- वहीं शिक्षा मंत्री डोटासरा के निर्देश पर कांग्रेसियों ने जेईई और नीट की परीक्षा का विरोध किया।
- फिजीकल डिस्टेसिंग की धज्जियां उड़ी।
- कोरोना संक्रमण की वजह से यूनिवर्सिटी की फाइनल ईयर की परीक्षा रद्द नहीं की जा सकती-सुप्रीम कोर्ट।
- सचिन पायलट ने भी उपस्थिति दर्ज करवाई।
- कांग्रेस को विरोध का नैतिक अधिकार नहीं-सारस्वत।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – 28 अगस्त को राजस्थान में सत्तारूढ़ पार्टी के दो चेहरे देखने को मिले। प्रदेश में कांग्रेस सरकार का नेतृत्व अशोक गहलोत कर रहे हैं। सरकार की ओर से स्पष्ट कहा गया है कि सितम्बर माह में निर्धारित तीन बड़ी परीक्षाएं अपनी तिथियों पर होंगी। यदि किसी व्यक्ति ने परीक्षाओं के टलने को लेकर सोशल मीडिया पर झूठी खबरें डाली तो उसके विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया जाएगा। गहलोत सरकार जिन परीक्षाओं को आयोजित करने पर अड़ी हुई है उसमें राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 10वीं और 12वीं की पूरक परीक्षाएं, बीएसटीसी की प्रवेश परीक्षा (प्री डीएलएड) तथा राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल की 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं शामिल हैं। इन तीनों परीक्षाओं में करीब आठ लाख विद्यार्थी भाग लेंगे। सरकार का दावा है कि परीक्षा केन्द्रों पर सोशल डिस्टेसिंग का पूरा ख्याल रखा गया है। लेकिन वहीं 28 अगस्त को ही प्रदेशभर में कांग्रेस के ही कार्यकर्ताओं ने जेईई और नीट की परीक्षा तीन माह टालने की मांग को लेकर केन्द्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। जिला मुख्यालयों पर हुए कांग्रेस के प्रदर्शन में सरकार के मंत्रियों और विधायकों ने भी भाग लिया। कांग्रेस के नेताओं का कहना रहा कि यदि जेईई और नीट की परीक्षा होती है तो कोरोना संक्रमण फैलने का अंदेशा है। कोरोना काल में परीक्षा होने से परीक्षार्थियों को भी परेशानी होगी। मजे की बात यह है कि कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को प्रदर्शन करने के निर्देश गहलोत सरकार के शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने ही दिए। डोटासरा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी हैं। प्रदेश अध्यक्ष की हैसियत से डोटासरा ने प्रदेशभर के कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए थे। यानि शिक्षा मंत्री की हैसियत से डोटासरा शिक्षा विभाग से जुड़ी तीन परीक्षाएं करवा रहे हैं तो वहीं प्रदेश कांगे्रस के अध्यक्ष की हैसियत से जेईई और नीट परीक्षा को टालने के लिए प्रदर्शन करवा रहे हैं।
फिजीकल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ी:
कांगे्रस के प्रदर्शन में प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों पर कोरोना काल में फिजीकल डिस्टेसिंग की धज्जियाँ उड़ी। कांग्रेस के कार्यकर्ता भीड़ के रूप में ही जमा हुए और प्रदर्शन किया। जयपुर में एमएनआईटी संस्था के बाहर हुई सभा के मंच पर अनेक मंत्री, विधायक, नेता आदि आपस में सट कर बैठे हुए थे। किसी को भी कोरोना वायरस का डर नहीं था। जबकि मास्क न लगाने पर आम व्यक्ति से जुर्माना वसूला जा रहा है। कोविड-19 के सारे नियम आम व्यक्ति पर लागू किए जा रहे हैं, जबकि सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यकर्ता ऐसे नियमों की सरे आम धज्जियां उड़ा रहे हैं।
फाइनल ईयर की परीक्षा हो:
28 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि राज्यों की यूनिवर्सिटी की फाइनल ईयर की परीक्षा अनिवार्य रूप से करवाएं। कोरोना काल में यूनिवर्सिटी की परीक्षाएं नहीं करवाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि कोई भी राज्य यूनिवर्सिटी की फाइनल ईयर की परीक्षा पर रोक नहीं लगा सकता हे। यूजीसी ने 30 सितम्बर तक परीक्षा करवाने के निर्देश दे रखे हैं। उसी के मुताबिक परीक्षा होनी चाहिए। कोई भी राज्य बगैर परीक्षा के विद्यार्थी को अगली कक्षा में प्रमोट नहीं कर सकता है। कोर्ट के इस आदेश के बाद देशभर की यूनिवर्सिटी को अब फाइनल ईयर की परीक्षा सितम्बर माह में करवानी ही पड़ेगी।
पायलट ने भी उपस्थित दर्ज करवाई:
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष सचिन पायलट ने भी 28 अगस्त को जयपुर में कांग्रेस के प्रदर्शन में भाग लिया। इस अवसर पर पायलट के साथ विधायक राकेश पारीक और अन्य लोग उपस्थित रहे। पायलट धरना स्थल पर उस समय के लिए आए और जेईई व नीट परीक्षा के आयोजन का विरोध किया। उल्लेखनीय है कि एक माह तक 18 विधायकों के साथ दिल्ली में अज्ञात स्थान पर रहने के बाद यह पहला अवसर रहा जब पायलट ने कांगे्रस के किसी विरोध प्रदर्शन में भाग लिया। 28 अगस्त को पायलट जयपुर में अपने निवास स्थान पर ही रहे और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार प्रभारी महासचिव अजय माकन के प्रस्तावित दौरे की तैयारियों में भी पायलट व्यस्त रहे।
कांग्रेस को विरोध का अधिकार नहीं:
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और अजमेर देहात भाजपा के पूर्व अध्यक्ष प्रो. बीपी सारस्वत ने एक बयान जारी कर कहा कि जेईई और नीट परीक्षा का विरोध करने का कांगे्रस को नैतिक अधिकारी नहीं है। जब राजस्थान में कांग्रेस की सरकार कोरोना काल में ही 10 लाख विद्यार्थियों की परीक्षा करवाने जा रही है, तब जेईई और नीट की परीक्षा का विरोध करना कांग्रेस का दोहरा चरित्र उजागर करता है। यदि जेईई और नीट की परीक्षा से कोरोना संक्रमण का डर है तो फिर अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार राजस्थान में सितम्बर माह में 10 लाख अभ्यर्थियों की परीक्षा क्यों ले रही है? सारस्वत ने कहा कि कांग्रेस के नेता सिर्फ श्रीमती सोनिया गांधी को खुश करना चाहते हैं, इसलिए जेईई और नीट की परीक्षा का विरोध कर रहे हैं।







