मोहर्रम की रस्मों में शरीक होने के लिए जायरीन ख्वाजा साहब की दरगाह में नहीं आए-कार्यवाहक नाजिम डॉ. आदिल।

  • दरगाह में सांकेतिक रस्में होंगी।
  • सीएम अशोक गहलोत मोहर्रम के मौके पर 20 अगस्त को दरगाह में स्थानीय लोगों को प्रवेश की अनुमति दिलवावें-अंजुमन सचिव वाहिद हुसैन।
  • मिनी उर्स माने जाने वाले मोहर्रम पर इस बार नहीं होंगे प्रशासनिक इंतजाम।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – अजमेर में सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में होने वाली मोहर्रम की रस्मों को मिनी उर्स माना जाता है। लाखों जायरीन की आवक को देखते हुए जिला प्रशासन दरगाह कमेटी कायड़ स्थित विश्राम स्थली से लेकर दरगाह के अंदर तक प्रशासनिक इंतजाम करते हैं, लेकिन इस बार कोरोना काल को देखते हुए मिनी उर्स के लिए कोई इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। मोहर्रम की रस्में दरगाह में 20 से लेकर 30 अगस्त तक होंगी। केन्द्र सरकार के अधीन काम करने वाली दरगाह कमेटी के कार्यवाहक नाजिम डॉ. मोहम्मद आदिल ने ख्वाजा साहब के चाहने वालों से गुजारिश की है कि इस बार मोहर्रम की रस्मों में शरीक होने के लिए दरगाह में नहीं आए। जिला प्रशासन और दरगाह कमेटी भी बाहर से आने वाले जायरीन के लिए कायड़ विश्राम स्थली पर कोई इंतजाम नहीं कर रहे है। वैसे भी दरगाह में जायरीन का प्रवेश बंद है। डॉ. आदिल ने बताया कि इस बार दरगाह में मोहर्रम की रस्में सांकेतिक होंगी। दरगाह के अंदर विभिन्न स्थानों पर अनुमत विद्वान ही बयाने शहादत पढ़ेंगे। इसी प्रकार बाबा फरीद का चिल्ला खुलने पर पासधारी लोग ही प्रवेश कर सकेंगे। दरगाह कमेटी ताजिए के लिए चौकी धुलाई आदि के काम प्रति वर्ष की तरह करेगी। ताजिए के जुलूस में खादिम समुदाय ही मुख्य भूमिका होती है। हालांकि प्रशासन ने ताजिए के जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी है। इसी प्रकार अंदर कोट में हाईदौस की परंपरा भी नहीं निभाई जाएगी।
स्थानीय जायरीन का प्रवेश शुरू हो:
वहीं खादिमों की संस्था अंजुमन सैय्यद जादगान के सचिव वाहिद हुसैन अंगाराशाह ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मांग की है कि मोहर्रम की अवधि में स्थानीय जायरीन को दरगाह में प्रवेश की अनुमति दी जाए। अंगाराशाह ने सीएम को बताया कि कोरोना संक्रमण की वजह से गत 20 मार्च से ही दरगाह में जायरीन का प्रवेश बंद है। पिछले दिनों ईद के अवसर पर भी दरगाह में प्रवेश नहीं हो सका। चूंकि मोहर्रम इबादत का होता है, इसलिए आम मुसलमान की मोहर्रम की रस्मों में धार्मिक भावनाएं जुड़ी होती है। अंगाराशाह ने कहा कि आगामी एक सितम्बर से दरगाह में सीमित संख्या में जायरीन के प्रवेश की अनुमति देने पर विचार हो रहा है। ऐसे में यदि 10 दिन पहले 20 अगस्त से स्थानीय लोगों को प्रवेश दे दिया जाए तो खादिम समुदाय को भी सुविधा होगी। मोहर्रम में दरगाह के अंदर होने वाली रस्में खादिम समुदाय ही करवाता है। इसी प्रकार ताजिए कि जुलूस भी खादिम समुदाय के द्वारा ही निकाला जाता है। अंगाराशाह ने उम्मीद जताई कि सीएम अशोक गहलोत धार्मिक भावनाओं का ख्याल करते हुए निर्णय लेंगे। चूंकि दरगाह गत 20 मार्च से ही बंद है, इसलिए खादिमों को दरगाह के अंदर अपने निर्धारित स्थान की साफ सफाई भी करवानी है। उन्होंने कहा कि आईडी कार्ड देखकर दरगाह में स्थानीय लोगों को प्रवेश दिया जा सकता है।

 

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