- इधर सीएम गहलोत ने लोकतंत्र की दुहाई देकर सभी 200 विधाायकों से भावुक अपील की।
- यह मुख्यमंत्री की निराशा और हताशा है-पूनिया।
- 11 अगस्त को जयपुर की होटल क्राउन प्लाजा में भाजपा के सभी विधायक जमा होंगे।
- कांग्रेस ने सभी 72 विधायकों को जमा करने की चुनौती भाजपा को दी।
- सीएम के गृह जिले जोधपुर के देचू में एक ही परिवार के 11 जने मृत मिले।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे 9 अगस्त को भी दिल्ली में सक्रिय रही। पिछले तीन दिनों से दिल्ली में ही रह कर राजे ने राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई बड़े नेताओं से मुलाकात की है। राजे अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी मिल सकती हैं। राजे की राजनीतिक सक्रियता से ही सचिन पायलट गुट के कांगेस के 19 विधायकों के इस्तीफा देने की संभावना बढ़ गई है। पायलट गुट के विधायक भी 9 जुलाई से ही दिल्ली में अज्ञात स्थान पर रह रहे हैं। सीएम गहलोत पहले ही आरोप लगा चुके हैं कि सचिन पायलट भाजपा के सम्पर्क में है और भाजपा के शासन वाले हरियाणा में 19 विधायकों को छिपा कर रखा गया है। राजस्थान में कांग्रेस की सरकार पर संकट पायलट की बगावत से ही आया है। पिछले एक माह से सचिन पायलट के बारे में सीएम गहलोत ने बहुत कुछ कहा है। अब यदि पायलट गुट के विधायक इस्तीफा नहीं देते हैं तो सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उल्टे व्हिप जारी होने पर सभी बागी विधायकों को विधानसभा में सरकार के पक्ष में वोट देना पड़ेगा। यदि विधानसभा में वोट नहीं दिया तो दल बदल काननू के तहत पायलट गुट के विधायक भविष्य में चुनाव लडऩे के अयोग्य घोषित हो जाएंगे। विधायकी तो जाएगी ही। पायलट गुट के विधायकों के इस्तीफे के बाद गहलोत को विधानसभा में बहुमत साबित करने में परेशानी होगी। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही राजस्थान में भाजपा के विधायकों को एकजुट किया जा रहा है। भाजपा के सभी 72 विधायक तभी एकजुट रह सकते हैं, जब पूर्व सीएम राजे का सहयोग मिले। प्रदेश में विधायकों की एकता बनी रहे, इसलिए दिल्ली में वसुंधरा राजे की बड़े नेताओं से लगातार मुलाकातें हो रही हैं। यदि पायलट गुट के विधायको के इस्तीफे की संभावना नहीं होती तो वसुंधरा राजे दिल्ली में बड़े नेताओं से मुलाकात भी नहीं होती। जानकार सूत्रों के अनुसार इस्तीफे की जानकारी सीएम गहलोत को भी लग गई है। इसलिए 9 अगस्त को प्रदेश के सभी 200 विधायकों से गहलोत ने भावुक अपील की है। विधायकों को लिखे पत्र में गहलोत ने कहा है कि लोकतंत्र को बचाने के लिए सभी विधायकों को सहयोग करना चाहिए। पत्र में कहा गया है कि कांग्रेस के कुछ बागी विधायक और भाजपा के नेता उनकी सरकार को अस्थितर कर रहे हैं। यह तब हो रहा है जब कोरोना का संकट लगातार बढ़ रहा है। गहलोत ने अपनी सरकार बचाने की अपील भाजपा सहित सभी विपक्षी दलों के विधायकों से भी की है। गहलोत की यह अपील दर्शाती है कि दिल्ली में बहुत कुछ घटित हो रहा है। गहलोत की इस भावुक अपील पर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि गहलोत अब मुख्यमंत्री के तौर पर निराश और हताश हैं, इसीलिए अपनी सरकार को बचाने के लिए विपक्षी दलों के विधायकों से मदद मांग रहे हैं। गहलोत को अब अपने समर्थक विधायकों को एकजुट रखना मुश्किल हो रहा है। यही वजह है कि 14 अगस्त को ही विधानसभा में सरकार बहुमत का प्रस्ताव रख देगी। पूनिया ने कहा कि भाजपा के विधायकों को 11 अगस्त को सायं चार बजे तक जयपुर की होटल क्राउन प्लाजा में एकत्रित होने को कहा गया है। अब कांग्रेस के विधायक हमें चुनौती दे रहे हैं कि भाजपा अपने 72 विधायकों को एकत्रित करके दिखाए। कांग्रेस विधायकों के इस कथन से पता चलता है कि गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार अपने पद का दुरुपयोग कर भाजपा विधायकों को बैठक में आने से रोकेगी। अब भाजपा भी अपने विधायकों को एकजुट रखने का हर संभव प्रयास करेगी। पूनिया ने कहा कि भाजपा विधायकों को 14 अगस्त तक होटल में ही रुकना पड़ सकता है।
देचू में 11 जनों के शव मिले:
सीएम अशोक गहलोत के गृह जिले में जोधपुर के निकट देचू गांव में एक ही परिवार के 11 जने मृत पाए गए है। पुलिस सूत्रों के अनुसार मृतकों के शवों के पास से जहर की पुडिय़ा मिली है। ये सभी मृतक पाकिस्तान से आए शरणार्थी थे। इन्हें भी भारत की नागरिकता मिलने का इंतजार था। किन परिस्थितियों में में एक ही परिवार के 11 जनों की मौत हुई इसको लेकर पुलिस जांच पड़ताल कर रही है। शरणार्थी वर्ग से जुड़े हिन्दूमल सोडा ने इस तरह 11 व्यक्तियों की मौत होने पर नाराजगी जताई है। वहीं विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया ने कहा है कि पिछले एक माह से प्रदेश की कानून व्यवस्था चौपट हो गई है। अपने सरकार को बचाने के लिए सीएम अशोक गहलोत विधायकों के साथ पिछले एक माह से जयपुर और जैसलमेर की होटलों में रह रहे हैं।







