सोनिया गांधी जब अस्पताल में भर्ती थी तब 23 नेताओं द्वारा पत्र लिखा जाना दुर्भाग्यपूर्ण-राहुल गांधी।

  • क्या पत्र लिखने वाले नेता कांग्रेस नेतृत्व को ब्लैक मेल कर रहे हैं।
  • कपिल सिब्बल को अपनी तीखी प्रतिक्रिया वापस लेने पड़ी। कांग्रेस में असमंजस की स्थिति।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – सोनिया गांधी के बाद कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन बनेगा? इस सवाल को लेकर सवाल को लेकर 24 अगस्त को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई। इस बैठक में कई सदस्य तो दिल्ली में मौजूद रहे, जबकि कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंस से जुड़े। बैठक शुरू होने के साथ ही श्रीमती गांधी ने अपने इस्तीफे की पेश कर दी। श्रीमती गांधी का कहना रहा कि अब उनका स्वास्थ ठीक नहीं रहता है, इसलिए कांग्रेस का नया अध्यक्ष चुना जाए। अभी कुछ नेता श्रीमती गांधी से पद पर बने रहने का आग्रह कर ही रहे थे कि राहुल गांधी ने बीच में दखल देते हुए कहा कि जब श्रीमती सोनिया गांधी अस्पताल में भर्ती थी और हम मध्यप्रदेश और राजस्थान के राजनीतिक संकट का सामना कर रहे थे, तब कुछ नेताओं ने अध्यक्ष पद को लेकर चिी लिख दी। राहुल ने कहा कि चिी लिखने का यह टाइमिंग पूरी तरह गलत है। राहुल ने कहा कि हमारा परिवार तो पहले से ही कह रहा कि बाहर के किसी व्यक्ति को अध्यक्ष बनाया जाए। हमारे बार बार कहने के बाद भी इस तरह का पत्र लिखा जाना दुर्भाग्य पूर्ण है। मालूम हो कि राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद, पूर्व केन्द्रीय मंत्री कपिल सिब्बल, मुकूल वासनिक, राज बब्बर, शशि थरूर, रेणूका चौधरी, विवेक तनखा, मनीष तिवारी आदि नेताओं ने सोनिया गांधी को एक पत्र लिखकर मांग की कि गांधी परिवार के बाहर से किसी नेता को अध्यक्ष बनाया जाए। इस पत्र में कांग्रेस संगठन के मौजूदा हालातों पर भी चिंता जताई गई। हालांकि यह पत्र 9 अगस्त को लिखा गया, लेकिन कार्यसमिति की बैठक से एक दिन पहले 23 अगस्त को यह पत्र मीडिया को लीक किया गया। पत्र के लीक होने को लेकर भी सोनिया गांधी ने नाराजगी जताई। बैठक में श्रीमती गांधी ने स्पष्ट तौर पर कहा कि अब वे अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर भी काम नहीं करेंगी।
क्या नेता कर रहे हैं ब्लैकमेल:
जानकार सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के जिन बड़े नेताओं ने सोनिया गांधी को पत्र लिखा है उनमें से अधिकांश नेता संगठन में कुछ न कुछ चाहते हैं। या फिर ऐसे नेताओं को महत्व नहीं मिल रहा है। पत्र लिखने वाले अनेक नेताओं का राज्यसभा का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है। सूत्रों के अनुसार मौजूदा समय में राज्यसभा में गुलाम नबी आजाद प्रतिपक्ष के नेता हैं। लेकिन अब राज्यसभा सांसद के तौर पर आजाद का कार्यकाल पूरा हो रहा है। हाल ही में कांगे्रस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खडग़े भी राज्यसभा में पहुंच गए है। माना जा रहा है कि आजाद का कार्यकाल पूरा होने के बाद खडग़े को ही प्रतिपक्ष का नेता बनाया जाएगा। कपिल सिब्बल भी चाहते हैं कि उन्हें दोबारा से राज्यसभा में भेजा जाए। लेकिन सिब्बल और आजाद को अब किसी राज्य से राज्यसभा में भेजना मुश्किल हो रहा है। पत्र लिखने वालों में लोकसभा सांसद मनीष तिवारी भी शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार लोकसभा में तिवारी प्रतिपक्ष