- यह तो सचिन पायलट के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।
- आखिर कहां हो रहा है समन्वय?
- बसपा विधायकों के मामले में अध्यक्ष ही करें निर्णय-हाईकोर्ट।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – 24 अगस्त को जयपुर में आयोजित एक भव्य समारोह में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गणेश घोगरा को युवक कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष का पद ग्रहण करवाया। सीएम गहलोत के लिए घोगरा का पद ग्रहण कितना महत्वपूर्ण था, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि गहलोत को प्रात: 11 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में भाग लेना था। गहलोत सुबह 10 बजे ही समारोह स्थल पर पहुंच गए। पदग्रहण करवाने के बाद गहलोत ने भाषण भी दिया। गहलोत ने कहा कि अब युवक कांग्रेस में नई जान आ गई है। वे स्वयं भी एनएसयूआई और युवक कांग्रेस से निकल कर यहां तक पहुंचे हैं। गहलोत ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि घोगरा सभी को साथ लेकर चलेंगे। समारोह में कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास, मंत्री अशोक चांदना आदि उपस्थित थे। गत माह जब सचिन पायलट को प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद से हटाया गया था, तब मुकेश भाकर को भी युवक कांग्रेस के अध्यक्ष से हटा दिया गया था। भाकर के स्थान पर गणेश घोघरा को मनोनित किया गया था। हालांकि मनोनयन के बाद ही घोघरा के काम काज शुरू कर दिया था, लेकिन 24 अगस्त को जिस तरह पद ग्रहण का समारोह हुआ, उसे सचिन पायलट के जख्मों पर नमक छिड़कना बताया जा रहा है। पायलट गुट के वापस कांग्रेस के साथ खड़े होने के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि अब गहलोत और पायलट के बीच समन्वय रहेगा, लेकिन 24 अगस्त का समारोह बताता है कि प्रदेश की राजनीति में अब अकेले गहलोत गुट की ही चलेगी। भले ही हाईकमान ने अविनाश पांडे के स्थान पर अजय माकन को प्रभारी महासचिव बना दिया, लेकिन इससे गहलोत की स्थिति पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। अब पायलट और उनके समर्थकों के बगैर ही सरकार और संगठन चलेंगे। सब जानते हैं कि निर्वाचित अध्यक्ष मुकेश भाकर को हटाकर गणेश घोगरा का मनोनयन किया था। राहुल गांधी के द्वारा बनाई गई नीति के तहत ही युवक कांग्रेस के चुनाव हुए थे। गणेश घोगरा ने महासचिव पद के लिए चुनाव लड़ा था। लेकिन घोघरा को प्रदेशभर में 849 वोट ही मिले,इसलिए सचिव पद पर ही संतोष करना पड़ा। महासचिव की कार्यकारिणी में 69 दावेदारों में घोगरा का स्थान 36वां था। यानि जो घोगरा सचिव चुने गए थे, उनका मनोनयन सीधे अध्यक्ष के पद पर हो गया। घोगरा के मनोनयन से युवक कांग्रेस के चुनाव की प्रक्रिया धरी रह गई है। विधानसभा में 14 अगस्त को गहलोत सरकार ने बहुमत साबित करने के बाद सचिन पायलट ने उम्मीद जताई थी कि अब सबको साथ लेकर चला जाएगा और गत विधानसभा चुनाव में जो वायदे किए थे, उन्हें सरकार पूरा करेगी। लेकिन अब प्रतीत होता है कि संगठन और सराकर में पायलट का पहले जैसा महत्व नहीं रहा है। 24 अगस्त को घोघरा के पदग्रहण में न तो पायलट और न उनका कोई समर्थक उपस्थित रहा। पूरा समारोह एक तरफा रहा, जिसमें गहलोत जिंदाबाद के नारे जमकर लगे। भले ही प्रदेशभर में कोरोना संक्रमण बढ़ रहा हो, लेकिन पद ग्रहण समारोह में गहलोत समर्थकों की जमकर भीड़ थी। भीड़ के उत्साह और जिंदाबाद के नारों की गूंज के बीच ही गहलोत ने कहा कि अब युवक कांग्रेस में नई जान आ गई है। सवाल उठता है कि यदि दोनों गुटों में समन्वय हो रहा है तो पदग्रहण के नाम पर एक तरफ समारोह क्यों किया गया? क्या इस समारोह में पायलट को भी आमंत्रित किया गया?
विधानसभा अध्यक्ष ही करें निर्णय-हाईकोर्ट:
हाईकोर्ट बसपा के के 6 विधायकों को कांग्रेस में शामिल करने के प्रकरण में 24 अगस्त को हाईकोर्ट ने अपना निर्णय दे दिया है। भाजपा विधायक मदन दिलावर की याचिका का निस्तारण करते हुए जस्टिस महेन्द्र गोयल ने आदेश दिया कि इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष सुनवाई करें और फैसला दें। यानि अब एक बार फिर गेंद अध्यक्ष के पाले में आ गई है। दिलावर ने बसपा विधायकों को कांग्रेस में शामिल करने के अध्यक्ष के फैसले को चुनौती दी थी। दिलावर का तर्क रहा कि विलय तो राजनीतिक दलों का होता है, न की सिर्फ विधायकों का। ऐसे में विधानसभा अध्यक्ष के विलय के आदेश को निरस्त किया जाए। लेकिन कोर्ट ने अध्यक्ष के फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन मामले की सुनवाई कर निर्णय देने के आदेश दिए हैं।







