- भरी विधानसभा में बार बार अपमानित होने के बाद कहा-मैं राजस्थान छोड़ कर नहीं जा रहा। जनता का कर्जदार हंू।
- अशोक गहलोत की सरकार के लिए पायलट ने अपने पार्ट का काम पूरा किया।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत भले ही मीडिया को गालियां दें, लेकिन पिछले एक माह में गहलोत ने कहा उसी के अनुरूप मीडिया ने रिपोर्टिंग की। चाहे चैनल हो या अखबार सभी ने गहलोत की मिजाजपुर्सी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसका सबसे बड़ा उदाहरण 14 अगस्त को विधानसभा में गहलोत सरकार के विश्वासमत प्रस्ताव की रिपोर्टिंग को देखने से साफ पता चलता है। मैं मीडिया की रिपोर्टिंग पर तो कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता, क्योंकि करोड़ों रुपए के विज्ञापनों का सवाल है, लेकिन इतना जरूर है कि पूर्व डिप्टी सीएम और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे सचिन पायलट ने 14 अगस्त को विश्वास मत की जीत के बाद विधानसभा के बाहर मीडिया से कहा कि था कि हमारे सहयोग से सरकार ने विश्वास मत हासिल कर लिया है। कांग्रेस हाईकमान के साथ बैठकर दिल्ली में प्रदेश की राजनीति के लिए जो रोडमैप तैयार किया गया था, उस पर अमल होने का इंतजार है। मैं राजस्थान की जनता का कर्जदार हंू। मेरे प्रदेश की जनता ने बहुत स्नेह और सम्मान दिया है। मैं राजस्थान छोड़कर नहीं जाऊंगा। पायलट ने जिस अंदाज में अपनी बात को रखा उससे जाहिर था कि दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान के साथ जो समझौता हुआ, उसमें पायलट ने अपने पार्ट का काम पूरा कर दिया है। भरी विधानसभा में बार बार अपमानित होने के बाद भी पायलट और उनके समर्थक विधायकों ने सरकार के विश्वासमत पर पक्ष में वोट दिया। यही वजह रही कि मत विभाजन के बजाए ध्वनिमत से प्रस्ताव स्वीकृत हो गया। अब भले ही अशोक गहलोत कहें कि यदि कुछ विधायक पायलट गुट दिल्ली से नहीं लौटते तो भी सरकार बहुमत हासिल कर लेती। लेकिन यह भी सही है कि पायलट गुट के विधानसभा में मौजूद रहने के कारण ही विधानसभा में प्रस्ताव पर मत विभाजन की मांग नहीं हुई। यदि पायलट गुट उपस्थित नहीं होता तो विपक्ष मत विभाजन की मांग जरूर करता। पायलट ने 14 अगस्त को विधानसभा में वाकई अपमान का घूंट पिया। जो पायलट सीएम के बराबर बैठते थे, उन्हें तीसरी पंक्ति में बैठाकर आंसू बहाने के लिए मजबूर किया गया। विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले सीएम गहलोत ने कहा था कि माफ करो, भूल जाओ। लेकिन 14 अगस्त को सरकार के विश्वासमत प्रस्ताव पर पायलट को बोलने का मौका ही नहीं दिया गया।। विधानसभा में कांग्रेस की ओर से सबसे पहले उन्हीं नगरीय विकास मंत्री शांतिधारीवाल को बुलवाया, जिन्होंने जैसलमेर के सूर्यागढ़ होटल में बंद विधायकों के बीच कहा था कि हमें सचिन पायलट की वापसी मंजूर नहीं है। यही वजह रही कि पायलट की बगावत को धारीवाल ने मुगल शासक और भारत को कब्जाने वाले अबकर से जोड़ दिया। सरकार की ओर से तकनीकी शिक्षा मंत्री सुभाष गर्ग से लेकर निर्दलीय विधायक सयंम लोढ़ा तक को बोलने का अवसर मिला, लेकिन पायलट ताकते रह गए। स्वयं अशोक गहलोत ने पायलट की बगावत को भाजपा की लुटेरी हरकत तक बता दिया। भाजपा के विधायकों ने पायलट की बगावत को कांग्रेस का अंतर्कलह बताया तो वहीं कांग्रेस ने भाजपा की साजिश। यानि दोनों ने ही पायलट पर हमला करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अंदाजा लगाया जा सकता है कि 14 अगस्त को विधानसभा में पायलट की कैसी मन स्थिति रही होगी? पायलट ने सब कुछ सहते हुए कांग्रेस हाईकमान को दर्शा दिया कि उन्होंने अपना वायदा पूरा किया है। यानि राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने पायलट के सामने जो शर्त रखी थी कि बिना शर्त वापसी और गहलोत सरकार को विधानसभा में वोट दिया जाए, वह शर्त पायलट ने पूरी कर दी है। अब बारी उन शर्तों का पूरा करने की है जो पायलट ने आला कमान के सामने रखी थीं। इसीलिए पायलट ने कहा कि अब कांग्रेस की राजनीति में रोडमेप की क्रियान्विति का इंतजार है। देखना है कि तीन सदस्यी कमेटी के सदस्यों की घोषणा कब होती है तथा कब पायलट के सुझावों पर अमल होता है? यदि कांग्रेस आला कमान अपने वायदे पर खरा उतरता है तो आने वाले दिनों में गहलोत के सामने नई चुनौतियां खड़ी होंगी।







