गहलोत साहब! प्रशासन गांवों और शहरों के संग में पट्टे जारी नहीं होने की जिम्मेदारी आईएएस कुंजीलाल मीणा और भवानी सिंह देथा के साथ सरकार के दिशा निर्देश और हाईकोर्ट के आदेशों की भी है।

  • इन दोनों आईएएस का तो दोष है कि हकीकत बताने के बजाए आपकी मिजाजपुर्सी में लगे रहते हैं।
  • आखिर किस आईएएस ने ले रखी है किशनगढ़ नगर परिषद की 26 लाख रुपए वाली इनोवा कार?

अजमेर (एस.पी.मित्तल) : 21 अक्टूबर को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सरकार के प्रशासन गांव और शहरों के संग अभियान की समीक्षा की। इस समीक्षा बैठक में अभियान में सरकार की मंशा के अनुरूप गरीबों को मकानों के पट्टे जारी नहीं होने पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई।

गहलोत ने नगरीय विकास विभाग के प्रमुख शासन सचिव कुंजीलाल मीणा और स्वायत्त शासन विभाग के सचिव भवानी सिंह देथा का नाम लेकर कहा कि इन अफसरों ने सरकार के अभियान का मजाक बना रखा है। यह सही है कि सरकार की योजनाओं की क्रियान्विति अफसरशाही करती है। अशोक गहलोत जब विपक्ष में होते हैं तो आरोप लगाते हैं कि सरकारी दफ्तरों में रिश्वत के बगैर कोई काम नहीं होता है। ऐसे में गहलोत को अच्छी तरह पता है कि सरकारी दफ्तरों में कैसे काम होता है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या पट्टे जारी नहीं होने के लिए आईएस मीणा और देथा ही दोषी हैं?

सरकार ने अखबारों में बड़े बड़े विज्ञापन देकर आम लोगों को बताया कि कब्जाशुदा भूमि के पट्टे कितनी सरलता से जारी हो सकते हैं, लेकिन इन दिशा निर्देशों में यह भी लिखा गया कि योजना क्षेत्रों में पट्टे जारी नहीं हो सकेंगे। इस एक लाइन से हजारों कब्जाधारी पट्टों से वंचित हो गए हैं। सरकार की इस लाइन के निर्देश को अजमेर के संदर्भ में समझा जा सकता है। अजमेर विकास प्राधिकरण के दायरे में 116 गांव की भूमि शामिल की गई है। सरकार के निर्देशों के मुताबिक प्राधिकरण की योजना क्षेत्र में पट्टे जारी नहीं हो सकते हैं। जबकि अधिकांश कब्जाधारी योजना क्षेत्र के ही है। ऐसी ही स्थिति जयपुर, जोधपुर आदि विकास प्राधिकरण की है

इसी प्रकार एक जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि शहरी क्षेत्र में जोनल प्लान बनाकर भूमि का नियमन किया जाए। प्रदेश के किसी भी शहर में जोनल प्लान स्वीकृत नहीं है, ऐसे में शहरी क्षेत्र में भी कब्जाधारियों को पट्टे जारी नहीं हो सकते हैं। आईपीएस कुंजीलाल मीणा और भवानी सिंह देथा का दोष यही है कि ये मुख्यमंत्री गहलोत को हकीकत बताने के बजाए मिजाजपुर्सी में लगे रहते हैं। गत दो अक्टूबर को जब प्रशासन शहरों और गांवों के संग अभियान के शुभारंभ समारोह की कुंजीलाल मीणा ने जो तुकबंदी की वह मुख्यमंत्री गहलोत की मिजाजपुर्सी की पराकाष्ठा थी। लेकिन तब गहलोत ने मीणा को नहीं टोका। मीणा इससे पहले कई मौकों पर ऐसी मिजाजपुर्सी कर चुके हैं।

मीणा और देथा को तो यही लगता था कि गहलोत को मिजाजपुर्सी पसंद हैं, लेकिन अब जब सीएम गहलोत मिजाजपुर्सी को दरकिनार कर अभियान की प्रगति के बारे में सार्वजनिक तौर पर सवाल कर रहे हैं तो ये दोनों आईएएस भी हकीकत बता देंगे। अच्छा होता कि सीएम गहलोत पहले दिन ही मिजाजपुर्सी करने वाले अफसरों को रोक देते। सीएम गहलोत को यदि अभियान को सफल बनाना है तो सरकार के दिशा निर्देशों और हाईकोर्ट के आदेश की समीक्षा करनी होगी। आखिर मीणा और देथा ने आईएएस का प्रशिक्षण लिया है। किसी मुख्यमंत्री के कहने से अपनी गर्दन नहीं कटवाएंगे। गलत काम करने पर जवाबदेही तो अफसरशाही की ही होगी। गहलोत बताएं कि जब सरकार ने योजना क्षेत्र में कब्जों का नियमन करने पर रोक लगा रखी है, तब पट्टे कैसे जारी हो सकते हैं?

26 लाख की इनोवा किस आईएएस के पास है?:
सीएम गहलोत ने जब सार्वजनिक तौर पर आईएएस कुंजीलाल मीणा और भवानी सिंह देथा को फटकार लगा ही दी है तो यह भी पता लगाना चाहिए कि अजमेर की किशनगढ़ नगर परिषद द्वारा खरीदी गई 26 लाख रुपए की इनोवा कार किस आईएएस के पास है? पिछले दिनों किशनगढ़ नगर परिषद ने एक साथ दो इनोवा कार खरीदी। एक कार सभापति दिनेश राठौड़ की शोभा बढ़ा रही है तो दूसरी स्वायत्त शासन विभाग में भिजवा दी है।

पहले आर्थिक तंगी बता कर एक कार भी खरीदने की अनुमति सरकार की ओर से नहीं दी जा रही थी, लेकिन जब एक काम सरकार के एक आईएएस की सेवा में खडी रखने का लालच दिया गया तो किशनगढ़ नगर परिषद को दो इनोवा कार खरीदने की अनुमति दे दी गई। जिस नगर परिषद के पास डेंगू मच्छर मारने वाली फोङ्क्षगग मशीन खरीदने के पैसे नहीं है उस परिषद ने 52 लाख रुपए में दो इनोवा कार खरीद ली। परिषद ने अपने वादे के मुताबिक 26 लाख रुपए वाली एक इनोवा स्वायत्त शासन विभाग में भिजवा दी। सीएम गहलोत को अब यह पता करना है कि किशनगढ़ की जनता के पैसे से खरीदी गई कार का उपयोग कौन सा आईएएस कर रहा है? क्या जयपुर में कार्यरत आईएएस अधिकारियों के पास सरकार की कार नहीं है? यह भी जांच का विषय है कि एक परिषद को दो महंगी कारें खरीदने की अनुमति क्यों दी गई।

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