहले दरगाह के बुलंद दरवाज़े पर झंडा फहराने की परंपरा है। झंडे की रस्म में आसपास के लोग और खादिम समुदाय बड़ी संख्या में उपस्थित रहता है।

8 फरवरी को जब झंडे की रस्म हुई तो ख्वाजा साहब की दरगाह खचाखच भरी हुई थी। किसी भी स्तर पर सोशल डिस्टेसिंग के नियमों की पालना नहीं हुई। अधिकांश लोगों ने मास्क भी नहीं लगाया। झंडे की रस्म में तो स्थानीय लोग ही शामिल हुए, लेकिन जब उर्स के छह दिनों में देशभर से जायरीन आएंगे तो हालातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। क्या इतनी भीड़ में ऑनलाइन अनुमति की जांच पड़ताल हो सकती है? उर्स के दौरान बड़ी संख्या में जायरीन ख्वाजा साहब की मजार पर जियारत करते हैं। छह दिवसीय उर्स के दौरान आने वाले शुक्रवार की नमाज में तो लाखों जायरीन अजमेर आते हैं। इसी प्रकार कुल की रस्म में भी जायरीन की संख्या अधिक होती है। हालांकि सुरक्षा इंतज़ामों के लिए अतिरिक्त फोर्स तैनात की गई है, लेकिन उर्स के दौरान प्रशासन के इंतजाम कई मौकों पर धरे रह जाते हैं। देखना होगा कि प्रशासन उर्स में करोनो गाइड लाइन की पालना कैसे करवाता है?

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