के नेता बनना चाहते थे। तिवारी का कहना था कि वे हिन्दी भाषी है, इसलिए नरेन्द्र मोदी के सामने किसी हिन्दी भाषी को ही विपक्ष का नेता बनाया जाए। लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने अपने वफादार अधीर रंजन चौधरी को लोकसभा में विपक्ष का नेता बनाया। आनंद शर्मा, विवेक तनखा, राज बब्बर, जैसे नेता भी चाहते हैं कि राज्यसभा में दोबारा से जगह मिले। माना जा रहा है कि इन नेताओं ने कांग्रेस नेतृत्व पर दबाव बनने के लिए ही सामूहिक तौर पर पत्र लिखा है।
सिब्बल को प्रतिक्रिया वापस लेनी पड़ी:
कार्य समिति की बैठक से बाहर आई खबरों में बताया गया कि जब राहुल गांधी ने पत्र लिखने वाले नेताओं को लताड़ लगाई तब यह भी कहा कि ऐसे नेता भाजपा से मिले हुए हैं। राहुल गांधी के इस आरोप के बाद बैठक में उपस्थित गुलाम नबी आजाद ने अपने इस्तीफे की पेशकश कर दी। आजाद के इस्तीफे और राहुल के बयान को देखते हुए कपिल सिब्बल ने भी ट्वीट कर दिया। सिब्बल ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया में कहा कि मैंने राजस्थान और मणिपुर के राजनीतिक संकट में कांग्रेस की ओर से कोर्ट में पक्ष रखा। मैं तीस साल से कांग्रेस को अपनी सेवाएं दे रहा हंू। लेकिन इसके बाद भी मुझ पर भाजपा के साथ मिली भगत का आरोप लगाया जा रहा है। सिब्बल की इस प्रतिक्रिया को न्यूज चैनलों ने प्रमुखता के साथ प्रसारित किया। आजाद और सिब्बल के पलटवार से ऐसा लगा कि अब कांग्रेस दो गुटों में विभाजित हो गई है। लेकिन थोड़ी ही देर में सिब्बल ने अपना ट्वीट वापस ले लिया। सिब्बल ने दूसरे ट्वीट में कहा कि मुझे राहुल गांधी ने फोन किया है। राहुल ने कहा कि बैठक में भाजपा से मिला होने वाला बयान नहीं दिया। सिब्बल ने कहा कि राहुल गांधी के इस कथन के बाद मैं अपना पुराना ट्वीट वापस ले रहा हंू। इसी दौरान कांग्रेस से राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि कार्यसमिति की बैठक की खबरों को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। राहुल गांधी ने कांग्रेस के किसी भी नेता पर भाजपा से मिला होने का आरोप नहीं लगाया।
असमंजस की स्थिति:
कांग्रेस में इन दिनों असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इस असमंजस की स्थिति की वजह से ही कर्नाटक और मध्यप्रदेश में कांग्रेस को अपनी सरकारें गवानी पड़ी। राजस्थान में अशोक गहलोत ने अपने दम पर सरकार को बचाया है। असल में गांधी परिवार के बाहर का अध्यक्ष सफल ही नहीं हो सकता। यदि गांधी परिवार के बाहर का कोई नेता अध्यक्ष बनता है तो फिर कांग्रेस एकजुट नहीं रह सकती। कांग्रेस संगठन गांधी परिवार के इर्दगिर्द ही रहता है। राजस्थान के ताजा प्रकरण में देखा गया कि संकट का समाधान राहुल गांधी के दखल के बाद ही हुआ। भले ही राहुल गांधी अध्यक्ष न हो, लेकिन कांग्रेस संगठन में उनका रुतबा अध्यक्ष से भी ज्यादा है। सोनिया गांधी के अंतरिम अध्यक्ष रहते हुए जब 23 दिग्गज कांग्रेसी पत्र लिख सकते हैं तो फिर गांधी परिवार के बाहर का अध्यक्ष रहने पर संगठन के हालातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। यही वजह है कि मनमोहन सिंह, कैप्टन अमरेन्द्र सिंह, रितेश बघेल जैसे नेता चाहते हैं कि सोनिया गांधी के बाद राहुल गांधी ही कांग्रेस का नेतृत्व करें। यदि किन्हीं कारणों से राहुल गांधी अध्यक्ष नहीं बनते हैं तो फिर उनकी बहन प्रियंका गांधी को अध्यक्ष बनाया जाए।

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