भले ही विधानसभा में मेरी सीट भी बदल दी हो, लेकिन मैं सच्चा सिपाही बनकर कांग्रेस की रक्षा करुंगा-सचिन पायलट।

विधानसभा में विश्वास मत प्रस्ताव पर भाजपा और कांग्रेस की तीखी बहस।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – 14 अगस्त को विधानसभा सत्र के पहले दिन ही अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने जो विश्वास मत प्रस्ताव प्र्रस्तुत किया है वह आसानी से पास हो रहा है। क्योंकि गहलोत सरकार को करीब सवा सौ विधायकों का समर्थन है। सचिन पायलट के समर्थक 18 विधायक भी अब कांग्रेस के साथ खड़े हैं, लेकिन विधानसभा में हुई बहस में भाजपा और कांग्रेस के विधायकों ने एक दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा विधायक और प्रतिपक्ष के उपनेता राजेन्द्र राठौड़ ने जब सचिन पायलट के नाम का उल्लेख किया तो पायलट ने खड़े होकर ऐतराज जताया। पायलट ने विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी से कहा कि भले ही आपने मेरी सीट पीछे की पंक्ति में कर दी हो, लेकिन अब मैं सरहद पर आ गया है। सरहद की रक्षा के लिए सिपाही को ही तैनात किया जाता है। अब मैं सिपाही बनकर अपनी पार्टी की रक्षा करुंगा। पायलट के कथन से लग रहा था कि विधानसभा के अंदर तीसरी पंक्ति में बैठाए जाने से क्षुब्ध हैं। पायलट प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और डिप्टी सीएम रहते हुए विधानसभा में पहली पंक्ति में मुख्यमंत्री के पास वाली सीट पर बैठते थे। पायलट ने कहा कि उन्होंने अपने साथियों के साथ दिल्ली में कई डॉक्टर के समक्ष अपना मर्ज रखा है। डॉक्टर ने इलाज भी किया है। हमें इलाज के परिणाम का इंतजार करना चाहिए। लेकिन अब मैं सरहद पर तैनात होकर अपनी पार्टी की रक्षा करुंगा। इसके लिए मेरे पास भाला, तीर और कवच भी है। विश्वासमत प्रस्ताव की शुरुआत संसदीय कार्यमंत्री शांतिधारीवाल ने की। धारीवाल ने हिन्दुस्तान जिंक से लेकर उदयपुर की सरकारी होटल बेचने को लेकर केन्द्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। धारीवाल ने कहा कि अडानी और अम्बानी जैसे उद्योगपति मालामाल हो रहे हैं। इतिहास का उल्लेख करते हुए धारीवाल ने कहा कि अकबर ने हिन्दुस्तान के अधिकांश राज्य जीतने के बाद राजस्थान के मेवाड़ पर हमला किया, तो उसे मात खानी पड़ी। भाजपा ने भी कर्नाटक और मध्यप्रदेश की निर्वाचित सरकारों को गिराने के बाद जब राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार पर हमला किया तो उसे मुंह की खानी पड़ी। धारीवाल ने कहा कि राजस्थान में विधायकों की रेट बढ़ा दी गई,लेकिन गहलोत के रणबंकुरों ने छोटा भाई, मोटा भाई को छठी का दूध पिला दिया। राजस्थान में बीजेपी की तिकड़ी सीएम बनने का ख्वाब देख रही थी। वसुंधरा राजे की ओर इशारा करते हुए धारीवाल ने कहा कि मैडम नए नेता सीएम का ख्वाब देख रहे हैं। धारीवाल ने यह भी कहा कि दिल्ली में बैठक विधायकों को जब करोड़ों रुपए के नोट दिखाए गए तो वे घबरा गए। उन्होंने अपनी पत्नियों से राय ली तो पत्नियों ने कहा कि ऐसे पैसा बच्चों को बिगाड़ देगा। कांग्रेस की बाड़ाबंदी के सवाल पर धारीवाल ने पूछा कि भाजपा के विधायक गुजरात में क्या रासलीला करने गए थे। जिन विधायकों को गुजरात भेजा गया उनमें से पांच विधायक अहमदाबाद से ही लौट आए। मोटा भाई छोटा भाई का ऑपरेशन लोटस भाजपा के नेताओं ने फेल किया है। धारीवाल की बहस का जवाब देते हुए प्रतिपक्ष के उपनेता राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा कि सदन में पहली बार सत्तारूढ़ दल के विधायकों के बीच इतना अविश्वास देखने को मिल रहा है। सरकार 34 दिनों तक होटलों में कैद रही। कांग्रेस की अंर्तकहल की वजह से ही गहलोत सरकार को होटलों में रहना पड़ा। राजस्थान के संसदीय इतिहास का उस दिन सबसे बुरा दिन रहा, जब मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पांच घंटे तक राजभवन और राज्यपाल का घेराव किया गया। राठौड़ ने कहा कि जिन सचिन पायलट के हस्ताक्षर वाले चुनाव चिन्ह पर विधायक बने आज उन्हीं पायलट को गद्दार, मक्कार और धोखेबाज कहा जा रहा है। सीएम गहलोत कहते हैं कि राजनीति में सचिन पायलट की रगड़ाई नहीं हुई। पायलट को कम उम्र में सम्मान मिल गया। राठौड़ ने कहा कि अशोक गहलोत भी कम उम्र में ही केन्द्रीय मंत्री बन गए थे। गहलोत कई बार केन्द्रीय मंत्री रहे और अब तीसरी बार मुख्यमंत्री हैं। निर्दलीय विधायकों की ओर से बहस में संयम लोढ़ा ने भाग लिया। लोढ़ा ने कहा कि कोरोना काल में गहलोत के नेतृत्व में सरकार ने अच्छा काम किया है। भले ही हम लोग होटलों में रहे हो, लेकिन प्रदेश की जनता चाहती है कि अशोक गहलोत ही मुख्यमंत्री रहे। बहस में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने भी भाग लिया। पूनिया ने कहा कि आज लोकतंत्र की दुहाई दी जा रही है, सब जानते हैं कि कांग्रेस ने ही देश में आपातकाल लगाया था। कांगे्रस ने अनुच्छेद 356 का उपयोग कर निर्वाचित सरकारों को बर्खास्त करने का रिकॉर्ड बनाया है। सरकार कोरोना काल में लोगों की मदद का दावा करती है। लेकिन आज सरकारी अस्पतालों के हालात देखे जा सकते हैं। जो लोग अस्पतालों में इलाज करवा रहे हैं उनकी स्थिति बदसे बदत्तर है। इससे ज्यादा शर्मनाक बात और क्या हो सकती है कि एसएमएस अस्पताल से पीपीई किट और अन्य सामग्री गायब हो गई। गहलोत सरकार ने विधायकों के लिए एसओजी का गलत इस्तेमाल किया।

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